महिलाओं को सिर्फ मेनोपॉज के बाद होता है हार्ट अटैक? जानिए क्या है इस दावे का सच

महिलाओं में हार्ट डिजीज केवल मेनोपॉज के बाद होती है, यह धारणा सही नहीं है। उम्र, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, वजन और लाइफस्टाइल जैसे कई कारक हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। मेनोपॉज के आसपास हार्मोनल बदलावों के कारण जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए महिलाओं को पहले से ही अपनी हार्ट हेल्थ पर ध्यान देना चाहिए।

नई दिल्ली: अक्सर यह माना जाता है कि महिलाओं को दिल की बीमारी का खतरा मुख्य रूप से मेनोपॉज के बाद ही बढ़ता है। लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। महिलाओं में हृदय रोग का जोखिम मेनोपॉज से पहले भी मौजूद हो सकता है और उम्र, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, वजन, तनाव और शारीरिक गतिविधि जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभाते हैं। Jagran की रिपोर्ट में भी विशेषज्ञ ने कम उम्र में महिलाओं में हार्ट डिजीज के मामलों पर सावधानी बरतने की बात कही है।

मेनोपॉज के बाद क्यों बढ़ सकता है हार्ट डिजीज का खतरा?

मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होता है। American Heart Association के अनुसार, मेनोपॉज के आसपास महिलाओं में हृदय रोग के जोखिम में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इस दौरान शरीर की संरचना, कोलेस्ट्रॉल और रक्त वाहिकाओं से जुड़े स्वास्थ्य में बदलाव भी हो सकते हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मेनोपॉज अपने आप हृदय रोग का कारण बनता है। AHA के अनुसार, इस समय कई हृदय रोग संबंधी जोखिम कारक सामने आ सकते हैं और उनका समय रहते प्रबंधन महत्वपूर्ण है।

30-40 की उम्र में भी क्यों जरूरी है सावधानी?

Jagran की रिपोर्ट में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अपर्णा जसवाल ने बताया कि सीढ़ियां चढ़ते समय असामान्य रूप से सांस फूलना, चक्कर आना या घबराहट जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों के पीछे कई कारण हो सकते हैं, इसलिए लगातार या असामान्य लक्षण होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

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कम उम्र में महिलाओं के लिए भी ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और वजन जैसे स्वास्थ्य संकेतकों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।

मेनोपॉज के दौरान शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

मेनोपॉज के संक्रमण के दौरान हार्मोनल बदलाव के साथ शरीर में कई परिवर्तन हो सकते हैं। AHA के अनुसार, इस अवधि में पेट के आसपास फैट बढ़ना, कोलेस्ट्रॉल में बदलाव और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं।

मेटाबॉलिक सिंड्रोम में हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ ब्लड शुगर, पेट की चर्बी, हाई ट्राइग्लिसराइड और कम HDL जैसे कारक शामिल हो सकते हैं। इन जोखिम कारकों का समय पर पता लगाना हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

लाइफस्टाइल का भी पड़ता है असर

महिलाओं में हृदय स्वास्थ्य केवल हार्मोन पर निर्भर नहीं करता। शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान, धूम्रपान, शराब का सेवन, अधिक वजन और लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव भी हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।

इसलिए केवल मेनोपॉज का इंतजार करना सही रणनीति नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित खानपान को जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है। AHA भी उम्र बढ़ने के साथ नियमित व्यायाम और हृदय के लिए अनुकूल आहार पर जोर देता है।

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग क्यों हो सकती है फायदेमंद?

मेनोपॉज के आसपास और उसके बाद मांसपेशियों तथा शरीर की संरचना में बदलाव हो सकते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को एक्सरसाइज रूटीन में शामिल किया जा सकता है।

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डंबल, रेजिस्टेंस बैंड या शरीर के वजन पर आधारित एक्सरसाइज को अपनी क्षमता के अनुसार किया जा सकता है। यदि किसी महिला को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या, लगातार दर्द या व्यायाम के दौरान असामान्य लक्षण होते हैं, तो एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

डाइट में किन चीजों पर दें ध्यान?

दिल को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, नट्स और बीज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। AHA भी फल-सब्जियों, फाइबर से भरपूर साबुत अनाज, मछली, नट्स और दालों को स्वस्थ आहार का हिस्सा बनाने की सलाह देता है।

वहीं अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, ट्रांस फैट और बहुत अधिक नमक या चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

महिलाओं में हृदय संबंधी समस्या हमेशा केवल तेज सीने के दर्द के रूप में सामने आए, यह जरूरी नहीं है। असामान्य सांस फूलना, अत्यधिक थकान, चक्कर या अन्य नए और गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अगर लक्षण अचानक और गंभीर हों या सीने में दबाव/दर्द, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी जैसी स्थिति हो तो तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

मेनोपॉज से पहले ही क्यों शुरू करें हार्ट हेल्थ की तैयारी?

American Heart Association के अनुसार, मेनोपॉज से पहले का संक्रमण काल भी महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण समय है। इसलिए हृदय रोग से बचाव की रणनीति केवल मेनोपॉज के बाद शुरू करने के बजाय मिडलाइफ से ही स्वास्थ्य जोखिमों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।

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महिलाओं में हार्ट डिजीज को केवल मेनोपॉज के बाद होने वाली समस्या मानना सही नहीं है। हृदय रोग का जोखिम उम्र, जीवनशैली, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, वजन और अन्य स्वास्थ्य कारकों से जुड़ा हो सकता है। मेनोपॉज के आसपास हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलावों के कारण जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए महिलाओं को मेनोपॉज से पहले ही अपनी हार्ट हेल्थ पर ध्यान देना चाहिए।

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी व्यक्तिगत लक्षण या उपचार के लिए डॉक्टर से सलाह लें।