भारत ही चीन को टक्कर दे सकता है: अमेरिकी अधिकारी जैकब हेलबर्ग ने भारतीय इंजीनियरिंग प्रतिभा की सराहना की

अमेरिकी अधिकारी जैकब हेलबर्ग ने कहा कि भारत ही एकमात्र देश है जो चीन को इंजीनियरिंग कार्यबल और प्रतिभा पूल की गहराई के मामले में टक्कर दे सकता है। उन्होंने नई दिल्ली की तकनीकी पrowess की प्रशंसा की और कहा कि यह देश तकनीकी प्रभुत्व की दौड़ में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।

अमेरिकी अधिकारी जैकब हेलबर्ग ने भारत की तकनीकी क्षमता और इंजीनियरिंग प्रतिभा की जमकर सराहना करते हुए कहा कि इंजीनियरिंग कार्यबल और प्रतिभा पूल की गहराई के मामले में भारत ही एकमात्र देश है जो चीन को चुनौती देने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और अमेरिका उसे एक रणनीतिक तकनीकी साझेदार के रूप में देखता है।

भारत का इंजीनियरिंग टैलेंट बना सबसे बड़ी ताकत

जैकब हेलबर्ग के अनुसार, भारत का विशाल इंजीनियरिंग कार्यबल, तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और विकसित होता तकनीकी इकोसिस्टम उसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण नवाचार केंद्रों में शामिल करता है। उन्होंने कहा कि भारत के पास उच्च गुणवत्ता वाले इंजीनियरों और डेवलपर्स का बड़ा आधार है, जो भविष्य की तकनीकों के विकास में अहम भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत की क्षमता लगातार बढ़ रही है।

अमेरिका साझा डेवलपर इकोसिस्टम बनाना चाहता है

हेलबर्ग ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ एक साझा डेवलपर इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है, जिससे दोनों देशों के इंजीनियर, स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियां मिलकर अगली पीढ़ी की तकनीकों पर काम कर सकें।

उन्होंने कहा कि इस साझेदारी से नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, नई तकनीकों का विकास तेज होगा और दोनों देशों के बीच निवेश एवं तकनीकी सहयोग भी मजबूत होगा।

AI और डीप टेक में भारत की बढ़ती भूमिका

अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। मजबूत प्रतिभा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम के कारण भारत भविष्य की वैश्विक तकनीकी दौड़ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे साझेदार देशों के साथ काम करना चाहता है, जिनके पास नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास की मजबूत क्षमता हो, और भारत इस दिशा में सबसे अहम भागीदारों में से एक है।

भारत-अमेरिका तकनीकी साझेदारी होगी और मजबूत

हेलबर्ग ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी न केवल तकनीकी नवाचार को गति देगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाते हैं, तो यह वैश्विक तकनीकी परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।