ग्रीक रेस्टोरेंट में मिले राजीव, पहली नजर में भा गए: सोनिया गांधी ने खोले जिंदगी के राज

सोनिया गांधी ने कैम्ब्रिज के ग्रीक रेस्टोरेंट में राजीव गांधी से पहली मुलाकात का किस्सा साझा किया। उनकी आत्मकथा 10 नवंबर को आएगी।

नई दिल्ली।

इंग्लैंड के कैम्ब्रिज शहर का एक छोटा-सा ग्रीक रेस्टोरेंट।

सोनिया गांधी को वहां इटैलियन खाने की तलाश थी।

लेकिन इस तलाश ने उनकी जिंदगी को एक नया मोड़ दे दिया।

इसी रेस्टोरेंट में उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई।

सोनिया के मुताबिक, पहली मुलाकात में ही राजीव ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी थी।

दशकों बाद सोनिया गांधी ने अपनी जिंदगी के इस खास अध्याय को सार्वजनिक किया है।

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी पहली पोस्ट में उन्होंने एक वीडियो साझा किया।

इसमें वह राजीव गांधी के साथ अपनी पहली मुलाकात और रिश्ते की शुरुआत के बारे में बताती नजर आईं।

सोनिया ने लिखा कि एक छोटे-से ग्रीक रेस्टोरेंट में उनकी प्रेम कहानी शुरू हुई।

दोनों ने मिलकर प्यार, हंसी और यादों से भरी दुनिया बसाई।

अब वह इस दुनिया के कुछ पन्ने पाठकों के साथ साझा करने जा रही हैं।

उनकी आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर को प्रकाशित होगी।

किताब में इटली में बचपन से लेकर भारत आने, राजीव गांधी से शादी,

परिवार के साथ जीवन और राजनीति तक के सफर का जिक्र है।

1. इटैलियन खाने की तलाश में पहुंचीं ग्रीक रेस्टोरेंट

सोनिया गांधी ने बताया कि उस समय इंग्लैंड में आज की तरह रेस्टोरेंट नहीं थे।

उन्हें अपने पसंद का इटैलियन खाना ढूंढने में परेशानी होती थी।

इसी दौरान उन्हें कैम्ब्रिज का वर्सिटी रेस्टोरेंट मिला।

यह ग्रीक रेस्टोरेंट था। यहां यूरोप के साथ भारतीय छात्र भी खाना खाने आते थे।

इसी जगह एक परिचित ने सोनिया और राजीव का परिचय कराया।

सोनिया ने बताया कि राजीव उन्हें पहली मुलाकात में ही पसंद आ गए थे।

उन्हें लगा कि वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ वह अपनी जिंदगी बिताना चाहेंगी।

बाद में उन्हें पता चला कि राजीव भी उनके बारे में ऐसा ही महसूस करते थे।

राजीव का स्वभाव सोनिया को खास तौर पर पसंद आया।

उन्होंने उन्हें आकर्षक व्यक्तित्व वाला और सौम्य स्वभाव का इंसान बताया।

दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे गहरी होती गई।

वे दोस्तों के साथ पार्टियों में जाते और घूमने-फिरने का समय निकालते थे।

2. इटली से भारत तक का सफर, इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात

सोनिया का जन्म इटली में हुआ था। राजीव गांधी से रिश्ते ने उन्हें भारत से जोड़ा।

दोनों ने 25 फरवरी 1968 को शादी की।

शादी के बाद सोनिया के सामने एक नए देश, परिवार और संस्कृति में ढलने की चुनौती थी।

उनकी आत्मकथा में भारतीय जीवनशैली अपनाने, हिंदी सीखने और

नेहरू-गांधी परिवार के साथ शुरुआती अनुभवों का भी जिक्र है।

इंदिरा गांधी उस समय देश की प्रधानमंत्री थीं। सोनिया के लिए वह केवल देश की शीर्ष नेता नहीं,

बल्कि परिवार की सदस्य भी थीं।

किताब में सास-बहू के रिश्ते और परिवार के भीतर के अनुभवों को भी जगह दी गई है।

3. इंदिरा और राजीव की हत्या ने बदल दी जिंदगी

सोनिया गांधी की जिंदगी में दो बड़ी त्रासदियां आईं।

31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई।

इसके बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने।

लेकिन 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्या कर दी गई।

इस घटना ने सोनिया की निजी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।

राजीव की हत्या के बाद सोनिया लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं।

वह परिवार और निजी जीवन पर ध्यान देना चाहती थीं।

लेकिन समय के साथ कांग्रेस में उनकी भूमिका को लेकर दबाव बढ़ा।

उनकी आत्मकथा में इन घटनाओं से जुड़े अनुभवों और

उनके जीवन पर पड़े प्रभावों को भी जगह दी गई है।

4. राजनीति से दूरी, फिर कांग्रेस की कमान

राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया ने तुरंत राजनीति में प्रवेश नहीं किया।

उस समय कांग्रेस का नेतृत्व पीवी नरसिम्हा राव के हाथों में था।

1990 के दशक में कांग्रेस के सामने संगठनात्मक चुनौतियां बढ़ीं।

इसी दौर में सोनिया गांधी ने पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

उन्होंने 1997 में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ली।

इसके बाद मार्च 1998 में पार्टी अध्यक्ष बनीं।

उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने और

सहयोगी दलों के साथ गठबंधन बनाने पर ध्यान दिया।

सोनिया गांधी लंबे समय तक कांग्रेस अध्यक्ष रहीं।

उनका राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण बना कि एक ऐसी महिला,

जो शुरुआत में राजनीति से दूर रहना चाहती थीं,

बाद में देश की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में शामिल हो गईं।

5. 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने का फैसला

2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को सफलता मिली।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी UPA ने सरकार बनाने का दावा पेश किया।

गठबंधन के सहयोगियों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया।

लेकिन सोनिया ने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने मनमोहन सिंह को इस पद के लिए आगे किया।

इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

उस समय सोनिया के विदेशी मूल को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुआ था।

विपक्ष के कुछ नेताओं ने उनके प्रधानमंत्री बनने पर सवाल उठाए थे।

इसके बाद भी सोनिया गांधी सरकार और गठबंधन की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहीं।

उनकी आत्मकथा में इस राजनीतिक दौर और निजी फैसलों को समझने के

लिए पाठकों को एक नया नजरिया मिल सकता है।

6. अब निजी यादों के जरिए सामने आएगी सोनिया की कहानी

सोनिया गांधी की आत्मकथा केवल राजीव गांधी के साथ उनकी प्रेम कहानी तक सीमित नहीं है।

यह इटली में उनके शुरुआती जीवन, भारत आने, परिवार में ढलने, व्यक्तिगत त्रासदियों

और राजनीति में उनकी भूमिका तक का सफर समेटती है।

किताब का शीर्षक ‘Belonging: A Journey of Love’ भी अपनेपन और जीवन के सफर की ओर संकेत करता है।

सोनिया ने अपने पहले X पोस्ट के जरिए पाठकों को इस निजी दुनिया की झलक दी है।

अब तक सार्वजनिक जीवन में सोनिया गांधी की पहचान मुख्य रूप से कांग्रेस नेता और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में रही है।

इस किताब के जरिए पाठक उनके जीवन के उन पहलुओं को जान सकेंगे,

जो राजनीतिक भाषणों और सार्वजनिक बयानों से अलग हैं।

10 नवंबर को किताब के प्रकाशित होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया गांधी ने

अपनी जिंदगी के किन अनुभवों को विस्तार से साझा किया है और

उनकी यादें भारतीय राजनीति के चर्चित अध्यायों पर क्या नई रोशनी डालती हैं।

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