बाल विवाह पर MP सरकार का बड़ा शिकंजा: अब गांव-गांव होगी कानूनी निगरानी

“बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर अब सरकार ने सीधे जमीनी स्तर से वार करने की तैयारी कर ली है। नई व्यवस्था के तहत कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और जनपद सीईओ के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पटवारी तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सेक्टर सुपरवाइजर को भी कानूनी अधिकार दिए गए हैं। “

भोपाल, 27 मई (Janprachar.com)

बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर अब सरकार ने सीधे जमीनी स्तर से वार करने की तैयारी कर ली है।

राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए जिला मुख्यालय से लेकर गांव स्तर तक अधिकारियों की लंबी श्रृंखला को “बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी” घोषित कर दिया है।

अब केवल बड़े अफसर ही नहीं, बल्कि पटवारी, राजस्व निरीक्षक और महिला एवं बाल विकास विभाग के सुपरवाइजर भी बाल विवाह रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप कर सकेंगे।

गांव तक पहुंचेगी कानून की सीधी पकड़

नई व्यवस्था के तहत कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और जनपद सीईओ के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पटवारी तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सेक्टर सुपरवाइजर को भी कानूनी अधिकार दिए गए हैं।

शहरी इलाकों में निगम और नगर पालिका के राजस्व व स्वास्थ्य अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पटवारी दर्ज करा सकेंगे FIR

सरकार का मानना है कि बाल विवाह अक्सर गांवों और दूरदराज इलाकों में छिपकर कराए जाते हैं।

ऐसे में अब स्थानीय स्तर पर मौजूद अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचकर शादी रुकवा सकेंगे और जरूरत पड़ने पर FIR भी दर्ज करा सकेंगे।

शादी सीजन में रहेगी खास निगरानी

महिला एवं बाल विकास विभाग और राजस्व विभाग के संयुक्त अभियान के तहत विवाह सीजन में विशेष निगरानी रखी जाएगी।

प्रशासनिक स्तर पर बनी इस बड़ी चेन से अब बाल विवाह की सूचना दबाना आसान नहीं होगा।

बालिकाओं की सुरक्षा और शिक्षा पर फोकस

सरकार ने साफ किया है कि बाल विवाह रोकना सिर्फ कानून लागू करना नहीं, बल्कि बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना है।

यही वजह है कि अब लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय की जाएगी।

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