चुनाव आयोग:ज्ञानेश कुमार को यूपी के Gen-Z से करनी थी बात,फिलहाल दौरा टाला

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मेरठ और वाराणसी का प्रस्तावित यूपी दौरा स्थगित हो गया है। मेरठ में 25 सितंबर और वाराणसी में 28 सितंबर को Gen-Z और युवाओं से संवाद का कार्यक्रम होना था। यह दौरा ऐसे समय टला है जब SIR और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर चर्चा जारी है।

नई दिल्ली।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश दौरा स्थगित हो गया है।

उन्हें मेरठ और वाराणसी में युवाओं से संवाद करना था।

दोनों कार्यक्रम फिलहाल आगे बढ़ा दिए गए हैं।

खास बात यह है कि दौरा ऐसे समय टला है,

जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बहस तेज है।

हालांकि, आयोग ने दौरा स्थगित करने की वजह सार्वजनिक नहीं की है।

मेरठ में 25 सितंबर को होना था कार्यक्रम

ज्ञानेश कुमार का 25 सितंबर को मेरठ पहुंचने का कार्यक्रम था।

यहां ELC 2.0 और ECINET का क्षेत्रीय सम्मेलन प्रस्तावित था।

इसके साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद होना था।

इसका मकसद युवाओं को चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सेवाओं की जानकारी देना था।

ECI ने अगस्त में लखनऊ में भी इसी तरह का कार्यक्रम किया था।

इसके बाद मेरठ और वाराणसी में क्षेत्रीय सम्मेलन प्रस्तावित किए गए थे।

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28 सितंबर को वाराणसी में Gen-Z से मिलना था

मेरठ के बाद 28 सितंबर को वाराणसी में कार्यक्रम होना था।

यहां Gen-Z यानी युवा मतदाताओं से संवाद प्रस्तावित था।

इस दौरान चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और डिजिटल मतदाता सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जानी थी।

फिलहाल दोनों कार्यक्रमों की नई तारीख सामने नहीं आई है।

पहले दो दिन का था कार्यक्रम

दिलचस्प बात यह है कि मेरठ और वाराणसी में पहले कार्यक्रम दो-दो दिन के प्रस्तावित थे।

बाद में इन्हें एक-एक दिन का कर दिया गया।

मेरठ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों और शिक्षकों पर फोकस था।

वहीं वाराणसी में युवा मतदाताओं से संवाद की योजना थी।

SIR विवाद के बीच क्यों अहम है दौरा स्थगित होना?

दौरा ऐसे समय स्थगित हुआ है, जब चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद को लेकर रिपोर्ट सामने आई हैं।

 रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं।

इनमें मतदाता सूची, नाम जोड़ने-हटाने, Form 6 और चुनावी डेटा से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर अलग रुख रखा है।

आयोग के अनुसार, ऐसे सुझाव और आपत्तियां निर्णय प्रक्रिया के दौरान सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

आयोग ने कहा है कि पिछले एक साल के सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं।

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क्या SIR विवाद की वजह से टला दौरा?

यही इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल है।

दौरा स्थगित होने और SIR विवाद के बीच समय का संयोग जरूर है।

लेकिन अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है,

जिसमें दोनों को सीधे जोड़ा गया हो।

इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि SIR विवाद के कारण ही कार्यक्रम स्थगित हुआ।

एक रिपोर्ट के अनुसार, यूपी दौरे की तैयारियां 21 सितंबर को ही रोक दी गई थीं।

इसके दो दिन बाद 23 सितंबर को आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट सामने आई।

युवाओं तक पहुंच पर था आयोग का फोकस

ELC 2.0 अभियान के जरिए चुनाव आयोग शैक्षणिक संस्थानों में चुनावी साक्षरता बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

लखनऊ में अगस्त में हुए कार्यक्रम में भी विद्यार्थियों और शिक्षकों से चुनाव प्रक्रिया को समझने और लोकतांत्रिक जागरूकता बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।

सितंबर में गोवा में हुए क्षेत्रीय सम्मेलन में भी CEC ज्ञानेश कुमार ने ELC को युवाओं में चुनावी समझ मजबूत करने वाला मंच बताया था।

अब नई तारीख का इंतजार

फिलहाल मेरठ और वाराणसी के कार्यक्रम स्थगित हैं।

नई तारीख घोषित नहीं हुई है।

दूसरी ओर, SIR और आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है।

ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग इन दोनों युवा-केंद्रित कार्यक्रमों को कब फिर से तय करता है।

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