पानी की कमी पूरी करेगी नई बारिश ! MP के 13 जिलों में आज हैवी रेन अलर्ट

MP में मानसून फिर सक्रिय हुआ है। आज 13 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में अति भारी बारिश संभव है। नया सिस्टम प्रदेश की बारिश कमी को घटा सकता है।

भोपाल।
मध्य प्रदेश में मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है।

बंगाल की खाड़ी से सक्रिय मजबूत सिस्टम ने बारिश की उम्मीद बढ़ा दी है।

सोमवार को 13 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी है।

सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में अति भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

इन जिलों में 24 घंटे के दौरान 4 से 8 इंच बारिश संभव है।

बाकी प्रभावित जिलों में भारी बारिश और तेज बौछारों की संभावना है।

पहले पूर्वी MP भीगेगा, फिर पश्चिमी हिस्से में बढ़ेगा असर

मौसम प्रणाली का असर पहले पूर्वी मध्य प्रदेश में दिखाई देगा।

जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

इसके बाद बारिश का दौर पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ेगा।

भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी असर दिखेगा।

ग्वालियर और चंबल संभाग में भी तेज बारिश की संभावना बनी हुई है।

17 से 19 अगस्त के बीच कई जिलों में मौसम सक्रिय रह सकता है।

सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में अति भारी बारिश का अलर्ट

सोमवार को सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में ऑरेंज अलर्ट जारी है।

इन जिलों में स्थानीय स्तर पर बहुत तेज बारिश हो सकती है।

सतना, पन्ना, दमोह और कटनी में भी भारी बारिश की चेतावनी है।

शहडोल, अनूपपुर, जबलपुर और नरसिंहपुर भी अलर्ट वाले जिलों में हैं।

सिवनी, मंडला और बालाघाट में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

लोगों को नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से सावधान रहने की जरूरत है।

भोपाल से इंदौर तक कई जिलों में बारिश के आसार

भोपाल, रायसेन, सीहोर और राजगढ़ में तेज बारिश हो सकती है।

विदिशा, इंदौर, धार और अलीराजपुर में भी बारिश के आसार हैं।

उज्जैन, मंदसौर, नीमच और देवास में कहीं तेज बारिश संभव है।

नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में भी मौसम सक्रिय रह सकता है।

ग्वालियर, गुना, शिवपुरी और दतिया में भी बारिश की संभावना है।

मुरैना, भिंड और श्योपुर में भी कहीं हल्की, कहीं तेज बारिश हो सकती है।

अब तक सामान्य से 12 प्रतिशत कम बारिश

प्रदेश में अब तक 544.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

यह लगभग 21.4 इंच बारिश के बराबर है।

इस अवधि की सामान्य बारिश 618.8 मिमी मानी जाती है।

यानी प्रदेश में अब तक करीब 12 प्रतिशत बारिश की कमी है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 18 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

पश्चिमी हिस्से में बारिश की कमी करीब 6 प्रतिशत बनी हुई है।

43 जिलों में अब भी बारिश का घाटा

प्रदेश के 43 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है।

कुछ जिलों में यह कमी 54 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

पूर्वी जिलों में बालाघाट, सीधी और मऊगंज भी कम बारिश वाले क्षेत्रों में हैं।

जबलपुर, कटनी, मंडला और सागर में भी बारिश का अंतर बना हुआ है।

पश्चिमी हिस्से के कई जिले भी औसत से पीछे चल रहे हैं।

इंदौर, उज्जैन, धार और नर्मदापुरम में भी बारिश की कमी दर्ज है।

सिर्फ 12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

भोपाल, गुना और सीहोर में औसत से ज्यादा बारिश हुई है।

राजगढ़ और ग्वालियर भी बेहतर बारिश वाले जिलों में शामिल हैं।

अनूपपुर, भिंड और बुरहानपुर में भी सामान्य से ज्यादा पानी गिरा।

देवास, बड़वानी, खंडवा और खरगोन में भी बारिश बेहतर रही।

जून की कमी अभी तक पूरी नहीं हुई

जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी।

जुलाई में तेज बारिश से स्थिति में कुछ सुधार जरूर आया।

हालांकि, मानसून के दो ब्रेक ने बारिश की रफ्तार धीमी कर दी।

कई दिनों तक प्रदेश के बड़े हिस्से सूखे जैसे हालात में रहे।

अब सक्रिय सिस्टम से बारिश की कमी कम होने की उम्मीद है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

प्रदेश की सामान्य मौसमी बारिश 37.3 इंच मानी जाती है।

भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य आंकड़ा 38 से 39 इंच है।