नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा बदलाव किया है। अब ऑनलाइन Form-6 में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ा घोषणा-पत्र शामिल नहीं होगा। आयोग ने इसे Form-6 से अलग कर दिया है। यानी नए वोटर के तौर पर नाम जुड़वाने वाले लोगों को अब सामान्य आवेदन और SIR से संबंधित घोषणा-पत्र अलग-अलग भरना होगा।
यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब Form-6 में SIR का अतिरिक्त कॉलम जोड़ने को लेकर चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियां उठी थीं। दो चुनाव आयुक्तों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। इसके बाद आयोग ने 21 अक्टूबर को दोनों दस्तावेजों को अलग करने का फैसला किया। 4 नवंबर को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, अब ECINet पोर्टल पर भी यह बदलाव लागू कर दिया गया है।
क्या बदला है Form-6 में?
Form-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है। पहले SIR प्रक्रिया के दौरान इसके ऑनलाइन संस्करण में एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। इसमें आवेदक को बताना होता था कि उसका नाम पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची में था या नहीं।
अगर आवेदक का नाम उस सूची में नहीं था, तो उसे यह जानकारी देनी होती थी कि उसके माता-पिता या दादा-दादी में से किसी का नाम उस पुरानी सूची में दर्ज था या नहीं। तीसरा विकल्प यह था कि आवेदक और उसके माता-पिता का नाम भी पुरानी सूची में नहीं था।
अब यह घोषणा Form-6 के भीतर नहीं रहेगी। इसे अलग दस्तावेज के तौर पर भरने की व्यवस्था की गई है। इस तरह सामान्य मतदाता पंजीकरण आवेदन और SIR से जुड़ी जानकारी अलग-अलग दर्ज होगी।
चुनाव आयोग ने क्यों लिया फैसला?
इस बदलाव की पृष्ठभूमि में आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियां हैं। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने Form-6 में SIR से जुड़ी घोषणा को शामिल करने पर सवाल उठाए थे।
उनकी आपत्ति थी कि Form-6 निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित वैधानिक फॉर्म है। इसमें बदलाव करने के लिए तय कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी है। केवल ऑनलाइन पोर्टल पर अतिरिक्त कॉलम जोड़कर वैधानिक फॉर्म का स्वरूप नहीं बदला जा सकता।
रिपोर्ट के मुताबिक, जोशी ने मई 2026 में इस पर आपत्ति दर्ज की थी, जबकि संधू ने अगस्त में इस व्यवस्था को अनधिकृत बताते हुए इसे हटाने की बात कही थी।
21 अक्टूबर को अलग करने का फैसला
चुनाव आयोग ने 21 अक्टूबर 2026 को अपने Electoral Roll Division के स्तर पर Form-6 और SIR घोषणा-पत्र को अलग-अलग रखने का निर्णय लिया था।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में बताया कि ऑनलाइन फॉर्म में दोनों को एक साथ रखने का उद्देश्य प्रक्रिया को आसान बनाना था। इससे आवेदक को एक ही OTP और एक ई-सिग्नेचर के जरिए आवेदन पूरा करने की सुविधा मिलती थी।
हालांकि, आयोग ने माना कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर घोषणा-पत्र जिस तरह दिखाया जा रहा था, उससे ऐसा लग सकता था कि Form-6 में ही संशोधन कर दिया गया है। इसके बाद दोनों दस्तावेजों को अलग करने का निर्णय लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट में आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि SIR से संबंधित तीन आदेशों के जरिए वैधानिक Form-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया।
आयोग के मुताबिक, अतिरिक्त घोषणा-पत्र एक अलग दस्तावेज था, जिसे SIR प्रक्रिया के दौरान लागू किया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि Form-6 में बदलाव करने का अधिकार निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
इससे पहले 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसने संशोधित Form-6 को न तो मंजूरी दी है और न ही खारिज किया है। अदालत इस मामले में मूल रिकॉर्ड और बदलाव की प्रक्रिया को समझना चाहती थी।
नए वोटर को अब क्या करना होगा?
नए मतदाता के रूप में नाम जुड़वाने के लिए Form-6 पहले की तरह जरूरी रहेगा। लेकिन SIR वाले क्षेत्रों में आवेदक को इससे जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र अलग से भरना होगा।
इसका उद्देश्य सामान्य मतदाता पंजीकरण और पिछली SIR मतदाता सूची से जुड़े विवरण को अलग रखना है। आवेदक को घोषणा-पत्र में अपनी या अपने परिवार के सदस्यों की पुरानी मतदाता सूची से संबंधित जानकारी देनी पड़ सकती है।
आवेदन करते समय ECINet पोर्टल पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है, ताकि Form-6 और SIR घोषणा-पत्र की प्रक्रिया में कोई जानकारी छूट न जाए।
SIR और Form-6 विवाद का राजनीतिक-प्रशासनिक असर
Form-6 का यह मामला केवल ऑनलाइन आवेदन में बदलाव तक सीमित नहीं रहा। इसे लेकर चुनाव आयोग के कामकाज, निर्णय लेने की प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों पर भी सवाल उठे।
विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर पारदर्शिता की मांग की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि आयोग के महत्वपूर्ण फैसले सामूहिक और सर्वसम्मति से लिए गए।
फिलहाल Form-6 और SIR घोषणा-पत्र को अलग करने का फैसला लागू कर दिया गया है। इससे नए मतदाताओं के आवेदन की ऑनलाइन प्रक्रिया में दोनों दस्तावेजों की भूमिका स्पष्ट हो गई है।