भोपाल(9826019364)।
राजधानी में रिहायशी इलाकों में चल रहे कमर्शियल कारोबार को लेकर सरकार और प्रशासन की नीति सवालों के घेरे में है।
एक तरफ नगर निगम दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस थमा रहा है।
सीलिंग की चेतावनी दी जा रही है।
दूसरी तरफ उन्हीं रहवासी क्षेत्रों में दुकानों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री का काम जारी है।
यही विरोधाभास अब लोगों को हैरान कर रहा है।
सवाल यह है कि जिस इलाके में दुकान चलाना नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है,
वहां दुकान की रजिस्ट्री आखिर किस आधार पर हो रही है?
उपनगर संत हिरदाराम नगर में ही बीते करीब एक पखवाड़े के दौरान रहवासी इलाकों में स्थित एक दर्जन से अधिक दुकानों की रजिस्ट्री होने की जानकारी सामने आई है।
ऐसे में रहवासियों और कारोबारियों का कहना है कि सरकार को पहले अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए।
एक विभाग नोटिस दे रहा, दूसरा कर रहा पंजीयन
भोपाल नगर निगम ने बीते दिनों आवासीय क्षेत्रों में चल रहे कमर्शियल प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
निगम का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और जमीन उपयोग संबंधी नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पहले प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए।
इसके बाद कुछ जगहों पर सीलिंग और तालाबंदी की कार्रवाई भी हुई।
लेकिन दूसरी ओर, राज्य के पंजीयन विभाग में ऐसे क्षेत्रों की दुकानों और कमर्शियल संपत्तियों की रजिस्ट्री जारी रहने की बात सामने आई है।
इससे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
यदि किसी आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि अवैध है,
तो वहां दुकान के रूप में संपत्ति का पंजीयन कैसे हो रहा है?
नोटिस का डर, संपत्ति की कीमत पर भी असर
नगर निगम की कार्रवाई का असर सिर्फ दुकानदारों तक सीमित नहीं है।
संपत्ति मालिक भी इसकी चपेट में आ गए हैं।
कार्रवाई वाले इलाकों में संपत्ति के दाम गिरने की बात सामने आ रही है।
अरेरा कॉलोनी का एक उदाहरण इसकी तस्वीर दिखाता है।
बताया जाता है कि करीब एक माह पहले तक एक संपत्ति के लिए खरीदार 17 करोड़ रुपए तक देने को तैयार थे।
लेकिन सीलिंग कार्रवाई शुरू होने के बाद स्थिति बदल गई।
अब उसी संपत्ति के लिए 7 करोड़ रुपए की पेशकश भी मुश्किल बताई जा रही है।
हालांकि, संपत्ति की कीमत में गिरावट का यह उदाहरण बाजार की बातचीत और संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित है।
कीमतों में बदलाव का आधिकारिक सर्वे सामने नहीं आया है।
कारोबारियों की दलील—सालों से चल रहे हैं बाजार
व्यापारियों का कहना है कि भोपाल के कई रिहायशी इलाकों में दशकों से दुकानें और छोटे-बड़े प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं।
समय के साथ कई कॉलोनियां व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र बन गईं।
यहां संपत्तियां भी उसी आधार पर खरीदी और बेची गईं।
ऐसे में अचानक नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई ने कारोबारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
उनका सवाल है कि यदि नियमों का उल्लंघन वर्षों से हो रहा था, तो प्रशासन ने पहले इस पर स्पष्ट नीति क्यों नहीं बनाई?
व्यापारी सड़कों पर, मिक्स्ड लैंड यूज की मांग
कार्रवाई के खिलाफ 10 नंबर मार्केट, अरेरा कॉलोनी और अन्य क्षेत्रों के व्यापारी विरोध में उतर आए।
कई जगह प्रदर्शन हुए। कुछ कारोबारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।
ब्यूटी पार्लर और सैलून संचालकों ने भी अलग तरीके से विरोध दर्ज कराया।
व्यापारी संगठनों की मुख्य मांग है कि शहर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मिक्स्ड लैंड यूज पॉलिसी लागू की जाए।
उनका कहना है कि जिन इलाकों में वर्षों से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं,
उन्हें केवल कागजों में रिहायशी बताकर कार्रवाई करना व्यावहारिक समाधान नहीं है।
कार्रवाई रुकी, लेकिन संकट खत्म नहीं हुआ
व्यापारियों के बढ़ते विरोध के बाद सरकार ने एक चरण में सीलिंग कार्रवाई पर रोक लगाई।
साथ ही स्थायी समाधान के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया गया।
इससे कारोबारियों को अस्थायी राहत मिली।
लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। बाद के कानूनी घटनाक्रम के बाद कार्रवाई दोबारा शुरू होने की आशंका बनी हुई है।
यानी व्यापारी अब भी असमंजस में हैं।
उन्हें नहीं पता कि भविष्य में उनकी दुकान सुरक्षित रहेगी या फिर सीलिंग की कार्रवाई दोबारा शुरू होगी।
नीति पर अब सबसे बड़ा सवाल
भोपाल का यह विवाद अब सिर्फ नगर निगम की कार्रवाई नहीं रह गया है।
यह शहर की जमीन उपयोग नीति और अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच तालमेल का सवाल बन गया है।
एक ओर नोटिस दिए जा रहे हैं।
दूसरी ओर रजिस्ट्री हो रही है।
एक तरफ दुकान चलाने पर कार्रवाई का खतरा है।
दूसरी तरफ उसी तरह की संपत्ति की खरीद-बिक्री जारी है।
ऐसे में रहवासियों और व्यापारियों का सवाल सीधा है—
जब दुकान की रजिस्ट्री हो सकती है, तो उसी दुकान में कारोबार करने पर नोटिस क्यों?
जब तक इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता,
तब तक भोपाल में रिहायशी और कमर्शियल संपत्तियों का यह विवाद खत्म होता नहीं दिख रहा।
अब तक क्या-क्या हुआ?
● शुरुआत 429 नोटिस से
कार्रवाई के शुरुआती चरण में करीब 429 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए।
● नोटिस बढ़कर 1,018 तक पहुंचे
बाद में कार्रवाई का दायरा बढ़ा और करीब 1,018 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई।
● लगभग 1,800 नोटिस जारी
एक चरण में नगर निगम की ओर से करीब 1,800 नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई।
● करीब 24 प्रतिष्ठानों पर तालाबंदी
सीलिंग अभियान के शुरुआती दिन करीब दो दर्जन,
यानी लगभग 24 प्रतिष्ठानों को लॉक या बंद करने की कार्रवाई हुई।
● कई कारोबारियों ने खुद बंद की दुकानें
अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और अन्य इलाकों में कार्रवाई के डर से कई व्यापारियों ने प्रतिष्ठान स्वयं बंद कर दिए।
● करीब 100 प्रतिष्ठान बंद होने की चर्चा
कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में प्रतिष्ठान बंद हुए।
बाद में सरकारी रोक के बाद कई दुकानों को दोबारा खोला गया।
● 10 नंबर मार्केट से कई इलाकों तक विरोध
व्यापारियों ने प्रदर्शन किया।
10 नंबर मार्केट सहित कई क्षेत्रों में निगम की कार्रवाई का विरोध हुआ।
● ब्यूटी पार्लर और सैलून संचालक भी उतरे
कारोबारियों के अलग-अलग समूहों ने विरोध दर्ज कराया।
उनका कहना था कि अचानक कार्रवाई से रोजगार और निवेश दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
● सरकार ने कार्रवाई पर लगाई अस्थायी रोक
विरोध बढ़ने के बाद सरकार ने एक चरण में सीलिंग कार्रवाई रोक दी।
● स्थायी समाधान के लिए समिति
सरकार ने जमीन उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों के मुद्दे पर आगे की नीति तय करने के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया।
● अब भी बना हुआ है कानूनी पेच
बाद के अदालती घटनाक्रम के बाद कार्रवाई दोबारा शुरू होने की आशंका बनी हुई है।
इसलिए व्यापारी स्थायी समाधान और स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं।