नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने आगामी उपचुनावों के लिए दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है और विवाद पर अंतिम निर्णय होने तक लागू रहेगी।
दोनों गुटों को देना होगा नाम और चुनाव चिह्न का विकल्प
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से कहा है कि वे अपने लिए तीन-तीन संभावित पार्टी नाम और तीन-तीन ऐसे चुनाव चिह्नों के विकल्प दें, जो आयोग की मुक्त चुनाव चिह्नों की सूची में उपलब्ध हैं। इन विकल्पों के आधार पर आयोग प्रत्येक गुट के लिए एक नाम और एक चुनाव चिह्न आवंटित करेगा।
रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों गुटों को अपने प्रस्तावित नाम में मूल पार्टी यानी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से दृश्य या शब्दों के स्तर पर संबंध रखने की अनुमति हो सकती है। दोनों पक्षों को अपने विकल्प 18 सितंबर को सुबह 11 बजे तक देने हैं।
TMC के दो गुटों के बीच क्या है विवाद?
यह विवाद पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और नेतृत्व को लेकर सामने आया है। एक पक्ष का नेतृत्व ममता बनर्जी से जुड़ा है, जबकि दूसरे पक्ष का नेतृत्व रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट से जुड़ा है। दोनों पक्षों ने चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश किया है।
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और दावों पर सुनवाई की। आयोग के सामने यह सवाल भी है कि पार्टी की संगठनात्मक संरचना और अधिकृत नेतृत्व को लेकर दोनों पक्षों के दावों में से किसे स्वीकार किया जाए। अंतिम निर्णय से पहले आयोग ने अंतरिम व्यवस्था लागू की है।
उपचुनाव से पहले आया बड़ा फैसला
चुनाव आयोग का यह आदेश पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों से पहले आया है। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है। इन सीटों पर TMC के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों ने अपनी-अपनी दावेदारी पेश की है।
नंदीग्राम सीट 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद खाली हुई, जबकि रेजीनगर सीट भी अलग कारण से रिक्त हुई। इन उपचुनावों के लिए चुनाव प्रक्रिया आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है और 9 अक्टूबर को मतगणना होनी है।
अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ
चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश TMC के नाम और चुनाव चिह्न के विवाद पर अंतिम फैसला नहीं है। आयोग ने अंतरिम तौर पर दोनों गुटों को समान स्थिति में रखने और आगामी उपचुनावों में पार्टी की पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति से बचने के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न देने की व्यवस्था की है।
अंतिम निर्णय में यह तय किया जाना बाकी है कि TMC के संगठनात्मक नियंत्रण, पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर किस पक्ष का दावा स्वीकार किया जाएगा। तब तक दोनों गुट आगामी उपचुनावों में आयोग द्वारा आवंटित अलग-अलग पहचान के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं
चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने आयोग के फैसले की आलोचना की और इसे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के खिलाफ बताया। दूसरी ओर, बीजेपी की ओर से भी TMC के आंतरिक विवाद को लेकर प्रतिक्रिया दी गई है। ये राजनीतिक दलों के बयान हैं और आयोग के आदेश से अलग उनके अपने राजनीतिक आकलन हैं।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि आगामी उपचुनावों में TMC के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट एक ही पार्टी नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। दोनों पक्षों को नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने होंगे, जिसके बाद चुनाव आयोग उन्हें अलग-अलग पहचान आवंटित करेगा।