नोटिस से चक्काजाम तक: भोपाल में ‘ सीलबंदी ‘ के खिलाफ सड़कों पर उतरे व्यापारी

भोपाल में व्यावसायिक संस्थानों पर कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने चक्काजाम किया। वे नियमितीकरण, मिक्स्ड लैंड यूज और नया मास्टर प्लान लागू करने की मांग कर रहे हैं।

भोपाल।

नगर निगम की कार्रवाई अब व्यापारियों के विरोध का बड़ा मुद्दा बन गई है।

रहवासी क्षेत्रों में चल रहे संस्थानों पर कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर उतर आए।

मंगलवार को रोशनपुरा चौराहे पर व्यापारियों ने नारेबाजी करते हुए चक्काजाम किया।

व्यापारियों ने कार्रवाई रोकने और संस्थानों के नियमितीकरण की मांग उठाई।

हालांकि, नगर निगम ने नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जारी रखने के संकेत दिए हैं।

750 से ज्यादा संस्थानों पर कार्रवाई की तलवार

भोपाल के रहवासी क्षेत्रों में 750 से ज्यादा संस्थानों को अंतिम समय दिया जा रहा है।

तय अवधि के बाद गतिविधियां बंद नहीं करने पर सीलिंग की कार्रवाई होगी।

अरेरा कॉलोनी, बावड़िया कलां और रोहित नगर के 429 संस्थान भी शामिल हैं।

निगम अधिकारियों के अनुसार अंतिम सूचना पत्र जारी किए जा रहे हैं।

इसके बाद अतिक्रमण हटाने और सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।

अब तक 6,589 नोटिस, बढ़ी कारोबारियों की चिंता

रविवार तक नगर निगम 5,778 नोटिस जारी कर चुका था।

सोमवार को 811 नए नोटिस जारी किए गए।

इस तरह कुल नोटिसों की संख्या बढ़कर 6,589 पहुंच गई।

इसी कारण कई व्यापारी अब अपने कारोबार और रोजगार को लेकर चिंतित हैं।

व्यापारियों का कहना है कि एक साथ कार्रवाई से हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।

व्यापारियों ने उठाया रोजगार का सवाल

बैरागढ़ के व्यापारी अशोक उसरा सिंह ने कार्रवाई पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि कई रहवासी इलाके अब व्यावसायिक स्वरूप ले चुके हैं।

इन क्षेत्रों में वर्षों से दुकानें और अन्य संस्थान संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि कई प्रतिष्ठान दर्जनों परिवारों को रोजगार दे रहे हैं।

इसलिए अचानक सीलिंग से कर्मचारी भी बेरोजगार हो सकते हैं।

ब्यूटिशियन ने सड़क पर किया मेकअप

विरोध प्रदर्शन में कुछ व्यापारियों ने अलग अंदाज अपनाया।

एक ब्यूटिशियन ने सड़क पर मेकअप करके अपना विरोध दर्ज कराया।

व्यापारियों ने इसे रोजी-रोटी से जुड़े कारोबार पर कार्रवाई बताया।

प्रदर्शनकारियों ने बैनर और पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।

‘टैक्स लेते हैं, फिर कारोबार पर रोक क्यों?’

करीब 250 संचालकों ने नोटिसों के जवाब नगर निगम को सौंपे हैं।

संचालकों ने कमर्शियल टैक्स और बिजली कनेक्शन का हवाला दिया।

हालांकि, निगम ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना।

अधिकारियों का कहना है कि टैक्स से भवन का स्वीकृत उपयोग नहीं बदलता।

यहीं से अब कानूनी नियम और व्यापारिक वास्तविकता के बीच विवाद गहराया है।

गुजरात मॉडल और मिक्स्ड लैंड यूज की मांग

व्यापारियों ने नया मास्टर प्लान जल्द लागू करने की मांग की है।

साथ ही, मिक्स्ड लैंड यूज का प्रावधान लागू करने की मांग उठी है।

व्यापारी गुजरात की तर्ज पर नियमितीकरण नीति बनाने की मांग कर रहे हैं।

उनका कहना है कि वर्षों पुराने संस्थानों को नियमों के तहत अवसर मिलना चाहिए।

कुछ व्यापारियों ने मांग नहीं मानने पर आत्मघाती कदमों की चेतावनी भी दी।

आगे क्या?

अब नगर निगम की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है।

अगले तीन दिन कई संस्थानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

व्यापारी नियमितीकरण चाहते हैं, जबकि निगम नियमों के पालन पर जोर दे रहा है।

ऐसे में भोपाल का यह विवाद अब सड़क से प्रशासनिक फैसले तक पहुंच गया है।