अमेरिका ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार नीति को लेकर बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने भारत समेत लगभग 60 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है।
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत के दौरे पर है।
क्यों लगाया जा सकता है अतिरिक्त टैरिफ?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार, यह प्रस्ताव सेक्शन 301 जांच रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कई देशों में उत्पादों के निर्माण के दौरान जबरन मजदूरी (Forced Labour) को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। इसी आधार पर अमेरिका ने इन देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की सिफारिश की है।
USTR का क्या कहना है?
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जिन देशों से बड़े पैमाने पर आयात होता है, उनके उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला में श्रम मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। प्रस्तावित शुल्क का उद्देश्य निष्पक्ष व्यापार और श्रमिक अधिकारों को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।
किन देशों पर पड़ेगा असर?
प्रस्तावित सूची में दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।
प्रमुख देश
- भारत
- चीन
- कनाडा
- यूनाइटेड किंगडम
- ऑस्ट्रेलिया
- ब्राज़ील
- बांग्लादेश
- पाकिस्तान
- इंडोनेशिया
- इज़राइल
- मेक्सिको
- रूस
- सऊदी अरब
- सिंगापुर
- हांगकांग
इन देशों से अमेरिका में निर्यात होने वाले विभिन्न उत्पाद अतिरिक्त शुल्क के दायरे में आ सकते हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच आया प्रस्ताव
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा जारी है। दोनों देश व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और शुल्क संबंधी विवादों को कम करने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत के कुछ निर्यात क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय और लागू होने वाली दरें अभी तय नहीं हुई हैं।
ट्रंप की टैरिफ नीति से कैसे जुड़ा है मामला?
विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की व्यापक व्यापार नीति का हिस्सा माना जा सकता है।
ट्रंप प्रशासन पहले भी “रेसिप्रोकल टैरिफ” यानी समान शुल्क नीति की वकालत कर चुका है। इस नीति के तहत अमेरिका उन देशों पर समान या अधिक शुल्क लगाने की बात करता है जो अमेरिकी उत्पादों पर उच्च आयात शुल्क लगाते हैं।
क्या है रेसिप्रोकल टैरिफ?
- यदि कोई देश अमेरिकी सामान पर अधिक शुल्क लगाता है।
- तो अमेरिका भी उस देश के उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगा सकता है।
- इसका उद्देश्य व्यापार संतुलन स्थापित करना बताया जाता है।
वैश्विक व्यापार पर क्या होगा असर?
यदि प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ लागू होते हैं, तो इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, निर्यातकों और आयातकों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कई देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, वहीं कुछ उद्योगों को वैकल्पिक बाजार तलाशने पड़ सकते हैं।
मुख्य बातें
- अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव दिया।
- प्रस्तावित शुल्क 10% से 12.5% तक हो सकता है।
- जबरन मजदूरी से जुड़े मुद्दों को प्रमुख कारण बताया गया।
- भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच आया यह प्रस्ताव।
- चीन, ब्रिटेन, कनाडा और अन्य प्रमुख देश भी सूची में शामिल।
















