लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने हाल ही में चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग उठाई है। दोनों नेताओं की मांग EVM के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने को लेकर है, हालांकि इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि दोनों दल व्यापक राजनीतिक गठबंधन पर सहमत हो गए हैं।
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 28 सितंबर को लखनऊ में पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान EVM को लेकर अपनी पार्टी का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि सपा सभी सीटें जीत भी जाए, तब भी वह EVM के बजाय बैलेट पेपर से मतदान की मांग करती रहेगी। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों का उदाहरण दिया।
अखिलेश यादव का कहना था कि उनकी पार्टी EVM के इस्तेमाल का विरोध करती है और बैलेट पेपर की व्यवस्था वापस लाने की मांग जारी रखेगी। उन्होंने EVM से जुड़ी अपनी आपत्तियों को चुनावी प्रक्रिया में भरोसे से भी जोड़ा।
मायावती ने भी की बैलेट पेपर की मांग
अखिलेश यादव के बयान से पहले मायावती ने भी EVM को लेकर अपनी मांग रखी थी। BSP प्रमुख ने चुनावों में EVM का इस्तेमाल रोकने और बैलेट पेपर व्यवस्था बहाल करने की मांग की। उनका कहना था कि मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट उसी उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज और गिना गया है, जिसे उन्होंने चुना है।
मायावती ने चुनाव आयोग की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने EVM और वोटों की गिनती को लेकर उठने वाले संदेहों को दूर करने की मांग भी की।
क्या अखिलेश-मायावती फिर साथ आ रहे हैं?
दोनों नेताओं का EVM के मुद्दे पर एक जैसा रुख सामने आने से राजनीतिक चर्चा जरूर तेज हुई है। हालांकि, EVM के मुद्दे पर समान मांग को दोनों दलों के बीच चुनावी गठबंधन या राजनीतिक एकता की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के बीच राजनीतिक संबंध पहले भी बदलते रहे हैं। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों की चुनावी रणनीति, सीटों को लेकर रुख और संभावित गठबंधन पर अलग से राजनीतिक घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल उपलब्ध बयानों में दोनों नेताओं की साझा बात मुख्य रूप से EVM के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग है।
EVM को लेकर क्या है मौजूदा व्यवस्था?
उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच EVM और VVPAT से जुड़े तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रशिक्षण भी चल रहे हैं। सितंबर 2026 में वाराणसी में 21 जिलों के अधिकारियों को EVM और VVPAT की फर्स्ट लेवल चेकिंग समेत चुनावी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
इससे स्पष्ट है कि एक तरफ विपक्षी नेताओं की ओर से बैलेट पेपर की मांग उठाई जा रही है, वहीं चुनावी मशीनरी मौजूदा EVM-VVPAT व्यवस्था के तहत तैयारियां आगे बढ़ा रही है।
भाजपा पर क्या है अखिलेश का रुख?
अखिलेश यादव ने EVM पर सवाल उठाने के साथ ही भाजपा के खिलाफ अपनी राजनीतिक रणनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सपा ने आगामी चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की है। ये टिप्पणियां उनके पार्टी कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आईं।
वहीं, EVM को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच लंबे समय से राजनीतिक बहस होती रही है। विपक्षी नेता समय-समय पर EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि चुनावी प्रक्रिया में EVM के साथ VVPAT व्यवस्था भी इस्तेमाल की जाती है। मायावती ने भी अपने बयान में VVPAT का उल्लेख किया।
यूपी चुनाव से पहले बढ़ेगा EVM का मुद्दा?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले EVM और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। अखिलेश यादव और मायावती के ताजा बयानों ने इस बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
हालांकि, चुनाव में मतदान की व्यवस्था से संबंधित अंतिम आधिकारिक प्रक्रिया और नियम निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित किए जाएंगे। फिलहाल राजनीतिक स्तर पर दोनों नेताओं ने बैलेट पेपर की वापसी की मांग स्पष्ट रूप से रखी है।