राम माधव की BJP में वापसी, मोदी-शाह के लिए क्या मायने?

राम माधव की बीजेपी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर वापसी ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। जानिए उनकी वापसी का पीएम मोदी और अमित शाह की राजनीति पर क्या असर हो सकता है।

भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों को जगह दी गई है, जिनमें छह महिलाएं हैं। इस सूची में सबसे अधिक चर्चा पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव की वापसी को लेकर हो रही है।

राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वह 2014 में बीजेपी में राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर आए थे और उस दौरान पार्टी के विस्तार और रणनीतिक गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। हालांकि, 2020 में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया गया था। अब करीब छह साल बाद पार्टी संगठन में उनकी वापसी को राजनीतिक हलकों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

क्या राम माधव की वापसी बड़ा राजनीतिक संकेत है?

राम माधव की वापसी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी में उनकी भूमिका पहले की तरह प्रभावशाली होने जा रही है या यह महज संगठनात्मक जिम्मेदारी है।

वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी के मुताबिक, राम माधव और स्मृति ईरानी जैसे नेताओं की वापसी तथा अमित मालवीय की जिम्मेदारियों में बदलाव को देखते हुए नई टीम को पूरी तरह अमित शाह की पसंद वाली टीम कहना मुश्किल है।

हालांकि, बीजेपी की आंतरिक राजनीति को समझने वाले कुछ विश्लेषक राम माधव की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में वापसी को बहुत बड़ा बदलाव नहीं मानते। वरिष्ठ पत्रकार और लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय का तर्क है कि बीजेपी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद औपचारिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन व्यवहार में राष्ट्रीय महासचिव की भूमिका ज्यादा प्रभावशाली होती है।

उनके अनुसार, राम माधव को अगर दोबारा राष्ट्रीय महासचिव बनाया जाता तो इसे उनके राजनीतिक प्रभाव में बड़ी वापसी माना जा सकता था। केवल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने से ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

2014 में तेजी से बढ़ा था राम माधव का कद

राम माधव 2014 में बीजेपी में राष्ट्रीय महासचिव बनकर आए थे। उस समय अमित शाह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। राम माधव को पार्टी के विस्तार से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई थी।

उन्हें पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में गठबंधन की राजनीति को मजबूत करने की जिम्मेदारी मिली थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरुआती विदेश दौरों के दौरान भारतीय समुदाय से संपर्क बढ़ाने में भी उनकी भूमिका चर्चा में रही।

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन, लंदन के वेम्बली और सिडनी में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रमों के आयोजन में भी राम माधव की भूमिका बताई जाती है। इस दौर में उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दिया।

2020 में राष्ट्रीय महासचिव पद से हटे थे

सितंबर 2020 में बीजेपी ने राम माधव समेत कई नेताओं को राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया था। उस समय इसे पार्टी में उनके प्रभाव में कमी के तौर पर देखा गया।

हालांकि, आरएसएस से जुड़े विचारों और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं हुई। ऑर्गेनाइज़र के संपादक हितेश शंकर के मुताबिक, आरएसएस और बीजेपी के बीच नेताओं का आना-जाना संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है।

उनका कहना है कि राम माधव को बीजेपी में जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसे पूरा करने के बाद वह 2020 में आरएसएस में लौटे और इसके बाद भी थिंक टैंक तथा अन्य माध्यमों से संगठन से जुड़े काम करते रहे।

बीजेपी में सबसे ताकतवर पद कौन सा?

राम माधव की नई भूमिका को समझने के लिए बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे को समझना जरूरी है। पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के बाद राष्ट्रीय संगठन महासचिव का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

यह पद आमतौर पर आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक को दिया जाता है। अतीत में दीनदयाल उपाध्याय, सुंदर सिंह भंडारी, नरेंद्र मोदी, के.एन. गोविंदाचार्य, संजय जोशी और रामलाल जैसे नेता इस जिम्मेदारी पर रह चुके हैं। वर्तमान में यह जिम्मेदारी बीएल संतोष के पास है।

इसी वजह से राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर राम माधव को संगठन महासचिव बनाया जाता तो उनकी वापसी का राजनीतिक संदेश कहीं अधिक बड़ा होता।

सुनील बंसल की भूमिका भी महत्वपूर्ण

नई टीम में सुनील बंसल का राष्ट्रीय महासचिव बने रहना भी महत्वपूर्ण है। बंसल ने उत्तर प्रदेश में अमित शाह के साथ बेहद करीबी तरीके से काम किया था। 2013 में अमित शाह के यूपी प्रभारी बनने के बाद दोनों ने संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम किया और बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में शानदार प्रदर्शन किया।

बंसल ने बाद में दूसरे राज्यों में भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। इसलिए उनका राष्ट्रीय महासचिव पद पर बने रहना बीजेपी की संगठनात्मक रणनीति में निरंतरता का संकेत माना जा सकता है।

पीयूष गोयल को कोषाध्यक्ष बनाए जाने का क्या अर्थ?

नई टीम में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। बीजेपी के एक व्यक्ति-एक पद के सिद्धांत को देखते हुए इस नियुक्ति के बाद उनके केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने रहने को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।

हालांकि, अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी नेतृत्व को करना है। इसलिए केवल संगठनात्मक नियुक्ति के आधार पर मंत्रिमंडल में बदलाव की निश्चित भविष्यवाणी करना उचित नहीं होगा।

क्या मोदी-शाह की पकड़ कमजोर हुई?

राम माधव की वापसी को लेकर सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि क्या बीजेपी के संगठन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पकड़ में कोई बदलाव आया है।

विश्लेषकों की राय इस मामले में एक जैसी नहीं है। कुछ इसे पार्टी के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि केवल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद मिलने से बीजेपी की सत्ता संरचना में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं मिलता।

राम माधव की वास्तविक राजनीतिक भूमिका इस बात से तय होगी कि उन्हें आगे कौन-सी जिम्मेदारी दी जाती है और पार्टी किन राज्यों या विषयों में उनका इस्तेमाल करती है।

राम माधव की वापसी के मायने

  • राम माधव करीब छह साल बाद बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में लौटे हैं।
  • उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है।
  • 2014 में वह राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर बीजेपी में आए थे।
  • पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
  • प्रधानमंत्री मोदी के शुरुआती विदेशी कार्यक्रमों में भी उनकी भूमिका चर्चा में रही।
  • 2020 में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया गया था।
  • विश्लेषकों के मुताबिक राष्ट्रीय महासचिव की तुलना में उपाध्यक्ष पद की वास्तविक संगठनात्मक शक्ति सीमित हो सकती है।
  • उनकी आगे की जिम्मेदारी ही बताएगी कि यह वापसी कितनी प्रभावशाली है।

फिलहाल राम माधव की वापसी को बीजेपी की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम जरूर माना जा सकता है, लेकिन इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या अमित शाह के प्रभाव में कमी का सीधा संकेत मानना जल्दबाजी होगी। आने वाले समय में उन्हें मिलने वाली जिम्मेदारियां ही यह स्पष्ट करेंगी कि बीजेपी ने उन्हें संगठन में किस भूमिका के लिए वापस बुलाया है।