वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा-नहीं हुआ घोटाला,EOW ने खोली पोल,जिंदा को मरा बताया ,पास कराए क्लेम

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सार-संक्षेप
पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना में ग्वालियर-चंबल संभाग में जिंदा लोगों को मृत दिखाकर क्लेम पास किए गए। यह सवाल सात माह पहले विधानसभा में उठा था, लेकिन अफसरों ने वित्त मंत्री से गलत जवाब दिलाकर मामला दबाया। अब ईओडब्ल्यू की कार्रवाई ने फर्जीवाड़ा उजागर कर दिया है।

इन 5 प्रमुख बिंदुओं से समझें खबर

  • अगस्त में विधानसभा में पीएमजेजेबीवाई में फर्जीवाड़े का सवाल उठा।

* दिसंबर सत्र में मंत्री के नाम से गलत व भ्रामक जवाब दिया गया।

* अफसरों ने तथ्य बदलकर घोटाले से इनकार कराया।

* ईओडब्ल्यू जांच में 8 फर्जी क्लेम, दो-दो लाख की रकम उजागर।

* 10–12 हजार दावों की जांच जारी, बड़े घोटाले की आशंका।

रवि अवस्थी, भोपाल।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) में ग्वालियर-चंबल संभाग के भीतर सामने आए फर्जीवाड़े को लेकर अब एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। दरअसल,यह मामला सात महीने पहले ही राज्य विधानसभा में उठ चुका था।

तब इसे दबाने की गरज से वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा से गलत जवाब दिलाया गया,लेकिन राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (EOW) की शुरुआती ताजा कार्रवाई ने मामले को साफ कर दिया है।

अगस्त में पूछा गया था सीधा सवाल
ग्वालियर के कांग्रेस विधायक डॉ. सतीश सिकरवार ने गए साल 5 अगस्त को विधानसभा के मानसून सत्र में लिखित प्रश्न के जरिए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में संभावित फर्जीवाड़े की जानकारी मांगी थी। सवाल स्पष्ट था-क्या योजना के तहत जिंदा लोगों को मृत दिखाकर बीमा क्लेम पास किए गए हैं?

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सदन में अफसरों ने दिया गोलमोल जवाब


जवाब बीते माह,यानी दिसंबर के पावस सत्र में आया। इस सवाल के जवाब में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के नाम से जो उत्तर सदन में पेश किया गया, उसमें किसी भी तरह के घोटाले से साफ इनकार कर दिया गया। जवाब में लिखा गया-जी नहीं। बैंकों द्वारा इस प्रकार का कोई क्लेम भुगतान नहीं किया गया।

जबकि प्रश्न बैंकों नहीं, बीमा कंपनियों द्वारा किए गए भुगतानों से जुड़ा था। जानकारों का कहना है कि यहीं पर जिम्मेदार अफसरों ने तथ्य बदलकर पेश किए और पूरे मामले को तकनीकी शब्दों के जाल में उलझाकर नकार दिया।

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तो सात महीने पहले खुल जाता घोटाला
यदि विधानसभा में सवाल उठने के बाद विभागीय स्तर पर ईमानदार (Honestly)जांच शुरू की जाती, तो पीएमजेजेबीवाई (PMJJBY) में चल रहे इस फर्जीवाड़े का खुलासा सात महीने पहले ही हो सकता था।

लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो तथ्य सामने रखे और न ही किसी तरह की सतर्कता दिखाई। उलटे, जवाब के जरिए मामले को घोटाला नहीं बताकर दबा दिया गया।

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अब ईओडब्ल्यू ने खोली पोल


ईओडब्ल्यू ग्वालियर की जांच ने अफसरों के दावों की पोल खोल दी है। अब तक आठ ऐसे प्रकरण सामने आ चुके हैं,जिनमें जिंदा बीमित व्यक्तियों को मृत दिखाकर बीमा कंपनियों से दो-दो लाख रुपये का क्लेम निकाला गया।

जांच एजेंसी ने बीते पांच वर्षों के 10 से 12 हजार दावा प्रकरणों को स्कैन किया है और इसे संगठित गिरोह द्वारा अंजाम दिया गया फर्जीवाड़ा माना जा रहा है।

अफसरों की भूमिका कटघरे में
सबसे बड़ा सवाल अब जिम्मेदार अधिकारियों (Officers)की भूमिका को लेकर है। जिन विभागों और अफसरों को विधानसभा (Assembly)में सटीक और तथ्यपरक जानकारी देनी थी, उन्होंने या तो जांच ही नहीं की या जानबूझकर गलत जानकारी दी।

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाली नगरीय निकाय शाखाएं, संबंधित बैंक और बीमा कंपनियों से समन्वय करने वाले अफसर-सभी की भूमिका अब संदेह के घेरे में है।

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आगे और खुलासों की आशंका
ईओडब्ल्यू (EOW)फिलहाल 10–12 हजार दावों की जांच कर रहा है, जबकि योजना में बीते साल अगस्त तक 15 लाख,80 हजार 889 हितग्राही पंजीकृत हैं।

इनमें अधिकांश को क्लेम भुगतान भी हुआ। यदि पूरे डाटा (Datas)की गहन पड़ताल हुई, तो यह मामला कहीं बड़े घोटाले (Scam) का रूप ले सकता है। तब यह भी साफ होगा कि विधानसभा को गुमराह करने की जिम्मेदारी किन अफसरों पर तय होगी।

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