रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, अमेरिकी संसद में आगे बढ़ा बिल; जानें क्या है पूरा मामला

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति को देने वाला विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में आगे बढ़ा है। भारत भी संभावित दायरे में है, लेकिन फिलहाल भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है।

रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच एक बार फिर व्यापारिक तनाव बढ़ने की स्थिति बन रही है। अमेरिका के प्रतिनिधि सभा में ऐसा विधेयक आगे बढ़ा है, जो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता खोल सकता है। भारत और चीन समेत रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदार इस प्रस्ताव के दायरे में आ सकते हैं।

यह प्रस्ताव Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 से जुड़ा है। अमेरिकी सीनेट इसे अगस्त में 86-11 के वोट से पारित कर चुकी है और अब प्रतिनिधि सभा में इस पर आगे की प्रक्रिया चल रही है।

क्या भारत पर अभी लगा है 100% टैरिफ?

नहीं। फिलहाल भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है। मौजूदा घटनाक्रम एक ऐसे अमेरिकी विधेयक से जुड़ा है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी अतिरिक्त शुल्क लगाने की शक्ति दे सकता है।

16 सितंबर 2026 को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने विधेयक को अंतिम वोट की ओर आगे बढ़ाने के लिए 214-211 से एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक कदम को मंजूरी दी। अंतिम मंजूरी और उसके बाद कानून बनने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रस्तावित अधिकारों का वास्तविक इस्तेमाल संभव होगा।

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भारत का नाम क्यों आया?

इस विधेयक से जुड़े एक संशोधन में भारत समेत उन देशों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव आया है, जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया सहित कई देशों को संभावित अतिरिक्त टैरिफ के दायरे में रखा गया है।

सीनेट से पारित मूल संस्करण में देशों के नाम सीधे नहीं दिए गए थे और रूस से तेल-गैस खरीदने वाले बड़े आयातकों की व्यापक श्रेणी का उल्लेख था। हाउस में पेश संशोधन के बाद भारत का नाम सीधे चर्चा में आया।

अमेरिका ऐसा क्यों करना चाहता है?

अमेरिकी विधेयक का व्यापक उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। प्रस्तावित कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों, अधिकारियों और उन जहाजों के खिलाफ भी प्रतिबंधों का प्रावधान है, जिनका इस्तेमाल मौजूदा प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है।

अमेरिकी नीति के पीछे यह तर्क है कि रूस की ऊर्जा बिक्री से मिलने वाला राजस्व उसके युद्ध प्रयासों को आर्थिक आधार देता है। इसलिए रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर दबाव बढ़ाकर मॉस्को की आय को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

भारत रूस से कितना तेल खरीदता है?

भारत के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस देश के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। Global Trade Research Initiative के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्टों में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रूस से करीब 40.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया, जो भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग एक-तिहाई था।

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भारत का तर्क रहा है कि ऊर्जा खरीद के फैसले देश के राष्ट्रीय हित, उपलब्धता और वैश्विक कीमतों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। विदेश मंत्रालय ने भी रूस के साथ ऊर्जा सहयोग को भारत-रूस संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।

100% टैरिफ लगा तो क्या होगा?

यदि भविष्य में ऐसा अतिरिक्त टैरिफ लागू किया जाता है, तो अमेरिका को निर्यात करने वाली भारतीय कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की लागत बढ़ने से निर्यातकों पर दबाव आने की संभावना होगी।

इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी है। हालांकि, वास्तविक आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम कानून का स्वरूप क्या रहता है, टैरिफ किस उत्पादों पर लागू होता है और अमेरिकी प्रशासन किस तरह इसका इस्तेमाल करता है।

क्या भारत की अमेरिका को होने वाली पूरी एक्सपोर्ट पर ड्यूटी लगेगी?

अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगा। मौजूदा विधेयक राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति देने से जुड़ा है। अंतिम कानून में इसकी शर्तें, दायरा और लागू करने की प्रक्रिया क्या होगी, यह आगे की विधायी प्रक्रिया और संभावित संशोधनों से स्पष्ट होगा।

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इसके अलावा, अमेरिकी सांसदों के बीच भी इस प्रावधान को लेकर मतभेद हैं। कुछ सांसदों ने राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ अधिकार देने पर आपत्ति जताई है और कुछ संशोधनों में इस प्रावधान को सीमित या हटाने की मांग की गई है।

भारत-अमेरिका व्यापार पर बढ़ सकता है दबाव

रूस से तेल खरीद को लेकर प्रस्तावित अमेरिकी कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध भी महत्वपूर्ण दौर में हैं। यदि विधेयक कानून बनता है और भारत पर अतिरिक्त शुल्क लागू किया जाता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता पर इसका असर पड़ सकता है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक की आगे बढ़ती प्रक्रिया है। इसलिए भारत पर 100% टैरिफ लग गया है कहना अभी सही नहीं होगा। फिलहाल यह संभावित टैरिफ का विधायी प्रस्ताव है, जिसके आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।