कूनो में निर्वा मादा चीता की तलाश पर फिर सवाल: कॉलर खामोश, शिकार की आशंका

कूनो में मादा चीता निर्वा की निगरानी को लेकर सवाल उठे हैं। कॉलर की खराबी और आसपास शिकार के मामलों ने चिंता बढ़ाई है।

भोपाल(9826019364)।

कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता निर्वा को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं।

उसकी निगरानी और ट्रैकिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

वन्यजीव कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने निर्वा की निगरानी को लेकर चिंता जताई है।

उन्होंने मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

हालांकि, निर्वा के शिकार या मौत की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इसलिए इसे फिलहाल आशंका के तौर पर ही देखा जा रहा है।

कॉलर की खराबी बनी सबसे बड़ी चिंता

निर्वा की निगरानी में रेडियो कॉलर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कॉलर से लोकेशन मिलने में दिक्कत होने पर जंगल में उसकी गतिविधियां ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

यही मुद्दा अब फिर चर्चा में है।

सवाल यह है कि यदि किसी चीते की ट्रैकिंग व्यवस्था कमजोर हो जाए,

तो उसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

निर्वा इससे पहले भी रेडियो कॉलर की तकनीकी समस्या के कारण चर्चा में रह चुकी है।

2023 में वह 22 दिन तक ट्रेस नहीं हुई थी। बाद में उसे धोरट रेंज में सुरक्षित पाया गया था।

सोशल मीडिया पोस्ट के बाद मामला गरमाया

अजय दुबे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कूनो प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने फील्ड स्तर पर निगरानी और जवाबदेही को लेकर चिंता जताई।

उनका आरोप है कि वन्यजीवों की निगरानी प्राथमिकता होनी चाहिए।

साथ ही, उन्होंने अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की मांग की है।

मामले को लेकर मुख्यमंत्री, पीएमओ और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तक शिकायत किए जाने की बात भी सामने आई है।

कूनो से सटे इलाकों में शिकार ने बढ़ाई चिंता

निर्वा को लेकर आशंका ऐसे समय सामने आई है,

जब कूनो से जुड़े इलाकों में वन्यजीव शिकार का मामला सामने आया है।

जुलाई 2026 में आगरा में वन्यजीव तस्करी से जुड़े आरोपियों पर कार्रवाई हुई थी।

जांच के दौरान कूनो, श्योपुर और चंबल क्षेत्र से 10 तेंदुओं के शिकार का मामला सामने आया।

एसटीएसएफ ने आरोपियों से तेंदुओं की खाल और अवशेष बरामद किए थे।

इस घटनाक्रम ने कूनो और आसपास के जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

तेंदुओं के शिकार के मामले लेकिन निर्वा के शिकार की पुष्टि नहीं को निर्वा से जोड़कर आशंका जताई जा रही है।

मगर अभी ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है,

जिससे निर्वा के शिकार की पुष्टि हो।

इसलिए फिलहाल ‘निर्वा का शिकार हो गया’ कहना जल्दबाजी होगी।

जांच और आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

निर्वा पहले भी बनी थी चिंता की वजह

निर्वा पहले भी कूनो प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक, जुलाई-अगस्त 2023 में उसका रेडियो कॉलर काम करना बंद हो गया था।

उस समय 100 से ज्यादा वनकर्मियों, ड्रोन और अन्य संसाधनों से उसकी तलाश की गई थी।

22 दिन बाद निर्वा सुरक्षित मिली थी।

इसके बाद भी उसकी कहानी कूनो के चीता प्रोजेक्ट की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल रही।

कूनो की सुरक्षा व्यवस्था फिर सवालों में

कूनो अब भारत के चीता संरक्षण अभियान का प्रमुख केंद्र है।

2026 में यहां चीतों की संख्या और प्रजनन उपलब्धियों में भी वृद्धि हुई है।

ऐसे में किसी भी चीते की ट्रैकिंग को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है-निर्वा की वास्तविक स्थिति क्या है

और उसकी निगरानी कितनी प्रभावी है?

जब तक वन विभाग की आधिकारिक पुष्टि नहीं आती,

शिकार की आशंका को आशंका ही माना जाना चाहिए।

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