रूस के खिलाफ रोबोट उतारने की तैयारी में यूक्रेन, युद्ध में बदल जाएगा लड़ाई का तरीका?

Ukraine Robot Army: रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। जानें ‘Army of Robots’ प्रोजेक्ट क्या है और कैसे काम करेगा।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में अब एक नया मोड़ सामने आया है। यूक्रेन ने युद्ध के मैदान में इंसानी सैनिकों की जगह या उनके साथ रोबोटिक सिस्टम के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में ‘Army of Robots’ पहल शुरू करने की घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट का ऐलान यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव ने किया है। उनका कहना है कि रोबोटों का इस्तेमाल ऐसे खतरनाक मिशनों में किया जा सकता है, जिनमें सैनिकों की जान जोखिम में पड़ती है।

यह पहल ऐसे समय सामने आई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन और दूसरे मानवरहित सिस्टम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। यूक्रेन पहले ही ड्रोन तकनीक को युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है और अब ग्राउंड रोबोट तथा दूसरे रोबोटिक सिस्टम को भी सैन्य अभियानों में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

क्या है यूक्रेन का ‘Army of Robots’ प्रोजेक्ट?

‘Army of Robots’ को किसी एक कंपनी के तौर पर नहीं बल्कि एक व्यापक डिफेंस-टेक इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने की योजना बताई गई है। इसके तहत यूक्रेन डिफेंस-टेक कंपनियों में निवेश करेगा, नए तकनीकी प्रोजेक्ट शुरू करेगा, रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा देगा और सैन्य स्तर पर रोबोटिक सिस्टम का परीक्षण करेगा। सफल तकनीकों को युद्ध के मैदान में बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

फेडोरोव ने डिफेंस-टेक कंपनियों और रोबोटिक्स इंजीनियरों से इस पहल में शामिल होने की अपील भी की है। इसका उद्देश्य यूक्रेन की मौजूदा सैन्य तकनीक को और अधिक स्वचालित तथा मानवरहित बनाना है।

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सैनिकों की जगह कौन-कौन से काम करेंगे रोबोट?

यूक्रेन की योजना केवल लड़ाकू रोबोट बनाने तक सीमित नहीं बताई गई है। रोबोटों से कई ऐसे काम लेने की योजना है जिनमें सैनिकों को सीधे जोखिम उठाना पड़ता है।

इनमें शामिल हैं:

  • घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना
  • युद्ध क्षेत्र में गोला-बारूद पहुंचाना
  • माइनिंग और डिमाइनिंग जैसे काम
  • दुश्मन की स्थिति की निगरानी और टोही
  • सैन्य ठिकानों की सुरक्षा
  • खतरनाक इलाकों में मिशन करना
  • जरूरत पड़ने पर लक्ष्यों के खिलाफ कार्रवाई करना

फेडोरोव के मुताबिक इस पहल का घोषित उद्देश्य सैनिकों की जान बचाना और सबसे खतरनाक मिशनों में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाना है।

ह्यूमनॉइड रोबोट भी योजना का हिस्सा

इस प्रोजेक्ट का एक अहम पहलू ह्यूमनॉइड रोबोट हैं। यूक्रेनी रिपोर्ट के मुताबिक फेडोरोव ने ऐसे रोबोट विकसित करने की बात कही है जो मोर्चे पर कुछ सामान्य और दोहराए जाने वाले काम कर सकें।

इन कामों में मशीनगन को फिर से लोड करना, बैटरी बदलना या सेंसर लगाना जैसे कार्य शामिल बताए गए हैं। यानी भविष्य में रोबोट सिर्फ दूर से नियंत्रित वाहन नहीं होंगे, बल्कि इंसानों द्वारा किए जाने वाले कुछ सीमित शारीरिक काम भी कर सकते हैं।

यूक्रेन पहले से कर रहा है रोबोट का इस्तेमाल

यह पहली बार नहीं है जब यूक्रेन युद्ध में रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। हाल के महीनों में यूक्रेनी सैन्य इकाइयों ने ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम और ड्रोन के संयोजन का इस्तेमाल किया है।

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रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेन के एक सैन्य अभियान में भारी ड्रोन के जरिए ग्राउंड रोबोट को रूसी मोर्चे के पीछे पहुंचाने की रणनीति भी अपनाई गई। इन रोबोटों का इस्तेमाल टोही, हमला, रसद और सैनिकों के आगे बढ़ने के रास्ते को सुरक्षित करने जैसे कार्यों में किया गया।

इससे पता चलता है कि रोबोटिक युद्ध सिर्फ भविष्य की योजना नहीं रह गया है, बल्कि यूक्रेन के युद्ध अभियानों में कुछ मानवरहित ग्राउंड सिस्टम पहले से प्रयोग में हैं।

ड्रोन के बाद अब रोबोट पर फोकस

यूक्रेन ने 2022 में ‘Army of Drones’ कार्यक्रम शुरू किया था। रूस के साथ युद्ध के दौरान ड्रोन यूक्रेनी सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।

अब ‘Army of Robots’ को उसी तकनीकी विकास की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अंतर यह है कि ड्रोन मुख्य रूप से हवा में काम करते हैं, जबकि ग्राउंड रोबोट जमीन पर रसद, टोही, माइन हटाने और दूसरे खतरनाक कार्यों को अंजाम दे सकते हैं।

क्या रूस के खिलाफ पूरी तरह रोबोट लड़ेंगे?

फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा कि यूक्रेन अपनी सेना की जगह पूरी तरह रोबोट उतारने जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक योजना का उद्देश्य इंसानी सैनिकों को पूरी तरह हटाना नहीं बल्कि खतरनाक और दोहराए जाने वाले कामों में मानवरहित प्रणालियों की भूमिका बढ़ाना है।

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युद्ध में रोबोटों के इस्तेमाल की अपनी सीमाएं भी हैं। उन्हें नियंत्रित करने के लिए संचार नेटवर्क, ऊर्जा, सेंसर और तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होती है। इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान इन प्रणालियों के संचालन में भी चुनौतियां आ सकती हैं।

रूस भी बढ़ा रहा है रोबोटिक क्षमता

यूक्रेन के साथ-साथ रूस भी युद्ध में ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम की क्षमता बढ़ा रहा है। दोनों पक्षों के बीच चल रहे संघर्ष ने मानवरहित तकनीक को आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।

इसी वजह से यूक्रेन का ‘Army of Robots’ प्रोजेक्ट सिर्फ एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि युद्ध के बदलते स्वरूप के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।

युद्ध के मैदान में क्या बदल सकता है?

अगर यूक्रेन बड़ी संख्या में भरोसेमंद रोबोटिक सिस्टम विकसित करने में सफल रहता है तो युद्ध के मैदान पर कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सैनिकों को सीधे खतरनाक इलाकों में भेजने की जरूरत कुछ अभियानों में कम हो सकती है। रसद और घायल सैनिकों को निकालने जैसे कामों में भी रोबोट उपयोगी साबित हो सकते हैं।

हालांकि, इन तकनीकों की वास्तविक क्षमता और बड़े पैमाने पर तैनाती का असर अभी भविष्य की बात है। फिलहाल यूक्रेन का फोकस तकनीक विकसित करने, उसका सैन्य परीक्षण करने और जो सिस्टम प्रभावी साबित हों उन्हें आगे बढ़ाने पर है।