रूस में एक प्लेग शोध केंद्र की महिला लैब तकनीशियन की मौत के बाद चिंता बढ़ गई है। साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में हुई इस मौत को लेकर अमेरिका भी हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका इस मामले को “बहुत गंभीरता से” देख रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस मुद्दे पर रूस के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी रूस में सामने आए इस मामले को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आशंका है कि घटना का संबंध न्यूमोनिक प्लेग से हो सकता है और अगर संक्रमण लैब से बाहर फैलता है तो यह तेजी से फैल सकता है। हालांकि, उन्होंने लोगों से घबराने की अपील नहीं की और कहा कि अमेरिका स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है।
क्या है पूरा मामला?
रूस के इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर इगोर कोब्ज़ेव के मुताबिक, महिला की मौत अज्ञात कारणों से हुए न्यूमोनिया के कारण हुई। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि अभी तक महिला के काम से जुड़े किसी सूक्ष्मजीव की उसके जैविक नमूनों में मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई है।
रूसी मीडिया में महिला का पहला नाम डारिया बताया गया है और उनकी उम्र करीब 20 साल बताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने हाल में मंगोलिया की सीमा से लगे बुर्यातिया क्षेत्र की यात्रा की थी। कुछ अपुष्ट रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि वह किसी पैथोजन से भरी टेस्ट ट्यूब टूटने के बाद बीमार हुई थीं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
करीब 200 लोगों की निगरानी
रूसी मीडिया के अनुसार, मृत महिला के संपर्क में आए करीब 200 लोगों को एहतियात के तौर पर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। वहीं रूस की स्वास्थ्य निगरानी संस्था रोस्पोत्रेबनादज़ोर ने एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट ऑफ साइबेरिया एंड द फार ईस्ट का निरीक्षण किया। संस्था के मुताबिक वहां किसी आपात स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और केवल आधिकारिक जानकारी पर ध्यान देने की अपील की है।
न्यूमोनिक प्लेग कितना खतरनाक?
विशेषज्ञों के मुताबिक यर्सिनिया पेस्टिस नामक जीवाणु प्लेग का कारण बनता है। न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों को प्रभावित करता है और व्यक्ति से व्यक्ति में फैल सकता है। इलाज न मिलने पर यह बेहद गंभीर और जानलेवा हो सकता है, लेकिन समय पर एंटीबायोटिक उपचार से इसका इलाज संभव है।
रीडिंग यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. साइमन क्लार्क ने कहा कि इस घटना को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन इसे कोविड जैसी स्थिति मानकर घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्लेग आज भी दुनिया के कुछ हिस्सों में मौजूद है और इसी वजह से इसके अध्ययन और निगरानी की जरूरत बनी हुई है।
फिलहाल रूस के अधिकारी संक्रमण के स्रोत और मौत की वास्तविक वजह की जांच कर रहे हैं। वहीं अमेरिका ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है।