रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने निवेशकों की भागीदारी के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। इस इश्यू को 1.2 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिलने की खबर है। इसके साथ ही जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ दुनिया का पहला ऐसा पब्लिक इश्यू बन गया, जिसे एक करोड़ से अधिक आवेदन मिले। इससे पहले वारी एनर्जीज के आईपीओ के नाम करीब 97 लाख आवेदन का रिकॉर्ड बताया गया था।
जियो के आईपीओ को मिले इस बड़े रिस्पॉन्स ने शेयर बाजार में इसकी चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, ज्यादा आवेदन मिलना अपने आप में लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं है।
Jio IPO: कब खुला था इश्यू और कितना था प्राइस बैंड?
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। कंपनी ने इसके लिए ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। एक लॉट में 12 शेयर रखे गए थे।
ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर कंपनी की योजना आईपीओ से करीब ₹30,213 करोड़ जुटाने की थी। यह पूरी तरह से नए शेयर जारी करने वाला इश्यू था। इस ऑफर में रिलायंस इंडस्ट्रीज या उसके मौजूदा शेयरधारकों की ओर से शेयर बेचने की योजना नहीं थी।
पहले दिन से ही निवेशकों की जोरदार दिलचस्पी
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को शुरुआत से ही मजबूत प्रतिक्रिया मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, इश्यू खुलने के शुरुआती घंटों में ही यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। पहले दिन करीब 30.5 लाख आवेदन आए, जबकि दूसरे दिन के अंत तक आवेदन संख्या 75 लाख से आगे निकल गई।
तीसरे दिन आवेदन एक करोड़ के पार पहुंच गए। इस तरह जियो ने आवेदन संख्या के मामले में भारतीय बाजार के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक स्तर पर भी नया मुकाम हासिल किया।
QIB और बड़े निवेशकों की भी रही मजबूत भागीदारी
इस आईपीओ को सिर्फ खुदरा निवेशकों से ही नहीं, बल्कि बड़े संस्थागत निवेशकों से भी उल्लेखनीय दिलचस्पी मिली। जियो प्लेटफॉर्म्स ने 19 अक्टूबर को 212 एंकर निवेशकों को करीब ₹8,110 करोड़ के शेयर आवंटित किए थे। शेयरों का आवंटन ₹1,119 प्रति शेयर की दर पर हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, एंकर बुक के लिए कुल बोलियां ₹2.5 लाख करोड़ से ज्यादा थीं, जो उपलब्ध आवंटन से 30 गुना से अधिक थीं। इन निवेशकों में ब्लैकरॉक, फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स, सिंगापुर का जीआईसी और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे वैश्विक निवेशक शामिल थे।
IPO से मिलने वाली रकम का क्या करेगी कंपनी?
जियो प्लेटफॉर्म्स की योजना आईपीओ से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को कम करने में करने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस उद्देश्य के लिए ₹27,500 करोड़ तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
बाकी राशि का उपयोग पूंजीगत खर्च और कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। इससे कंपनी को अपने कारोबार और तकनीकी सेवाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
क्या ज्यादा आवेदन मिलने का मतलब लिस्टिंग पर मुनाफा है?
जियो आईपीओ को रिकॉर्ड आवेदन मिलना निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी दिखाता है, लेकिन इसे लिस्टिंग पर मुनाफे की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। आईपीओ की लिस्टिंग कीमत बाजार की परिस्थितियों, कंपनी के मूल्यांकन, निवेशकों की मांग और लिस्टिंग के दिन के कारोबारी माहौल पर निर्भर करती है।
ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) भी अनौपचारिक संकेतक है। इसे निश्चित लिस्टिंग कीमत या गारंटीड रिटर्न नहीं समझना चाहिए। निवेशकों को कंपनी के वित्तीय आंकड़ों, आईपीओ दस्तावेजों, जोखिमों और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।
जियो IPO: एक नजर में अहम बातें
- कंपनी: जियो प्लेटफॉर्म्स
- आईपीओ खुलने की तारीख: 21 अक्टूबर 2026
- प्राइस बैंड: ₹1,065–₹1,119 प्रति शेयर
- लॉट साइज: 12 शेयर
- आईपीओ का आकार: करीब ₹30,213 करोड़
- आवेदन: रिपोर्ट के मुताबिक 1.2 करोड़ से ज्यादा
- पिछला आवेदन रिकॉर्ड: वारी एनर्जीज के करीब 97 लाख आवेदन
- एंकर निवेशक: 212
- एंकर निवेशकों को आवंटन: करीब ₹8,110 करोड़
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने आवेदन संख्या के मामले में नया रिकॉर्ड बनाकर भारतीय पूंजी बाजार की ओर निवेशकों का ध्यान खींचा है। इश्यू में खुदरा निवेशकों के साथ संस्थागत निवेशकों की भी मजबूत भागीदारी देखने को मिली। अब निवेशकों की नजर शेयर की लिस्टिंग और बाजार में उसके प्रदर्शन पर रहेगी। हालांकि, रिकॉर्ड आवेदन को भविष्य के रिटर्न की गारंटी मानने के बजाय निवेश संबंधी सभी जोखिमों का आकलन करना जरूरी है।