मोदी सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला, कांग्रेस नहीं कर पाई: गर्जराज सिंह

रायपुर में आयोजित मीडिया सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ने मोदी के 12 साल के शासन में गरीबी उन्मूलन की उपलब्धियों को कांग्रेस की विफलताओं से तुलना की।

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रायपुर में आयोजित एक बड़े मीडिया सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मोदी सरकार की गरीबी उन्मूलन की उपलब्धियों को उजागर किया, जिसमें उन्होंने 12 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर ले जाने का दावा किया। उन्होंने कांग्रेस के छह दशकों के शासनकाल की तुलना करते हुए कहा कि उस अवधि में गरीबी को समाप्त करने के कई नारे उठाए गए, पर वास्तविक आंकड़े बहुत सीमित रहे। इस बयान में उन्होंने मोदी के व्यक्तिगत गरीबी अनुभव को भी उजागर किया, जिससे जनता के साथ उनकी जुड़ाव की भावना को बल मिला। सिंह ने विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं, जैसे लखपति दीदी और GST के आर्थिक प्रभावों को भी प्रमुख बिंदु के रूप में प्रस्तुत किया। अंत में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत की बढ़ती भूमिका और भविष्य की नीतियों की रूपरेखा भी बताई।

Modi सरकार की गरीबी उन्मूलन की उपलब्धियाँ: आँकड़े और कथन

सरकार द्वारा घोषित 25 करोड़ की उन्नति

गुज़रते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र ने आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग पच्चीस करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर ले जाने का दावा किया है, जिससे सामाजिक सुरक्षा जाल में एक विशाल बदलाव आया है। इस उपलब्धि को विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जन धन योजना, उज्ज्वला योजना और ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के साथ जोड़ा गया है। मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यह आंकड़ा केवल संख्यात्मक नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार को दर्शाता है।

कांग्रेस के दौर में गरीबी निराकरण का दावा

कांग्रेस के छह दशकों के शासनकाल में कई बार गरीबी उन्मूलन के नारे उठाए गए, परंतु वास्तविक आँकड़े दिखाते हैं कि उस अवधि में गरीबी रेखा से ऊपर उठने वाले लोगों की संख्या अपेक्षाकृत स्थिर रही। गिरिराज सिंह ने कांग्रेस के पूर्वी slogans जैसे “इंदिरा जी को लाएंगे, आधी रोटी खाएंगे, गरीबी को मिटाएंगे” को आलोचना करते हुए कहा कि इन वादों का व्यावहारिक प्रभाव सीमित रहा।

इतिहासिक तुलना: कांग्रेस बनाम मोदी सरकार की सामाजिक नीतियाँ

पिछले दशकों में गरीबी नीतियों की यात्रा

स्वतंत्रता के बाद से भारत ने कई बार गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य निर्धारित किए, लेकिन 1990 के आर्थिक उदारीकरण के बाद सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में परिवर्तन आया। कांग्रेस के समय में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (NREGA) जैसी पहलें शुरू हुईं, परंतु उनका कवरेज और प्रभाव सीमित रहा।

आर्थिक और सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण

मोदी सरकार ने आर्थिक सुधारों के साथ-साथ डिजिटल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया, जिससे लाभार्थियों को सीधे बैंक खातों में सहायता मिल पाई। इस परिवर्तन ने न केवल गरीबी को घटाया, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता खर्च में भी वृद्धि की, जिससे समग्र जीडीपी में सकारात्मक योगदान मिला।

आंकड़े और तथ्य: 12 वर्षों में गरीबी में परिवर्तन

नीचे दी गई सूची में 12 वर्षों में गरीबी उन्मूलन के प्रमुख आँकड़े और उनके सामाजिक प्रभाव प्रस्तुत किए गए हैं।

  • पच्चीस करोड़ लाभार्थी: आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 2014‑2026 में इस संख्या में वृद्धि ने राष्ट्रीय गरीबी दर को 20% से नीचे लाने में मदद की।
  • GST राजस्व में वृद्धि: एकरूप कर प्रणाली के कार्यान्वयन के बाद कर संग्रह 80,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.42 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिससे विकासात्मक खर्चों के लिए फंड उपलब्ध हुआ।
  • अंतरराष्ट्रीय निवेश में उछाल: मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक रैंकिंग में सुधार हुआ, जिससे 22 देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।