कोलकाता।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस नेता की मौत ने बड़ा सियासी सवाल खड़ा कर दिया है।
ममता सरकार में मंत्री रहे आशीष बनर्जी रविवार सुबह फांसी के फंदे पर लटके मिले।
उन्होंने बीरभूम जिले के एक TMC कार्यालय में फांसी लगाई।
बनर्जी पिछले चुनाव से पहले बार विधायक रहे।
वह ममता बनर्जी के पिछले कार्यकाल में डिप्टी स्पीकर भी रहे।
मामला केवल एक वरिष्ठ नेता की संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं है।
घटनास्थल से एक कथित सुसाइड नोट मिला। इसमें उन्होंने पार्टी में चल रहे गलत कामों का जिक्र किया।
नोट मेंभ्रष्टाचार के आरोपों व मानसिक दबाव जैसी बातों का भी जिक्र है।
इसके बाद TMC की अंदरूनी राजनीति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
सुसाइड नोट में लिखा—गलत को स्वीकार भी नहीं कर सका, विरोध भी नहीं कर पाया

सुसाइड नोट में लिखा कि वह पार्टी के सभी गलत कामों को स्वीकार नहीं कर पाते थे,
लेकिन उनका खुलकर विरोध भी नहीं कर सके।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अपने पूरे राजनीतिक जीवन में किसी काम के बदले एक पैसा नहीं लिया।
नोट में रेत टेंडर, TRDA के काम, प्लान पास करने, NOC और चेक से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
उन्होंने इन मामलों में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए खुद को भ्रष्टाचार से दूर बताया।
सबसे अहम बात यह है कि कथित नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया,
लेकिन राजनीति में आने को लेकर अफसोस जरूर जताया।
एक दिन पहले फहराया था तिरंगा, अगले दिन मिली मौत की खबर
आशीष बनर्जी की मौत ने सभी को चौंकाया।
दरअसल,उन्होंने कल स्वतंत्रता दिवस पर ही ध्वज फहराया था।
इसकी फोटो भी उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा की थी।
परिवार के अनुसार,वह रात तक बिल्कुल सामान्य थे,
लेकिन आज सुबह उनके फंदे पर लटके मिलने की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
पुलिस जांच में हत्या की साजिश का भी एंगल
पुलिस ने मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
इनमें हरनगर से TMC की पंचायत प्रमुख फातिमा बीवी, साहेब अली मंडल और मिथुन शेख शामिल हैं।
TMC नेता जुबेर पर जेल में रहते हुए आशीष बनर्जी की हत्या की साजिश रचने का आरोप है।
हालांकि, पुलिस अब हत्या के एंगल से भी मामले की जांच कर रही है।
भाजपा ने उठाए सवाल, अभिषेक बनर्जी ने बताया ईमानदार जनसेवक
मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
भाजपा की ओर से कहा गया कि TMC में सभी लोग एक जैसे नहीं हैं और संभव है कि कुछ नेता पार्टी के भीतर गलत गतिविधियों का विरोध नहीं कर पा रहे हों।
वहीं TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने आशीष बनर्जी को ईमानदार, सादगीपूर्ण और सम्मानित जनसेवक बताया।
उन्होंने कहा कि अंतिम नोट में कथित बदनाम करने के अभियान को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
पांच बार विधायक, मंत्री और डिप्टी स्पीकर रहे
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(अप्रैल-2026 विधानसभा चुनाव के दौरान आशीष बनर्जी ने टीएमसी उम्मीदवार सायंतिका बनर्जी के लिए कैंपेन किया था। )
आशीष बनर्जी पश्चिम बंगाल की राजनीति का बड़ा नाम थे।
वह 2001, 2006, 2011, 2016 और 2021 में लगातार पांच बार रामपुरहाट विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।
ममता बनर्जी सरकार में उन्होंने विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभाली और स्कूल शिक्षा तथा कृषि मंत्री भी रहे।
पिछली सरकार में वह पश्चिम बंगाल विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भी रहे।
हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा उम्मीदवार ध्रुबा साहा से हार का सामना करना पड़ा।
दो जून को छोड़ा था जिला अध्यक्ष पद
आशीष बनर्जी ने इसी वर्ष 2 जून को TMC के बीरभूम जिला अध्यक्ष और जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
तब उन्होंने कहा था कि कोर कमेटी निष्क्रिय हो चुकी है
और अब उसके काम करने की जरूरत नहीं रह गई है।
उन्होंने इसके बाद खुद को पार्टी का सामान्य सदस्य बताया था।
मौत से बड़ा सवाल: क्या पार्टी के भीतर दबाव में थे आशीष?
पूर्व डिप्टी स्पीकर की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक दिन पहले तक सामान्य राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय दिख रहे वरिष्ठ नेता ने ऐसा कदम क्यों उठाया।
कथित सुसाइड नोट में पार्टी के गलत कामों का जिक्र, भ्रष्टाचार से खुद को अलग बताने की कोशिश और कुछ लोगों की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही साफ होगा कि यह मामला आत्महत्या का है या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक अथवा आपराधिक साजिश है।