शेयर बाजार में 4 दिन में ₹20.78 लाख करोड़ स्वाहा, सेंसेक्स लगातार चौथे दिन गिरा; जानें गिरावट की 5 बड़ी वजहें

भारतीय शेयर बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार मूल्य करीब ₹20.78 लाख करोड़ घट गया। कच्चे तेल की तेजी और पश्चिम एशिया में तनाव इसकी प्रमुख वजहों में शामिल हैं।

भारतीय शेयर बाजार में बीते चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। 23 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुए कारोबारी सत्र तक बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब ₹20.78 लाख करोड़ घट गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई की आशंकाओं ने बाजार के माहौल पर दबाव बनाया।

शेयर बाजार में चार दिन में कितनी संपत्ति घटी?

शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17% गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। इस तरह सेंसेक्स लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। छुट्टियों के कारण छोटे रहे कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स कुल 1,605.44 अंक यानी 2.15% टूट गया।

बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, 16 अक्टूबर को बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग ₹472.62 लाख करोड़ था, जो 23 अक्टूबर तक घटकर करीब ₹451.83 लाख करोड़ रह गया। इस दौरान बाजार मूल्य में लगभग ₹20,78,774 करोड़ यानी ₹20.78 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई।

ध्यान देने वाली बात यह है कि बाजार पूंजीकरण में गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि हर निवेशक की पूरी रकम डूब गई या सभी निवेशक दिवालिया हो गए। इसका मतलब है कि शेयरों की कीमतें घटने से सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है। किसी निवेशक को कितना नुकसान हुआ, यह उसके पोर्टफोलियो और खरीदे गए शेयरों की कीमत में बदलाव पर निर्भर करता है।

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शेयर बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजहें

1. पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच टकराव की आशंकाओं ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की स्थिति में तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का डर है। इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी और भारतीय शेयरों पर बिकवाली का दबाव आया।

2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

ब्रेंट क्रूड की कीमत 23 अक्टूबर को करीब 116.73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो लगभग पांच महीने का उच्च स्तर बताया गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चा तेल महंगा होने से आयात बिल, परिवहन लागत और कंपनियों के खर्च बढ़ने की आशंका रहती है।

3. महंगाई बढ़ने का डर

तेल की कीमतों में लगातार तेजी से महंगाई बढ़ने की चिंता गहरा सकती है। यदि ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ती है, तो इसका असर कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। निवेशक इसी आशंका के चलते जोखिम वाले शेयरों में निवेश घटाने लगते हैं।

4. अमेरिकी बाजारों और बॉन्ड यील्ड का दबाव

वैश्विक बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बनी। ऐसे माहौल में निवेशक अधिक सतर्क हो सकते हैं और उभरते बाजारों में निवेश घटा सकते हैं। रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई।

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5. बड़े शेयरों में बिकवाली

शुक्रवार के कारोबार में टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स सेंसेक्स के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में रहे। दोनों के शेयरों में 3% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई। इसके अलावा ट्रेंट, टेक महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडिगो, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, बजाज फाइनेंस और एसबीआई सहित कई शेयर दबाव में रहे।

किन शेयरों में दिखी मजबूती?

बाजार में व्यापक कमजोरी के बावजूद कुछ बड़ी कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। रिपोर्ट के अनुसार, इटरनल, एलएंडटी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, इंफोसिस और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में तेजी देखने को मिली।

अब शेयर बाजार की नजर किन बातों पर रहेगी?

आने वाले सत्रों में निवेशक कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखेंगे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर को होने वाली मौद्रिक नीति बैठक भी बाजार की दिशा के लिए अहम रह सकती है। इसके अलावा जियो प्लेटफॉर्म्स की 28 अक्टूबर को प्रस्तावित लिस्टिंग पर भी निवेशकों का ध्यान रहेगा।

फिलहाल बाजार की आगे की चाल कई बाहरी और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी। कच्चे तेल की कीमतों में राहत और भू-राजनीतिक तनाव में कमी से निवेशकों का भरोसा सुधर सकता है, जबकि तनाव बढ़ने और तेल महंगा बने रहने पर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका रहेगी।