कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट का डेटा डार्क वेब पर! कंट्रोल रूम का लेआउट और हजारों दस्तावेज लीक होने का दावा
भारत के सबसे बड़े कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट से जुड़े 19 हजार संवेदनशील दस्तावेज डार्क वेब पर लीक होने का दावा किया गया है। कंट्रोल रूम लेआउट समेत डेटा की जांच CERT-In और NPCIL कर रहे हैं।
भारत के सबसे बड़े परमाणु बिजलीघर कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़ी संवेदनशील जानकारी डार्क वेब तक पहुंचने का दावा सामने आया है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह केवल डेटा चोरी का मामला नहीं, बल्कि देश के अहम रणनीतिक ढांचे की साइबर सुरक्षा पर बड़ा सवाल भी खड़ा करेगा।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘वर्ल्ड लीक्स’ नाम के हैकर समूह ने प्लांट से जुड़े हजारों दस्तावेज सार्वजनिक करने का दावा किया है। इनमें कंट्रोल रूम का लेआउट, सप्लायरों की सूची, ब्लूप्रिंट और कई तकनीकी रिकॉर्ड शामिल बताए जा रहे हैं। सर्वर में सेंध मई में लगी थी, जबकि दस्तावेज जून में लीक किए जाने का दावा किया गया। मामला अब सार्वजनिक हुआ है।
रिलायंस ने माना- थर्ड पार्टी सर्वर हुआ था हैक
कुडनकुलम की यूनिट-3 और यूनिट-4 परियोजना पर काम कर रही रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने स्वीकार किया है कि उसके डेटा की मेजबानी करने वाली थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा का सर्वर साइबर हमले का शिकार हुआ था। कंपनी ने इसकी सूचना सरकार को दे दी है।
फिलहाल न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), रिलायंस और CERT-In पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि लीक हुआ डेटा कितना प्रामाणिक है और इससे परिचालन सुरक्षा पर कोई असर पड़ा है या नहीं।
ऐसे हुआ कथित डेटा लीक
-रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर यूनिट-3 और यूनिट-4 परियोजना का ठेकेदार है।
-परियोजना से जुड़ा कुछ डेटा योट्टा के सर्वर पर रखा गया था।
-29 मई 2026 को योट्टा ने संदिग्ध साइबर गतिविधि का पता लगाया और हमले को रोकने का दावा किया।
-जून के अंत में रिलायंस को जानकारी मिली कि ‘वर्ल्ड लीक्स’ हैकर समूह डेटा चोरी का दावा कर रहा है।
-डार्क वेब पर 8.58 लाख फाइलों में से करीब 19 हजार संवेदनशील दस्तावेज अपलोड करने का दावा किया गया।
-इनमें ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की जानकारी, निरीक्षण रिपोर्ट और बैठकों से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं।
क्यों बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
साइबर और परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दस्तावेज वास्तविक हैं तो इनके जरिए कोई भी दुर्भावनापूर्ण समूह प्लांट की सप्लाई चेन, सपोर्ट सिस्टम और सुरक्षा ढांचे का विस्तृत अध्ययन कर सकता है। इससे भविष्य में साइबर या भौतिक हमलों का खतरा बढ़ सकता है, भले ही न्यूक्लियर रिएक्टर की परिचालन प्रणाली सीधे प्रभावित न हुई हो।
2019 में भी बना था साइबर हमले का निशाना
यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम प्लांट साइबर खतरे की वजह से चर्चा में आया हो। वर्ष 2019 में भी प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। तब NPCIL ने स्पष्ट किया था कि रिएक्टर की परिचालन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित रही थी और उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा था।
क्यों अहम है कुडनकुलम प्लांट
तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा परियोजना केंद्र है। रूस के सहयोग से विकसित इस परियोजना में कई यूनिट संचालित हैं, जबकि यूनिट-3 और यूनिट-4 का निर्माण जारी है। देश की ऊर्जा सुरक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।