बालाघाट: तीन महीनों में 19 बच्चों की मौत के दावे, प्रशासन ने मानी सिर्फ आठ

बालाघाट के बिरसा ब्लॉक में बच्चों की मौतों पर विवाद गहराया है। प्रशासन ने आठ मौतें मानी हैं, जबकि विपक्ष अधिक संख्या का दावा कर रहा है। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर, इलाज, सफाई और पेयजल सुधार अभियान जारी है।

बालाघाट/भोपाल।

बालाघाट के बिरसा विकासखंड में उल्टी—दस्त,बुखार व अन्य बीमारियों से बीते तीन माह में 19 बच्चों की मौत की खबर है।

हालांकि अपुष्ट सूत्रों ने यह संख्या 20 बताई है,जबकि प्रशासन सिर्फ 8 बच्चों की मौत गिना रहा है।

मौसमी बीमारी के शिकार अन्य करीब पांच दर्जन बच्चे ​अस्पतालों में भर्ती हैं। प्रभावित सभी बच्चे विशेष जनजाति वर्ग से हैं।

बहरहाल,बच्चों की मौत के बाद जिला प्रशासन सतर्क है। वहीं इस मामले में सियासत गर्माने पर जिले के प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने एक दिन पहले जिला अस्पताल पहुंचकर भर्ती बच्चों का हाल जाना। इससे पहले  नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार प्रभावित इलाकों में पहुंचे।

कई मृतक बच्चों के नाम ​सरकारी रिकॉर्ड से गायब

मछूलदा गांव में बतिया बाई के 4 साल के बेटे को अचानक उल्टी-दस्त हुए। उसे चेचक भी निकली। गांव के एक  चिकित्सक ने उसका इलाज किया,लेकिन वह उसे बचा नहीं सका। खास बात यह कि कुंवर का नाम बीमारी से मरने वाले बच्चों की सूची में दर्ज नहीं है।

कुंवर लाल ऐसा अकेला उदाहरण नहीं। बिरसा विकासखंड के अन्य मृतक बच्चों के नाम भी ​सरकारी रिकॉर्ड से गायब है।

प्रशासन सिर्फ 8 बच्चों की मौत का दावा कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार, जिले में एक दर्जन से अधिक गांवों के बच्चे उल्टी-दस्त,बुखार,पीलिया व अन्य  बीमारियों का शिकार हैं।

तीन दिन पहले जिला प्रशासन की ओर से साझा एक जानकारी में करीब सौ प्रभावित बच्चों के अस्पतालों में भर्ती होने की बात कही गई थी।

बताया जाता है कि करीब 60 बच्चे अब भी अलग-अलग अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं।

ये गांव सर्वाधिक प्रभावित

जिले में बिरसा विकास खंड के करीब एक दर्जन गांव मौसमी बीमारी से प्रभावित हैं।

इनमें कोण्डेकसा, बोनदारी कोरका,मछुलदा,मातला,चिखली,कोटवीर कोना,गटिया,​तेंदूडही सर्वाधिक प्रभावित हैं।

बताया जाता है कि बच्चों की मौत के बढ़ते मामलों के बाद एक सरपंच ने ही इलाके के एसडीएम को इसकी सूचना दी।

इसके बाद ही प्रशासन सतर्क हुआ।

अडोरी पंचायत सरपंच का दावा है कि अकेले उसके ही पंचायत क्षेत्र में 9 बच्चों की मौत बीते तीन माह में हो चुकी है।

प्रभारी मंत्री उदय प्र​ताप ने जाना हाल

जिले के प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह एक दिन पहले (15 August )ध्वजारोहण करने बालाघाट पहुंचे।

इस दौरान उन्होंने जिला अस्पताल पहुंचकर प्रभावित बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली।

मीडिया से बातचीत में मंत्री उदय प्रताप ने कांग्रेस पर मृतक बच्चों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताने का आरोप लगाया है।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि बारिश के मौसम में आमतौर पर इस तरह की मौसमी बीमारियां पनपती हैं।

बालाघाटा का बोरसा विकासखंड कभी नक्सल प्रभावित इलाका रहा है।

बावजूद इसके,शासन ने दूर दराज के गांवों तक स्वास्थय सेवाएं बेहतर तरीके से पहुंचाने का काम किया है।

मंत्री से पहले पहुंचे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार

प्रभारी मंत्री से पहले विधानसभा में  नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने जिले के प्रभावित गांवों का दौरा किया।

वे जिला अस्पताल भी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार की लापरवाही के चलते कई माताओं की कोख सूनी हो गई।

जिले के बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 19 मासूम बच्चों की मौत हो गई,

लेकिन सरकार इन मौतों के वास्तविक आंकड़े सामने रखने के बजाय उन्हें छुपाने की कोशिश कर रही है।

आजादी के इतने साल बाद भी देश का आदिवासी समाज आज भी मुख्यधारा से दूर है।

न स्वास्थ्य सुविधाएं, न प्रधानमंत्री आवास, आखिर कहाँ गई वह भाजपा सरकार, जो आदिवासियों के गौरव की बात करती है?

लोगों को स्वच्छ पेयजल, रोजगार और गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार तक नहीं मिल पा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष के साथ जिले के कांग्रेस विधायक मधु भगत,संजय उइके,अनुभा मुंजारे व विक्की पटेल
भी मौजूद ​थे।

अब तक 19 बच्चों की मौत का दावा

मीडिया में आ रही खबरों  के मुताबिक,जिले के सिर्फ एक ही विकासखंड में अब तक 19 बच्चों की मौत बीते तीन माह में हो चुकी है।

इनमें ज्यादातर बच्चे उल्टी-दस्त,चेचक,बुखार,चिकन पॉक्स,मलेरिया व पीलिया से प्रभावित थे।

जिला अस्पताल में भर्ती बच्चे भी इन्हीं बीमारियों का शिकार हैं।

उक्त सभी गांवों के मृतक बच्चों की जो जानकारी अब तक सामने आई,वह इस प्रकार है—

बच्चों की मौत के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन

प्रभावित परिवारों का आरोप है कि वे राशन,पानी,स्वास्थ्य व सफाई जैसी सरकारी मूलभूत सुविधाओं से सालों से वंचित हैं।इधर,बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद बीते तीन-चार दिन से जिला प्रशासन मुस्तैद नजर आ रहा है।अलग-अलग विभागों की टीम प्रभावित गांवों में पहुंच कर सफाई,क्लो​रीन छिड़काव,नालियों की सफाई,मरम्मत,खाद्यान्न वितरण जैसे काम कर रही है।

15 अगस्त को दो माह का राशन एक मुश्त बांटा

 

प्रभावित गांव में बनाई गई नई नालियां

 

गांवों में ब्लीचिंग व क्लोरीनेशन

 

डॉक्टर व स्वास्थ्य दल भी पहुंचा

 

शालाओं में भी विशेष इंतजाम

हैंडपंप व पेयजल स्त्रोतों की सफाई