MP में मछली पालन को मिलेगा उद्योग का दर्जा, ₹40 हजार करोड़ के निवेश से रोजगार की उम्मीद

भोपाल में CM मोहन यादव ने मत्स्य पालन को फूड प्रोसेसिंग और MSME से जोड़ने का ऐलान किया। MP में निवेश, निर्यात और रोजगार बढ़ाने की तैयारी।

भोपाल।

मध्य प्रदेश में मछली पालन को पारंपरिक व्यवसाय से आगे बढ़ाकर बड़े औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

यह घोषणा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने शुक्रवार को भोपाल में की।

वह स्थानीय कुशाभाउ कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय मत्स्य सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिशरीज सेक्टर को फूड प्रोसेसिंग और MSME से जोड़ा जाएगा।

इससे मत्स्य पालन से जुड़े कारोबार को उद्योगों की तरह छूट और प्रोत्साहन देने का रास्ता खुलेगा।

सरकार की योजना केवल मछली उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है।

मछली के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, परिवहन और निर्यात को भी एक साथ विकसित किया जाएगा।

इससे किसानों, मछुआरों, ग्रामीण युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।

चार बड़े जलाशयों में ₹7,430 करोड़ की परियोजना

सरकार इंदिरा सागर, बरगी, बाणसागर और बारना जलाशयों में आधुनिक तकनीक से मछली पालन को बढ़ावा देगी।

यहां केज कल्चर यानी पानी में जाल के पिंजरों के जरिए नियंत्रित मछली पालन की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

– परियोजना के तहत करीब 4 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

– हलाली और इंदिरा सागर जलाशयों को मॉडल मत्स्य क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है।

– मछली के बीज और चारे से लेकर प्रसंस्करण, शीत भंडारण और मार्केटिंग तक की सुविधाएं विकसित करने पर जोर है।

सरकार का उद्देश्य जलाशयों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ मछुआरों की आय और बाजार तक पहुंच में सुधार करना है।

तीन साल में मछली उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य

मध्य प्रदेश में करीब 4.50 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र मत्स्य पालन के लिए उपलब्ध है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में प्रदेश का मछली उत्पादन 4.95 लाख मीट्रिक टन से अधिक रहा।

अब सरकार अगले तीन वर्षों में उत्पादन दोगुना करने की दिशा में काम कर रही है।

एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के तहत जलाशयों में करीब एक लाख केज लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर बाजार व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।

₹40 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 3.5 लाख रोजगार का अनुमान

प्रदेश की एकीकृत मत्स्योद्योग नीति के तहत करीब ₹40 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी दी गई है।

इन प्रस्तावों के जरिए मत्स्य बीज, मछली के चारे, प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, परिवहन और

निर्यात से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

इन निवेश प्रस्तावों से लगभग 3.5 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार व स्वरोजगार के अवसर बनने का अनुमान है।

हालांकि, प्रस्तावित निवेश और रोजगार के लक्ष्य को वास्तविक

मछली के साथ मोती, मखाना और सब्जियों की खेती

सरकार मत्स्य पालन को दूसरे ग्रामीण व्यवसायों से जोड़ने की भी तैयारी कर रही है।

एकीकृत मॉडल में मछली पालन के साथ बतख और कुक्कुट पालन, मोती उत्पादन, कमल,

सिंघाड़ा और मखाने की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।

एक्वापोनिक्स और हाइड्रोपोनिक्स जैसी तकनीकों से मछली पालन के साथ सब्जियां, फूल और

औषधीय पौधे उगाने की संभावनाएं भी विकसित की जाएंगी।

इससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और ग्रामीण परिवारों को आय के अतिरिक्त साधन मिल सकते हैं।

(सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह व सीएम डॉ मोहन यादव ने दीप प्रज्जवलित कर किया।)

हलाली और इंदिरा सागर बनेंगे मॉडल क्लस्टर

केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को रिजर्वायर फिशरीज क्लस्टर कार्यक्रम में शामिल किया है।

इसके तहत रायसेन के हलाली जलाशय और खंडवा के इंदिरा सागर जलाशय को मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

इन क्लस्टरों में मछली के बीज और चारे की उपलब्धता से लेकर उत्पादन, निकासी, प्रसंस्करण,

शीत भंडारण, परिवहन और मार्केटिंग तक की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर है।

देश में मत्स्य उत्पादन और निर्यात की स्थिति

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने सम्मेलन में भारत के मत्स्य क्षेत्र की प्रगति का उल्लेख किया।

उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में वर्ष 2024-25 में मछली उत्पादन 197.75 लाख टन तक पहुंच गया था।

इसमें 151.60 लाख टन योगदान अंतर्देशीय मत्स्य पालन का था।

भारत के लिए मध्य प्रदेश जैसे गैर-तटीय राज्यों में मत्स्य निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं महत्वपूर्ण हैं।

इसके लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। गुणवत्ता, प्रसंस्करण,

कोल्ड चेन और निर्यात मानकों पर भी काम करना होगा।

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