भोपाल(9826019364)।
भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई।
जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण मामला आगे बढ़ गया।
अब नई तारीख का इंतजार है।
हालांकि, सुनवाई टलने से मामला खत्म नहीं हुआ है।
रहवासी क्षेत्रों में चल रहे 62,500 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई का मुद्दा अब भी सुप्रीम कोर्ट के सामने है।
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8 हजार से ज्यादा प्रतिष्ठानों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के बाद नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई शुरू की थी।
करीब 15 दिन तक नोटिस बांटे गए।
इस दौरान सूचीबद्ध 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस दिए गए।
इसके बाद निगम ने तीन दिन तक कार्रवाई करते हुए 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया।
हालांकि, व्यापारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रोक दी गई।
पिछले करीब 15 दिनों से निगम की ओर से सीलिंग की कार्रवाई नहीं हुई है।
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निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर सवाल
नगर निगम अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश कर चुका है।
वहीं, याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है।
उनका आरोप है कि निगम ने कार्रवाई को लेकर पूरी तस्वीर कोर्ट के सामने नहीं रखी।
उनका दावा है कि जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, उनमें से कुछ दोबारा खुल गए।
दूसरी ओर, रहवासी भी निगम की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
उनका आरोप है कि कुछ मामलों में कार्रवाई समान रूप से नहीं की गई।
व्यापारियों के विरोध के बाद रुकी कार्रवाई
नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई शुरू होने के बाद व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया था।
व्यापारियों का कहना था कि अचानक बड़े पैमाने पर कार्रवाई से कारोबार प्रभावित होगा।
विरोध बढ़ने के बाद निगम ने कार्रवाई रोक दी।
अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर नजर है।
आखिर क्या है पूरा मामला?

भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अवैध निर्माण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है।
5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
साथ ही, इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत संबंधी आदेश भी निरस्त कर दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इसी के बाद नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई शुरू की थी।
अब मंगलवार की सुनवाई टलने के बाद अगली तारीख पर होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है।
रहवासियों की मुख्य आपत्तियां
रहवासी लंबे समय से आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध कर रहे हैं।
उनका कहना है कि इससे:
इलाकों में शोर और भीड़ बढ़ती है।
सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है।
पार्किंग की समस्या गंभीर होती है।
सार्वजनिक शांति प्रभावित होती है।
असामाजिक गतिविधियों की आशंका बढ़ती है।
स्कूलों के आसपास बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है।
बढ़ते ट्रैफिक से दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
फिलहाल सुनवाई टल गई है।
इसलिए 62,500 प्रतिष्ठानों के भविष्य पर फैसला अभी बाकी है।
अगली सुनवाई में कोर्ट का रुख इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकता है।
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