नई दिल्ली: भारत आज शनिवार से 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होने वाला यह शिखर सम्मेलन दो दिनों तक चलेगा। सम्मेलन में BRICS सदस्य देशों के साथ साझेदार और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के नेता भी हिस्सा लेंगे।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन का फोकस वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श के साथ BRICS के भीतर साझा प्राथमिकताओं और सहयोग को मजबूत करने पर रहेगा। भारत ने इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता के लिए ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ थीम तय की है।
भारत की चौथी BRICS अध्यक्षता
विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में तीन बार BRICS की अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार इस समूह की अध्यक्षता संभाली। वर्ष 2026 BRICS के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठन के गठन के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
भारत की अध्यक्षता के दौरान देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य BRICS की रणनीतिक साझेदारी को तीन प्रमुख क्षेत्रों—राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं जन-केंद्रित सहयोग—के आधार पर मजबूत करना रहा।
वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा
शिखर सम्मेलन के दौरान नेता आपसी हित से जुड़े कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही BRICS देशों के बीच व्यावहारिक और विकास-केंद्रित सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी मंथन होगा।
BRICS के एजेंडे में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक स्थिति, दूरसंचार, कृषि, श्रम एवं रोजगार, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे और व्यापार जैसे मुद्दे शामिल हैं। विश्व व्यापार संगठन से जुड़े विषयों पर भी BRICS के भीतर सहयोग बढ़ता रहा है।
BRICS में 11 सदस्य देश
वर्तमान में BRICS में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
इसके अलावा बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम BRICS के साझेदार देशों में शामिल हैं।
भारत की अध्यक्षता में सहयोग को नई दिशा
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान BRICS सहयोग को केवल बैठकों तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक और विकास-उन्मुख परिणामों पर जोर दिया है। बिजनेस-टू-बिजनेस और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने वाली पहलों के जरिए सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की कोशिश की गई है।
नई दिल्ली में होने वाला 18वां BRICS शिखर सम्मेलन इस प्रक्रिया का अहम पड़ाव माना जा रहा है। दो दिनों के दौरान होने वाली चर्चाओं से वैश्विक शासन, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण सामने आने की उम्मीद है।