नई दिल्ली।
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम सुनवाई की।
कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने से इनकार कर दिया।
हालांकि, अदालत ने केंद्र और चुनाव आयोग समेत सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
मामले में आरोप है कि SIR से जुड़े करीब 14 फैसले दूसरे दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह बहुसदस्यीय चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया के नियमों के खिलाफ है।
इन आरोपों की अभी अदालत ने पुष्टि नहीं की है।

(मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार,कार्यकाल फरवरी 2029 तक)
कोर्ट ने कहा- कानून का पालन जरूरी
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ किया कि
चुनाव आयोग को कानून के मुताबिक काम करना होगा।
कोर्ट के मुताबिक, आयोग के फैसले सर्वसम्मति से हो सकते हैं।
मतभेद होने पर बहुमत का रास्ता भी कानून में मौजूद है।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि रिकॉर्ड से पता चलता है कि
किसी फैसले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ,
तो उस फैसले की कानूनी वैधता की जांच की जा सकती है।

CEC को सस्पेंड करने की मांग खारिज
याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने सुनवाई के दौरान
CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या उनकी शक्तियां सीमित करने का अंतरिम आदेश मांगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि SIR से जुड़े फैसलों में बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं ली गई।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ऐसी कोई अंतरिम कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने पहले चुनाव आयोग और अन्य पक्षों का जवाब मांगना उचित समझा।

14 फैसलों के रिकॉर्ड पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता ने मांग की कि SIR से जुड़े उन सभी फैसलों का रिकॉर्ड अदालत के सामने रखा जाए।
दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और
विवेक जोशी ने अलग-अलग मौकों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच
SIR से जुड़े मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कई आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
Form-6 पर भी सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने
Form-6 के किसी संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है।
यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने
के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के बाद तेज हुआ।
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के
दो अन्य आयुक्तों ने SIR से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्ति जताई थी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई।
इसमें आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और CEC की भूमिका पर सवाल उठाए गए।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
केंद्र, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों के जवाब आने के बाद अदालत रिकॉर्ड की जांच करेगी।
यानी फिलहाल CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या निलंबित करने का कोई अंतरिम आदेश नहीं है,
लेकिन SIR से जुड़े निर्णयों की प्रक्रिया अब सुप्रीम कोर्ट की जांच के दायरे में है।
Keywords:
SIR विवाद, Supreme Court SIR, CEC Gyanesh Kumar, ज्ञानेश कुमार,
चुनाव आयोग, Election Commission, SIR Latest News, Supreme Court News,
SIR 14 Decisions, Election Commission SIR