ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा अभिजीत दिपके की 3 और मांगें, SIR से लेकर चुनाव आयोग के कानून तक पर उठाए सवाल

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP नेता अभिजीत दिपके ने SIR पर रोक, पुरानी मतदाता सूची बहाल करने और चुनाव आयोग से जुड़े कानून में बदलाव समेत कई मांगें उठाई हैं। 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की गई है।

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपनी मांगें दोहराई हैं। दिपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कई बदलावों की मांग की है। CJP ने 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करने की बात कही है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को अपने अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया है। उनका कहना है कि यदि इस्तीफा नहीं होता है तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। 1 अक्टूबर को भी दिपके ने कहा कि प्रदर्शन जारी रहेगा और CJP इसे कई राज्यों तक ले जाएगी।

हालांकि, ये दावे और मांगें CJP की ओर से रखी गई हैं। इन्हें चुनाव आयोग की ओर से स्वीकार किए गए तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

पहली अतिरिक्त मांग: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच और कार्रवाई

दिपके ने इस्तीफे के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और स्वतंत्र जांच की मांग भी रखी है। उनका आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में गंभीर सवाल उठे हैं।

CJP की इस मांग का संबंध चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर हाल में उठे विवादों से है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने फैसलों में किसी एक आयुक्त द्वारा एकतरफा निर्णय लिए जाने की बात से इनकार किया है और कहा है कि महत्वपूर्ण फैसले आयोग ने सामूहिक रूप से लिए हैं।

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दूसरी मांग: SIR पर रोक और पुरानी वोटर लिस्ट

CJP की दूसरी प्रमुख मांग Special Intensive Revision यानी SIR को रोकने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची को आधार बनाए रखने की है। दिपके ने आरोप लगाया है कि SIR की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए जाने से संबंधित आंकड़े CJP के दावे हैं। चुनाव आयोग ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े अपने निर्णयों को नियमों और प्रक्रिया के तहत लिया गया बताया है।

तीसरी मांग: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और कानून में बदलाव

CJP चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े कानूनी ढांचे में बदलाव की भी मांग कर रही है। दिपके के अनुसार चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए और इसमें सिविल सोसाइटी की भूमिका बढ़ाई जानी चाहिए।

CJP ने 2023 में बने चुनाव आयुक्तों से जुड़े कानून को वापस लेने और उसकी जगह ऐसा कानून लाने की मांग भी उठाई है, जिसमें आयोग की जवाबदेही और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अलग व्यवस्था हो।

2 अक्टूबर से आंदोलन की तैयारी

CJP ने 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से देशव्यापी प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है। मुंबई में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए शिवाजी पार्क में अनुमति नहीं मिलने के बाद दिपके ने ‘जेल भरो आंदोलन’ की चेतावनी दी थी।

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1 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक दिपके ने कहा कि आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा और मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कही।

क्या है पूरा विवाद?

पूरे मामले की पृष्ठभूमि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवाल हैं। कुछ रिपोर्टों में आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर मतभेद की बात सामने आई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

ऐसे में CJP की मांगें एक तरफ हैं, जबकि चुनाव आयोग की ओर से निर्णय प्रक्रिया को लेकर अलग स्पष्टीकरण सामने आया है। आगे 2 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध और उससे जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई इस विवाद को और महत्वपूर्ण बना सकती है।