राहुल गांधी का PM मोदी पर हमला, बोले- लड़के गाली दें तो कुछ नहीं, लड़कियों ने दी तो ‘कल्चरल शॉक’ क्यों?

जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी की टिप्पणी पर सवाल उठाए। उन्होंने लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग सामाजिक मानदंडों का मुद्दा उठाते हुए ‘मनुस्मृति मानसिकता’ पर भी निशाना साधा।

पुणे: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक टिप्पणी को लेकर उन पर तीखा हमला बोला है। पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने लड़कियों के गाली देने को लेकर पीएम मोदी की कथित टिप्पणी का जिक्र करते हुए इसे पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग मानदंड से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि अगर लड़के गाली देते हैं तो इसे सामान्य माना जाता है, लेकिन लड़कियों के ऐसा करने पर ‘कल्चरल शॉक’ की बात क्यों की जाती है।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और समाज में उनके अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को किसी पुरुष के साथ उनके रिश्ते से परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान होनी चाहिए।

‘लड़के गाली दें तो कोई दिक्कत नहीं’

पुणे में छात्राओं के साथ बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने हाल में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान लड़के और लड़कियां दोनों आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से लड़कियों के गाली देने पर ‘कल्चरल शॉक’ की बात कही।

राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि लड़के गाली देते हैं तो क्या वह स्वीकार्य है, लेकिन लड़की के ऐसा करने पर इसे संस्कृति से जोड़कर देखा जाएगा? उन्होंने इसी अंतर को महिलाओं के प्रति समाज में मौजूद दोहरे रवैये का उदाहरण बताया।

महिलाओं की स्वतंत्रता पर भी बोले राहुल

कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता और सामाजिक बराबरी को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महिला की पहचान केवल बेटी, पत्नी या मां के रूप में नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि महिलाओं को अपनी पहचान खुद बनाने और अपने फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में मनुस्मृति का भी जिक्र किया और दावा किया कि भारतीय समाज में महिलाओं को नियंत्रित करने वाली सोच लंबे समय से मौजूद रही है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई ऐसी मानसिकता के खिलाफ है और महिलाओं को अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ आगे बढ़ने का अधिकार मिलना चाहिए।

‘महिला किसी की संपत्ति नहीं’

राहुल गांधी ने महिलाओं के अधिकारों पर जोर देते हुए कहा कि किसी महिला की पहचान उसके पिता, पति या बेटे से नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक, महिला अपने आप में एक स्वतंत्र व्यक्ति है और उसे अपनी जिंदगी के फैसले लेने का अधिकार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं को लेकर ऐसी सोच बदलने की जरूरत है, जिसमें उनके व्यवहार, पहनावे या बोलने के तरीके को पुरुषों की तुलना में अलग पैमाने पर परखा जाता है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन का क्या है संदर्भ?

राहुल गांधी का बयान हाल में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के संदर्भ में आया। प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों की भाषा और व्यवहार को लेकर राजनीतिक बहस हुई थी। इसी घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग सामाजिक मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।

BJP और कांग्रेस के बीच बढ़ी सियासी बयानबाजी

राहुल गांधी के इस बयान के बाद एक बार फिर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। राहुल गांधी लगातार महिला अधिकारों, सामाजिक समानता और कथित पितृसत्तात्मक सोच को अपने राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना रहे हैं।

वहीं, बीजेपी नेता राहुल गांधी के ऐसे बयानों को लेकर पहले भी सवाल उठाते रहे हैं। पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी उनकी आलोचना की और कार्यक्रम को दिखावे से जोड़कर सवाल उठाए।

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने केवल प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वतंत्रता और सामाजिक बराबरी जैसे मुद्दों को भी उठाया। कार्यक्रम में छात्राओं ने अपनी व्यक्तिगत और शैक्षणिक समस्याएं भी साझा कीं।

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर यह हमला ऐसे समय हुआ है जब छात्रों के प्रदर्शन, महिलाओं के अधिकार और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर देश में बहस जारी है। राहुल गांधी ने लड़के और लड़कियों के लिए अलग सामाजिक मानदंड होने का मुद्दा उठाते हुए इसे पितृसत्तात्मक सोच से जोड़ा। अब उनके इस बयान पर बीजेपी की प्रतिक्रिया राजनीतिक बहस को और गर्म कर सकती है।