टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस : कोटा स्टेशन पर पुलिस ने कुछ ऐसे बिछाया जाल,5 मिनट में धरे गए शूटर्स

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में मुंबई पुलिस के इनपुट पर कोटा पुलिस और RPF ने जयपुर-पुणे ट्रेन में कार्रवाई की। यात्री बनकर पहुंचे SI समेत टीम ने तीनों संदिग्धों को कुछ मिनटों में पकड़ लिया।

कोटा।
मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग के बाद तीनों संदिग्ध शूटर ट्रेन से भाग रहे थे।
उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि कोटा स्टेशन पर उनका इंतजार हो रहा है।
मुंबई क्राइम ब्रांच से मिली सूचना के बाद कोटा पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने ऐसा जाल बिछाया कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।
जयपुर-पुणे ट्रेन कोटा पहुंचने वाली थी। पुलिस को पता था कि तीनों संदिग्ध जनरल कोच में बैठे हैं।
उनकी तस्वीरें भी मिल चुकी थीं। अब चुनौती थी भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर बिना अफरा-तफरी के उन्हें पकड़ना।
इसके लिए कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में यात्रियों के बीच तैनात हो गए।

एक फोन कॉल से शुरू हुआ ऑपरेशन

 

RPF थाना प्रभारी चौप सिंह डावर के मुताबिक, 18 अक्टूबर को सुबह करीब 9:30 बजे वे प्लेटफॉर्म नंबर 3-4 पर मौजूद थे।
तभी मुंबई क्राइम ब्रांच के एक IPS अधिकारी का फोन आया।
सूचना थी कि टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के आरोपी जयपुर-पुणे ट्रेन के जनरल कोच में सफर कर रहे हैं।
इससे पहले सुबह करीब 9:15 बजे कोटा पुलिस को भी इनपुट मिल चुका था।
ट्रेन का कोटा पहुंचने का निर्धारित समय सुबह 10:15 बजे था।
यानी दोनों टीमों के पास तैयारी के लिए लगभग एक घंटे का समय था।
RPF ने अपने जवानों को अलर्ट किया। कुछ को सिविल ड्रेस में लगाया गया।
रेलवे के परिचालन विभाग को भी निर्देश दिया गया कि आरोपियों की गिरफ्तारी तक ट्रेन को आगे रवाना न किया जाए।

प्लेटफॉर्म पर ट्रेन रुकी, पुलिस ने पहचानना शुरू किया

ट्रेन उस दिन करीब पांच मिनट की देरी से कोटा पहुंची।
प्लेटफॉर्म नंबर एक पर दूसरी ट्रेन खड़ी होने के कारण जयपुर-पुणे ट्रेन को आउटर पर भी रोका गया।
इस दौरान पुलिसकर्मियों को अपनी पोजिशन लेने का मौका मिल गया।
मुंबई पुलिस ने संदिग्धों की CCTV तस्वीरें साझा की थीं।
इसी आधार पर कोटा पुलिस और RPF के जवान जनरल कोच पर नजर रख रहे थे।
ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची तो यात्रियों की आवाजाही शुरू हो गई।
इसी बीच RPF जवान सीताराम की नजर खिड़की के पास बैठे एक संदिग्ध पर पड़ी।
वह भुजिया लेने के लिए इधर-उधर देख रहा था। सीताराम ने तुरंत अपने  वरिष्ठ अधिकारियों को संकेत दिया।

बैग लेकर यात्री बना SI, संदिग्धों के पास जाकर बैठा

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि संदिग्धों को भनक न लगे। अगर उन्हें खतरे का एहसास हो जाता,
तो वे भागने या विरोध करने की कोशिश कर सकते थे।
ऐसे में SI प्रताप सिंह ने यात्री की तरह कोच में जाने का फैसला किया।
वे अपने साथ बैग लेकर संदिग्धों के पास वाली सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर मौजूद पुलिसकर्मी भी सतर्क हो चुके थे।
जवानों ने कोच के दोनों ओर से घेराबंदी कर ली।
अंदर दो संदिग्ध नीचे की सीट पर थे, जबकि तीसरा ऊपर की बर्थ पर लेटा हुआ था।
प्रताप सिंह ने सही मौके का इंतजार किया। फिर बाहर मौजूद टीम को संकेत दिया।

कुछ ही मिनट में तीनों संदिग्ध हिरासत में

संकेत मिलते ही छह-सात पुलिसकर्मी कोच में दाखिल हुए।
जवानों ने संदिग्धों के आसपास का हिस्सा घेर लिया।
इसके बाद तीनों को काबू में कर लिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों के नाम रेहान उर्फ सुक्का, ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन और फूल सिंह बताए गए हैं।
पुलिस ने उन्हें यात्रियों के बीच से बाहर निकाला।
पूरी कार्रवाई में कोच के भीतर गिरफ्तारी का मुख्य हिस्सा महज तीन से चार मिनट में पूरा हो गया।
इस दौरान यात्रियों को स्थिति समझने का ज्यादा मौका नहीं मिला।

स्टेशन के मुख्य रास्ते के बजाय पीछे से निकाला

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों को बाहर ले जाने के लिए भी अलग रास्ता चुना।
टीम प्लेटफॉर्म नंबर एक से दो की तरफ बढ़ी और फिर रंगपुर पुलिया की ओर जाने वाले रास्ते से स्टेशन के पीछे पहुंची।
सुबह करीब 10:30 बजे पुलिस टीम स्टेशन के पिछले हिस्से से बाहर निकली।
इसके बाद गाड़ियों की व्यवस्था की गई और आरोपियों को लेकर पुलिस अधिकारी एसपी कार्यालय पहुंचे।

पहले से बनाई गई थीं तीन टीमें

कोटा सिटी एसपी तेजस्विनी गौतम ने सूचना मिलते ही पुलिस की तीन टीमें गठित की थीं।
अलग-अलग टीमों को ट्रेन के आगे, बीच और पीछे के हिस्से में तैनात किया गया।
स्टेशन के बाहर भी पुलिसकर्मी मौजूद थे।
RPF ने भी अपने जवानों को अलग-अलग स्थानों पर लगाया था।
इस तरह ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचने से पहले ही संदिग्धों को घेरने की तैयारी पूरी कर ली गई थी।
18 अक्टूबर की शाम मुंबई के विले पार्ले इलाके में जुहू के पुष्पा नारसी पार्क के पास टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग हुई थी।

घटना के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अभिनेता से मिलने पहुंचे थे।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह रही कि पुलिस ने केवल ट्रेन में संदिग्धों की मौजूदगी की सूचना पर निर्भर रहने
के बजाय उनकी तस्वीरों, कोच की जानकारी और पहले से तय रणनीति के आधार पर कार्रवाई की।

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