2024 का लोकसभा चुनाव था अवैध, राहुल गांधी ने उठाए वोट चोरी के आरोप, रामलीला मैदान में विपक्ष की महारैली

गठबंधन ने दिल्ली के रामलीला मैदान में SIR और कथित वोट चोरी के खिलाफ रैली की। विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार, 1 नवंबर 2026 को INDIA गठबंधन ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ बड़ी रैली आयोजित की। रामलीला मैदान में हुई इस रैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और वाम दलों समेत विपक्षी गठबंधन के कई घटक दलों के नेता शामिल हुए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और RJD नेता तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा।

विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया। गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता के नाम पर पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।

मिंटो ब्रिज से रामलीला मैदान तक निकला विपक्ष का मार्च

रैली के तहत INDIA गठबंधन के नेताओं और समर्थकों ने दिल्ली में मार्च निकाला। विपक्षी नेताओं का काफिला मिंटो रोड और कनॉट प्लेस के आसपास के इलाके से आगे बढ़ा। नेता खुली बस में सवार होकर रामलीला मैदान की ओर रवाना हुए। मार्च में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला और अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए।

रैली में कई राज्यों से आए पार्टी कार्यकर्ता, छात्र संगठनों के सदस्य और नागरिक समाज के प्रतिनिधि भी पहुंचे। समर्थकों के हाथों में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के पोस्टर और बैनर दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए।

राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानें बंद कराने का लगाया आरोप

मार्च के दौरान राहुल गांधी ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद रहने को लेकर BJP पर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी रैली के दिन दुकानदारों को नुकसान पहुंचाने के लिए दुकानें जबरन बंद कराई गईं।

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राहुल गांधी ने कहा कि रैली में आने वाले लोगों से उन्होंने दिल्ली के स्थानीय व्यापारियों की दुकानों से खरीदारी करने की अपील की थी, ताकि त्योहारों के मौसम में कारोबारियों को फायदा हो। लेकिन उनके मुताबिक, कनॉट प्लेस पहुंचने पर कई दुकानें बंद मिलीं।

हालांकि, दुकानों को जबरन बंद कराने के आरोप पर BJP की ओर से अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के दावों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

SIR और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष के आरोप

INDIA गठबंधन का मुख्य विरोध चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और पात्र नागरिकों को मताधिकार से वंचित किए जाने का खतरा पैदा हुआ है।

विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि कुछ मतदाताओं को गलत तरीके से मृत या अनुपस्थित दर्ज किया गया। रैली में यह भी आरोप लगाया गया कि अल्पसंख्यक और वंचित समुदायों के मतदाताओं पर इसका असर पड़ सकता है। गठबंधन ने चुनाव आयोग से प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि चिह्नित प्रविष्टियों का सत्यापन किया गया है और जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसलिए SIR को लेकर विपक्ष के आरोप और आयोग का पक्ष, दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज

रैली में विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग दोहराई। गठबंधन का आरोप है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में निष्पक्षता और पारदर्शिता से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया है।

इससे एक दिन पहले, 31 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर CEC के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की थी। यह राजनीतिक विरोध का प्रतीकात्मक कार्यक्रम था, संवैधानिक महाभियोग की औपचारिक प्रक्रिया नहीं।

BJP ने भी निकाली समानांतर रैली

INDIA गठबंधन की रैली के बीच BJP ने भी दिल्ली में समानांतर मार्च आयोजित किया। BJP ने कांग्रेस पर 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी के दिन रैली आयोजित करने को लेकर सवाल उठाए। पार्टी ने अपने कार्यक्रम को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नाम दिया।

BJP नेताओं ने विपक्ष की रैली को राजनीतिक प्रदर्शन बताते हुए उसके आरोपों को खारिज किया। पार्टी का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना है। इस तरह 1 नवंबर को दिल्ली में दोनों राजनीतिक पक्षों के कार्यक्रमों के कारण राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं।

सुरक्षा के लिए 4 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात

रैली को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। पुलिस के मुताबिक, मार्च के रास्ते और रामलीला मैदान के आसपास 4,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की टुकड़ियां तैनात की गईं।

रामलीला मैदान को 14 सुरक्षा जोन में बांटा गया। निगरानी के लिए 200 से ज्यादा CCTV कैमरों, ड्रोन और बॉडी-वॉर्न कैमरों का इस्तेमाल किया गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी की गई।

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रैली में शामिल होने वालों की संख्या को लेकर INDIA गठबंधन और पुलिस के अनुमान अलग-अलग थे। गठबंधन ने 10 लाख तक लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई थी, जबकि पुलिस का अनुमान करीब 50 हजार लोगों का था। मैदान में बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा घेरों के कारण वास्तविक क्षमता इससे कम रहने का अनुमान भी जताया गया।

दिल्ली के कई इलाकों में ट्रैफिक पर असर

मार्च और रैली के कारण मध्य दिल्ली के कुछ रास्तों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका थी। मिंटो रोड, अजमेरी गेट, कनॉट प्लेस और रामलीला मैदान के आसपास यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन लागू किए गए। भारी वाहनों की आवाजाही पर भी कुछ मार्गों में रोक लगाई गई।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ते उपलब्ध रखने की व्यवस्था की गई है। वाहन चालकों को प्रभावित मार्गों से बचने और पुलिस की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई।

आगे भी जारी रह सकता है INDIA गठबंधन का विरोध

रामलीला मैदान की रैली को INDIA गठबंधन ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपने विरोध अभियान का बड़ा कार्यक्रम बताया। विपक्षी दलों का कहना है कि वे SIR से जुड़े सवालों को आगे भी उठाते रहेंगे और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग करेंगे।

वहीं, BJP और केंद्र सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया गया है। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की भूमिका और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।