MP: दो संतान नियम पर फिर अटका पेंच, CM के निर्देश के बाद भी कैबिनेट तक नहीं पहुंचा प्रस्ताव

मध्य प्रदेश में दो संतान वाला 25 साल पुराना सरकारी नौकरी नियम खत्म करने की प्रक्रिया फिर अटक गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद GAD प्रस्ताव कैबिनेट तक नहीं पहुंचा है।

भोपाल

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी से जुड़े करीब 25 साल पुराने दो संतान नियम को खत्म करने की कवायद आगे नहीं बढ़ पा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस पाबंदी को हटाने के निर्देश दे चुके हैं।

इसके बावजूद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से संशोधित प्रस्ताव अब तक कैबिनेट के सामने नहीं पहुंचा है।

ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि मुख्यमंत्री की मंशा और ब्यूरोक्रेसी की प्रक्रिया के बीच आखिर अड़चन कहां है।

वरिष्ठ सचिव समिति में भी नहीं बनी सहमति

मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्य सचिव अनुराग जैन के कार्यकाल में इस मुद्दे पर पहल हुई थी।

मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप नियम खत्म करने का प्रस्ताव वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक में रखा गया था।

हालांकि, समिति में प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी।

इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ा।

नतीजतन, प्रस्ताव कैबिनेट तक भी नहीं पहुंच पाया।

CM के निर्देश के बाद भी स्थिति जस की तस

करीब एक माह पहले मुख्यमंत्री यादव ने अधिकारियों को इस नियम में बदलाव के निर्देश दिए थे।

इसके बाद उम्मीद थी कि GAD संशोधित प्रस्ताव तैयार करके जल्द कैबिनेट में भेजेगा।

हालांकि, अब तक ऐसा नहीं हुआ है। इस वजह से 2001 से लागू प्रतिबंध अभी भी प्रभावी है।

यानी मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद नियम खत्म करने की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर अटकी हुई है।

GAD के ड्राफ्ट में पाबंदी बरकरार थी

इस विवाद की एक अहम कड़ी GAD का प्रस्तावित नया ड्राफ्ट भी है।

इसमें दो से अधिक संतान होने पर सरकारी नौकरी की पाबंदी बरकरार रखी गई थी।

ड्राफ्ट के नियम 5 और 6 में पात्रता और अपात्रता की शर्तें तय की गई थीं।

इसके अनुसार, जिस उम्मीदवार की दो से अधिक संतान हैं और इनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा।

हालांकि, इसमें जुड़वां या एक साथ उससे अधिक बच्चों के जन्म को लेकर राहत का प्रावधान रखा गया था।

जुड़वां बच्चों के मामले में थी छूट

प्रस्तावित नियम में एक विशेष स्थिति का उल्लेख था।

यदि किसी व्यक्ति का पहले से एक बच्चा है और अगली डिलीवरी में जुड़वां या उससे अधिक बच्चे होते हैं,

तो उसे केवल इसी आधार पर अपात्र नहीं माना जाना था।

इस प्रावधान को लेकर भी नियमों में अलग स्थिति स्पष्ट की गई थी।

CM ने ड्राफ्ट पर जताई थी आपत्ति

मुख्यमंत्री ने GAD के इस प्रस्तावित ड्राफ्ट पर आपत्ति जताई थी।

उनकी मंशा दो से अधिक संतान वाली पाबंदी को हटाने की थी।

इसके विपरीत ड्राफ्ट में यही प्रतिबंध कायम रखा गया था।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने GAD को ड्राफ्ट तत्काल पोर्टल से हटाने के निर्देश दिए थे।

साथ ही, संशोधित प्रारूप दोबारा प्रकाशित करने को कहा था।

2001 में लागू हुआ था दो संतान नियम

मध्य प्रदेश में यह प्रावधान वर्ष 2001 में लागू किया गया था।

इसके तहत 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी की सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए अपात्र माना गया।

इसके अलावा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 में भी दो से अधिक बच्चों को लेकर प्रावधान किया गया था।

यही वजह है कि नियम में बदलाव केवल भर्ती तक सीमित नहीं है।

इसका असर सरकारी कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों पर भी पड़ता है।

कर्मचारी संगठन भी कर चुके हैं विरोध

दो संतान की शर्त को लेकर कर्मचारी संगठन लंबे समय से विरोध जताते रहे हैं।

उनका तर्क है कि कई मामलों में यह प्रावधान कर्मचारियों के लिए परेशानी पैदा करता है।

इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री ने नियम में बदलाव की मंशा जाहिर की थी।

कर्मचारी संगठनों ने अन्य मांगों के साथ इस मुद्दे को भी सरकार के सामने उठाया है।

अब कैबिनेट के फैसले पर टिकी नजर

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि GAD संशोधित प्रस्ताव कब तैयार करता है।

इसके बाद ही इसे कैबिनेट के सामने रखने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

ऐसे में मुख्यमंत्री के निर्देश और विभागीय प्रक्रिया के बीच बना यह अंतर चर्चा का विषय है।

हालांकि, सरकार की ओर से अब तक इस देरी को लेकर कोई स्पष्ट सार्वजनिक कारण सामने नहीं आया है।

सिंगरौली उप पंजीयक हुए थे बर्खास्त

दो से अधिक संतानों के मामले में गत जून में सिंगरौली उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार को बर्खास्त किया गया था।

हालांकि,अगले ही दिन उन्होंने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के समक्ष कथित अपील की।

इसे आधार बनाकर परिहार की सेवाएं अपील का फैसला आने तक पुन: बहाल कर दी गई।

तर्क दिया गया कि अपील की सुनवाई में वक्त लगेगा। इस दौरान उप पंजीयक का अपूर्णीय क्षति होगी।