‘अयोध्या से पर्चा भरिए, मैं भी उतरूंगा!’ योगी की अखिलेश को चुनौती, सपा प्रमुख ने ऐसे किया पलटवार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। बलरामपुर की जनसभा में योगी ने कहा कि अखिलेश नामांकन दाखिल करें, वह भी अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे। जवाब में अखिलेश ने PDA प्रहरी का जिक्र करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। योगी ने कहा कि अखिलेश अयोध्या से नामांकन दाखिल करें, वह भी वहां से चुनाव लड़कर अपनी किस्मत आजमाएंगे। इस पर अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि अयोध्या में भाजपा को हराने के लिए उनका एक युवा PDA प्रहरी ही काफी है।

योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव को क्या चुनौती दी?

शनिवार, 10 अक्टूबर को बलरामपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव के अयोध्या से चुनाव लड़ने संबंधी बयान का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अयोध्या से अपना नामांकन दाखिल करें और वह भी उसी सीट से चुनाव लड़ेंगे। योगी ने दोनों नेताओं के बीच सीधे मुकाबले की बात कही।

मुख्यमंत्री ने अयोध्या को आस्था और श्रद्धा का केंद्र बताते हुए कहा कि वह वहां चुनाव लड़ने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि विकास कार्यों की समीक्षा और प्रदेश की पहचान को बेहतर बनाने के लिए जाते हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर अयोध्या के विकास की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया।

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योगी ने सपा पर कानून-व्यवस्था, विकास और राजनीतिक परिवारवाद को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने पार्टी के PDA नारे पर तंज कसते हुए इसे ‘प्रदेश डुबाओ एलायंस’ बताया। यह मुख्यमंत्री की राजनीतिक टिप्पणी थी।

अखिलेश यादव का PDA वाले बयान से पलटवार

योगी आदित्यनाथ की चुनौती के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अयोध्या में कथित तौर पर चढ़ावे, चंदे और दान की चोरी करने वालों को हराने के लिए समाजवादी पार्टी का एक युवा ‘PDA प्रहरी’ ही काफी है।

अखिलेश ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह कथित अनियमितताओं से जुड़े लोगों को बचा रही है। उन्होंने कहा कि जनता इस बार अहंकार का जवाब देगी। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर भाजपा की हार का भी जिक्र किया।

PDA का अर्थ समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति में पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों से है। अखिलेश यादव इस नारे के जरिए इन समुदायों को साथ लाने की बात करते रहे हैं।

कैसे शुरू हुई अयोध्या सीट को लेकर बयानबाजी?

इस राजनीतिक विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने की सलाह दी थी। अखिलेश ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी द्वारा अयोध्या सीट से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद भाजपा वहां लगातार सर्वे करा रही है।

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सपा ने अयोध्या विधानसभा सीट से तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। अखिलेश ने भाजपा की चुनावी तैयारी पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को इसी सीट से चुनाव लड़ने की बात कही थी।

योगी ने अब इस टिप्पणी का जवाब देते हुए अखिलेश को भी अयोध्या से मैदान में उतरने का न्योता दिया है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच इस सीट पर वास्तविक मुकाबला होगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है।

2027 चुनाव से पहले अयोध्या बनी सियासी चर्चा का केंद्र

अयोध्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और चुनावी, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने भाजपा के लल्लू सिंह को हराया था। इस परिणाम के बाद अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा तेज हुई।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच अयोध्या को लेकर शुरू हुई बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। दोनों नेताओं ने विकास, सामाजिक प्रतिनिधित्व और भाजपा-सपा की राजनीतिक रणनीति को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा है।

फिलहाल योगी का अखिलेश को दिया गया निमंत्रण राजनीतिक चुनौती के रूप में सामने आया है। दोनों में से कौन अयोध्या सीट से चुनाव लड़ेगा, इसका अंतिम फैसला उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा और चुनावी रणनीति पर निर्भर करेगा।