नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में मानसून की तेज बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से जलभराव, बाढ़, भूस्खलन और सड़कें बंद होने की खबरें सामने आ रही हैं। कहीं नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं तो कहीं बारिश के पानी ने अस्पतालों और प्रमुख सड़कों को जलमग्न कर दिया है।
वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर घाटों और आसपास के कारोबार पर पड़ा है। बिहार में गंगा समेत कई नदियों के उफान के कारण बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में है। वहीं मध्य प्रदेश में मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है।
काशी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, 84 घाट डूबे
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से घाटों पर स्थिति बिगड़ गई है। बताया जा रहा है कि काशी के करीब 84 घाट पानी में डूब गए हैं। जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों के आसपास कारोबार करने वाले दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी हैं।
घाट क्षेत्र में स्थित करीब 5 हजार दुकानों के बंद होने से स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ा है। नदी का पानी सीढ़ियों और घाटों के बड़े हिस्से तक पहुंचने के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
BHU अस्पताल में घुटनों तक पानी
वाराणसी में भारी बारिश के बाद BHU अस्पताल परिसर में भी जलभराव की तस्वीरें सामने आई हैं। अस्पताल परिसर में पानी भर जाने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जलभराव इतना अधिक बताया गया कि कई स्थानों पर लोग मरीजों को कंधे पर बैठाकर पानी के बीच से ले जाते दिखाई दिए। अस्पताल जैसी जरूरी सेवाओं वाली जगह पर जलभराव ने प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी कर दी है।
बिहार में गंगा उफान पर, 50 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित
बिहार में भी गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। बेगूसराय में गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नदी के आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से 50 हजार से अधिक लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं।
भागलपुर जिले के नवगछिया क्षेत्र में स्थिति और गंभीर हो गई है। राघोपुर गांव के पास राघोपुर-नरकटिया तटबंध टूटने से आसपास के इलाकों में पानी फैल गया। इससे करीब 10 हजार लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
तटबंध टूटने के बाद स्थानीय लोगों के सामने आवागमन, सुरक्षित स्थान तक पहुंचने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बढ़ गई है।
MP के 21 जिलों में भारी बारिश की संभावना
मध्य प्रदेश में भी मानसून अब प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय होने की दिशा में बढ़ रहा है। पूर्वी मध्य प्रदेश के बाद अब उत्तरी, पश्चिमी और मध्य हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है।
मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान भोपाल, उज्जैन, सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग के अंतर्गत आने वाले 21 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका है।
प्रशासन और स्थानीय लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने तथा जरूरत पड़ने पर सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
पिथौरागढ़ में लैंडस्लाइड, कैलाश मानसरोवर मार्ग प्रभावित
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भी बारिश के कारण मुश्किलें बढ़ी हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर धारचूला-गुंजी के पास भूस्खलन होने से सड़क का एक हिस्सा बाधित हो गया।
सड़क बंद होने के कारण मार्ग के दोनों ओर यात्रियों और अन्य लोगों के फंसे होने की स्थिति सामने आई है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के बीच भूस्खलन की घटनाओं ने यात्रा और परिवहन व्यवस्था को प्रभावित किया है।
गुरुग्राम में जलभराव के बीच कैब की छत पर बैठकर काम करता दिखा युवक
हरियाणा के गुरुग्राम में भी भारी बारिश के बाद जलभराव ने सामान्य जीवन को प्रभावित किया। सोहना रोड पर पानी भरने के बाद एक युवक का वीडियो सामने आया, जिसमें वह कैब की छत पर बैठकर लैपटॉप पर काम करता हुआ दिखाई दे रहा है।
जलभराव के बीच काम करने का यह दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। गुरुग्राम की सड़कों पर पानी जमा होने से वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
IFFCO चौक पर धंसी सड़क, बना 20 फीट चौड़ा गड्ढा
गुरुग्राम के इफको चौक पर सड़क धंसने से बड़ा गड्ढा बन गया। बताया जा रहा है कि गड्ढे का आकार करीब 20 फीट तक पहुंच गया है। सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण यहां यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई।
बारिश के बाद सड़क धंसने की घटना ने शहर के ड्रेनेज और सड़क निर्माण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
हिमाचल में पहाड़ का बड़ा हिस्सा सड़क पर गिरा
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में बारिश के बीच भूस्खलन की बड़ी घटना सामने आई। कोडला-उरई-घरोड़ सड़क पर पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा गिरने से मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया।
मलबा सड़क पर आने के कारण वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा लगातार बना रहता है, ऐसे में लोगों को संवेदनशील मार्गों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
कई राज्यों में एक साथ बिगड़े हालात
देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का असर अलग-अलग रूपों में दिखाई दे रहा है। वाराणसी में गंगा का बढ़ता जलस्तर घाटों और कारोबार को प्रभावित कर रहा है, जबकि बिहार में नदी के उफान और तटबंध टूटने से बड़ी आबादी बाढ़ से जूझ रही है।
मध्य प्रदेश में भारी बारिश की संभावना के बीच प्रशासन की निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन ने पहाड़ी सड़कों को प्रभावित किया है। वहीं गुरुग्राम में जलभराव और सड़क धंसने की घटनाओं ने शहरी बुनियादी ढांचे की चुनौतियां सामने ला दी हैं।
मानसून के दौरान नदियों के बढ़ते जलस्तर और लगातार बारिश को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा।