नई दिल्ली: संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाने वाला जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत इस साल 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। इस तीन दिवसीय व्रत की शुरुआत 2 अक्टूबर को नहाय-खाय से हो रही है। इसके बाद 3 अक्टूबर को माताएं निर्जला उपवास रखेंगी और 4 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद पारण किया जाएगा।
जितिया व्रत 2026 कब है?
इस साल जितिया व्रत शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रखा जाता है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह करीब 7:59 बजे शुरू होकर 4 अक्टूबर की सुबह तक रहेगी।
जितिया व्रत को लेकर 3 या 4 अक्टूबर की तारीख को लेकर भ्रम हो सकता है, लेकिन मुख्य निर्जला व्रत 3 अक्टूबर को ही रखा जाएगा। 4 अक्टूबर को पारण होगा।
2 अक्टूबर को नहाय-खाय
जितिया व्रत की शुरुआत 2 अक्टूबर, शुक्रवार को नहाय-खाय से होगी। इस दिन व्रती महिलाएं स्नान करके घर और पूजा स्थान की सफाई करती हैं। इसके बाद परंपरा के अनुसार सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है और अगले दिन के निर्जला व्रत की तैयारी की जाती है।
नहाय-खाय में क्या खाना है, इसकी परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्थानीय परंपराओं के अनुसार भोजन किया जाता है।
3 अक्टूबर को निर्जला जितिया व्रत
3 अक्टूबर को मुख्य जिवित्पुत्रिका व्रत रखा जाएगा। परंपरा के अनुसार यह निर्जला व्रत होता है, यानी व्रती पूरे दिन और रात भोजन के साथ पानी भी ग्रहण नहीं करती हैं। इस दौरान भगवान जीमूतवाहन की पूजा और जितिया व्रत कथा सुनने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार माताएं यह कठिन व्रत अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण की कामना से रखती हैं।
जितिया व्रत की पूजा विधि
जितिया व्रत की पूजा की सामान्य विधि इस प्रकार मानी जाती है:
- नहाय-खाय के दिन स्नान कर पूजा स्थान की सफाई करें।
- परंपरा के अनुसार नहाय-खाय का भोजन ग्रहण करें।
- व्रत वाले दिन स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थान पर भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें।
- जितिया व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
- परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री और प्रसाद अर्पित करें।
- पूरे व्रत के दौरान संतान के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करें।
- अगले दिन निर्धारित समय पर पारण करें।
स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा की सामग्री और विधि में अंतर हो सकता है। इसलिए परिवार की परंपरा या स्थानीय पंचांग का पालन करना उचित माना जाता है।
जितिया व्रत में किसकी पूजा होती है?
जितिया व्रत में राजा जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। जितिया व्रत कथा भी जीमूतवाहन से जुड़ी है। कई परंपराओं में चील और सियारिन का भी उल्लेख पूजा और कथा के दौरान किया जाता है।
जितिया व्रत 2026 पारण कब होगा?
जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026, रविवार को सूर्योदय के बाद किया जाएगा। दिल्ली के पंचांग के अनुसार 4 अक्टूबर को सूर्योदय करीब 6:15 बजे माना गया है। हालांकि पारण का सटीक समय शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर है।
ध्यान रखें कि पारण आधी रात को नहीं किया जाता। मुख्य व्रत 3 अक्टूबर को रखने के बाद अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण की परंपरा है।
जितिया व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार जितिया व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुखी जीवन की कामना के लिए रखती हैं। यह व्रत विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
जितिया का तीन दिवसीय क्रम नहाय-खाय, मुख्य निर्जला व्रत और पारण के रूप में पूरा होता है।
नोट: निर्जला उपवास स्वास्थ्य की दृष्टि से कठिन हो सकता है। गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों या किसी स्वास्थ्य समस्या वाले व्यक्ति को उपवास रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।