CJP नेताओं को अमेरिका और पाकिस्तान से फंडिंग? केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के आरोपों पर मचा विवाद

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने CJP नेताओं को अमेरिका और पाकिस्तान से कथित फंडिंग मिलने का दावा किया है। अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका ने पलटवार किया, जबकि प्रियांक खरगे ने सबूत मांगे हैं।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं पर विदेशी फंडिंग लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को अमेरिका में रहने वाले डोनर्स से आर्थिक मदद मिली, जबकि संगठन के सह-संस्थापक आशुतोष रांका को पाकिस्तानी नेताओं और उनके मददगारों के जरिए पैसा मिला। मंत्री के मुताबिक, इस फंडिंग का इस्तेमाल भारत में सरकार विरोधी अभियान चलाने और लोगों के बीच कथित तौर पर भ्रामक नैरेटिव फैलाने के लिए किया जा रहा है।

जितेंद्र सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। CJP नेताओं ने आरोपों पर पलटवार किया है, जबकि कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी बिना सार्वजनिक सबूत पेश किए ऐसे दावे किए जाने पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल विदेशी फंडिंग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

अभिजीत दिपके को अमेरिका और आशुतोष रांका को पाकिस्तान से फंडिंग का दावा

जितेंद्र सिंह ने 3 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ये आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि अभिजीत दिपके को अमेरिका स्थित डोनर्स से फंड मिल रहा है, जबकि आशुतोष रांका को पाकिस्तानी राजनेताओं और अन्य लोगों से आर्थिक मदद मिलने का दावा है।

मंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी फंडिंग वाले NGO, भारत-विरोधी संगठन और कथित डीप स्टेट से जुड़े लोग मिलकर भारत में सरकार के खिलाफ नैरेटिव तैयार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कार्यकर्ताओं और संगठनों की फंडिंग के स्रोतों की जांच और जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है।

हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में किस तरह के वित्तीय दस्तावेज, लेन-देन का रिकॉर्ड या जांच के निष्कर्ष मौजूद हैं, इसका विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक रिपोर्टों में सामने नहीं आया है।

CJP नेताओं पर आरोपों के बाद क्या बोले आशुतोष रांका?

केंद्रीय मंत्री के आरोपों के बाद CJP नेता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंत्री से सवाल किया कि अगर उन्हें विदेशी फंडिंग मिल रही थी तो उनसे बातचीत क्यों की जा रही थी?

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रांका ने व्यंग्यात्मक अंदाज में बेरोजगारी, पेपर लीक और वोट चोरी जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए भी केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि क्या देश की इन समस्याओं के लिए भी पाकिस्तान जिम्मेदार है?

उनकी प्रतिक्रिया को जितेंद्र सिंह के आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, रांका की ओर से विदेशी फंडिंग के आरोपों पर विस्तृत वित्तीय दस्तावेज या लेन-देन का रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने की जानकारी रिपोर्ट में नहीं दी गई है।

अभिजीत दिपके ने भी किया पलटवार

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी जितेंद्र सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया दी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने मंत्री के बयान की वीडियो क्लिप के साथ एक व्यंग्यात्मक GIF साझा किया।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, CJP ने सोशल मीडिया पर आरोपों की आलोचना करते हुए कहा कि ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को भी बिना किसी परिणाम के कुछ भी कहने की छूट नहीं होनी चाहिए।

इस तरह CJP नेताओं ने आरोपों को चुनौती दी है। हालांकि, विदेशी फंडिंग के वास्तविक स्रोतों को लेकर दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ा है पूरा विवाद

यह विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। CJP से जुड़े कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ संगठन और कार्यकर्ता चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच गलत जानकारी फैला रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसे अभियानों के पीछे विदेशी फंडिंग और बाहरी नेटवर्क की भूमिका की जांच जरूरी है।

दूसरी ओर, SIR का विरोध कर रहे समूहों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव के दौरान योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। इस मुद्दे पर सरकार और विरोध कर रहे संगठनों के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।

जितेंद्र सिंह ने FCRA कानून का भी किया बचाव

विदेशी फंडिंग के आरोपों के साथ जितेंद्र सिंह ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) का भी बचाव किया। यह कानून भारत में व्यक्तियों और संगठनों को मिलने वाले विदेशी योगदान को नियंत्रित करता है।

FCRA के तहत विदेशी योगदान स्वीकार करने वाले पात्र संगठनों को निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। सरकार इस कानून को विदेशी धन के इस्तेमाल और उसके स्रोतों पर निगरानी रखने का माध्यम बताती है।

मंत्री ने कहा कि जो लोग सार्वजनिक अभियान चलाते हैं, उन्हें अपनी फंडिंग के स्रोतों के बारे में भी पारदर्शिता रखनी चाहिए। हालांकि, किसी व्यक्ति या संगठन पर विदेशी फंडिंग का आरोप लगना अपने आप में कानून के उल्लंघन का प्रमाण नहीं है। इसके लिए संबंधित लेन-देन और कानूनी प्रावधानों के आधार पर जांच जरूरी होती है।

प्रियांक खरगे ने केंद्र से मांगे सबूत

इस मामले में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी केंद्र सरकार के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी या केंद्र सरकार के पास विदेशी फंडिंग के सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

खरगे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और खुफिया एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि ऐसी गतिविधियों के बारे में जानकारी है तो उसके समर्थन में दस्तावेज क्यों नहीं पेश किए जा रहे हैं।

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उनका कहना था कि बिना सबूत सार्वजनिक आरोप लगाने के बजाय संबंधित एजेंसियों को तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।

क्या CJP नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई?

जितेंद्र सिंह के बयान में विदेशी फंडिंग को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में इन आरोपों के आधार पर किसी अंतिम जांच निष्कर्ष या दोष साबित होने की जानकारी नहीं दी गई है।

मंत्री ने खुफिया सूचनाओं और उपलब्ध जानकारी का हवाला दिया है। लेकिन आरोपों की पुष्टि के लिए जांच एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

इसलिए फिलहाल इस पूरे मामले को विदेशी फंडिंग के आरोपों और उनके जवाब में CJP नेताओं की प्रतिक्रिया के रूप में देखना उचित होगा। आने वाले दिनों में यदि जांच एजेंसियां कोई आधिकारिक जानकारी साझा करती हैं, तो मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

विदेशी फंडिंग के आरोपों ने बढ़ाया राजनीतिक टकराव

CJP नेताओं पर अमेरिका और पाकिस्तान से फंडिंग लेने के आरोपों ने SIR विरोध-प्रदर्शन को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को नया मोड़ दिया है। एक तरफ केंद्रीय मंत्री विदेशी फंडिंग और कथित बाहरी हस्तक्षेप का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं CJP नेता और विपक्षी प्रतिनिधि इन आरोपों के आधार पर सार्वजनिक सबूत मांग रहे हैं।

अब इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या आरोपों के समर्थन में जांच एजेंसियां ठोस वित्तीय प्रमाण सामने लाती हैं। फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी विदेशी फंडिंग या गैरकानूनी लेन-देन को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।