नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बाजार में राहत पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार 800 टन प्याज लेकर पहली ‘कांदा एक्सप्रेस’ दिल्ली भेज रही है। राजधानी में इस प्याज की बिक्री 35 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी वाली दर पर की जाएगी। सरकार का उद्देश्य बढ़ती खुदरा कीमतों पर नियंत्रण करना और आम उपभोक्ताओं को राहत देना है।
उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली में सब्सिडी वाला प्याज नेफेड (NAFED), एनसीसीएफ (NCCF) और केंद्रीय भंडार की दुकानों के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा।
दिल्ली के अलावा चार शहरों के लिए भी भेजा जा रहा प्याज
सरकार ने केवल दिल्ली को ही राहत देने की तैयारी नहीं की है। रेलवे के जरिए प्याज की खेप चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी भी भेजी जा रही है। इन शहरों के लिए अलग-अलग समर्पित रेलवे रेक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन सभी जगहों पर भेजा जा रहा प्याज महाराष्ट्र के नासिक में रखे सरकारी बफर स्टॉक का हिस्सा है। सरकार बाजार में इस रणनीतिक भंडार को उतारकर आपूर्ति बढ़ाना चाहती है, ताकि कीमतों में अचानक हुई तेजी को नियंत्रित किया जा सके।
एक साल में 59 फीसदी महंगा हुआ प्याज
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्याज की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान काफी तेजी आई है। 24 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। एक साल पहले इसी अवधि में यह कीमत 27.37 रुपये प्रति किलो थी।
इस तरह खुदरा कीमत में सालाना आधार पर करीब 59 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
थोक बाजार में भी स्थिति अलग नहीं है। प्याज की औसत थोक कीमत 24 अगस्त को 35.58 रुपये प्रति किलो रही, जबकि पिछले साल यह 21.23 रुपये प्रति किलो थी। यानी थोक कीमत में करीब 68 फीसदी का इजाफा हुआ है।
दिल्ली में 55 रुपये किलो तक पहुंचा प्याज
देश के प्रमुख शहरों में भी प्याज महंगा हुआ है। सोमवार को दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमत 55 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 35 रुपये प्रति किलो थी।
वहीं चेन्नई में प्याज 60 रुपये किलो तक पहुंच गया। कोलकाता में भी इसकी कीमत 53 रुपये प्रति किलो रही। ऐसे में सरकारी बफर स्टॉक से सस्ता प्याज उपलब्ध कराने का कदम उपभोक्ताओं के लिए राहत देने वाला माना जा रहा है।
क्या है ‘कांदा एक्सप्रेस’?
प्याज की बड़ी मात्रा को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए सरकार ने ‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल शुरू की थी। इसका उद्देश्य सड़क परिवहन के मुकाबले रेलवे के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्याज की ढुलाई को अधिक कुशल बनाना है।
यह पहल वित्त वर्ष 2024-25 में शुरू हुई थी। इसके बाद इसका दायरा लगातार बढ़ाया गया। पहले साल करीब 12 हजार टन बफर स्टॉक प्याज लेकर 14 रेलवे रेक पांच शहरों तक भेजे गए थे।
एक साल में 86 रेलवे रेक से पहुंचा 88 हजार टन प्याज
वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने इस व्यवस्था को और बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया। इस दौरान 86 रेलवे रेक के जरिए करीब 88 हजार टन प्याज देश के 16 प्रमुख शहरों तक पहुंचाया गया।
अब 800 टन प्याज लेकर दिल्ली पहुंचने वाली पहली कांदा एक्सप्रेस इसी व्यवस्था के विस्तार का हिस्सा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राजधानी के बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
क्यों बनाया जाता है प्याज का बफर स्टॉक?
प्याज का बफर स्टॉक सरकार का एक रणनीतिक भंडार होता है। इसे मुख्य रूप से उस समय बाजार में उतारा जाता है, जब किसी कारण से प्याज की आपूर्ति कम होने लगे और कीमतों में अचानक तेजी आने लगे।
केंद्र सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष योजना के तहत प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में प्याज का भंडारण करती है। जरूरत पड़ने पर इसी स्टॉक को बाजार में उतारकर आपूर्ति बढ़ाई जाती है।
2026 में 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक
सरकार ने वर्ष 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक तैयार रखा है। मौजूदा कीमतों में तेजी को देखते हुए इसी भंडार का इस्तेमाल प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में प्याज की उपलब्धता पर्याप्त रहने की उम्मीद है।
उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान नहीं
प्याज की कीमतों को लेकर चिंता के बीच उत्पादन के आंकड़े भी सामने आए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में देश में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है।
पिछले वर्ष उत्पादन करीब 307.67 लाख टन रहा था। यानी दोनों वर्षों के उत्पादन में बहुत बड़ा अंतर नहीं है। इसके बावजूद मौसमी कारणों और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े बदलावों के चलते खुदरा बाजार में कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम?
प्याज की कीमतों में अगस्त और सितंबर के दौरान मौसमी तेजी अक्सर देखने को मिलती है। इस दौरान कई कारण बाजार को प्रभावित करते हैं।
त्योहारी मांग बढ़ने के अलावा मौसम संबंधी व्यवधान, मंडियों तक फसल पहुंचने में बदलाव, परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति तथा उपभोक्ता मांग में बदलाव कीमतों पर असर डाल सकते हैं।
ऐसे समय में सरकार का बफर स्टॉक बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने का काम करता है। अब दिल्ली के लिए 800 टन प्याज की कांदा एक्सप्रेस भेजने का फैसला भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
आम लोगों को कितनी राहत मिलेगी?
दिल्ली में सरकारी एजेंसियों के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर पर प्याज उपलब्ध कराने से उन उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिल सकती है, जिन्हें खुले बाजार में इससे काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
हालांकि, सरकारी प्याज की उपलब्धता और बिक्री केंद्रों पर मांग के आधार पर उपभोक्ताओं को इसे खरीदने के लिए निर्धारित वितरण व्यवस्था का पालन करना पड़ सकता है।
सरकार की कोशिश सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। रेलवे के जरिए अन्य बड़े शहरों में भी प्याज भेजकर उन बाजारों में आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी है, जहां कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।