NEET री‑एक्ज़ाम 2026: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान, छात्र निडर होकर दे परीक्षा

22 लाख छात्रों को निडर होकर परीक्षा देने का आश्वासन, पेपर लीक के बाद शांति और विश्वास की पुकार

NEET UG री‑एक्ज़ाम 2026 की पुनः परीक्षा 21 जून को आयोजित होने वाली है, और इस महत्वपूर्ण क्षण में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को दृढ़ विश्वास दिलाया है। उन्होंने 22 लाख अभ्यर्थियों को बिना किसी चिंता के परीक्षा देने का आग्रह किया, जिससे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की तैयारी पर प्रकाश पड़ा। मंत्री ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा की अपील की और समाजसेवकों से बच्चों के भविष्य को खतरे में न डालने का अनुरोध किया।

इस बयान में उन्होंने पिछले पेपर लीक के कारण उत्पन्न हुए विवाद को भी संबोधित किया, और अफवाहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। अंत में, उन्होंने सभी को सफलता की शुभकामनाएँ देते हुए भारत की शिक्षा व्यवस्था में अटूट विश्वास की पुष्टि की।

धर्मेंद्र प्रधान का आश्वस्तिक बयान: 22 लाख छात्रों के लिए निडरता

परीक्षा के लिए विश्वास का संदेश

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि NTA, राज्य सरकारें और जिला प्रशासन सभी मिलकर इस परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए तैयार हैं, जिससे छात्रों को भरोसा हो कि उनका भविष्य सुरक्षित हाथों में है। उन्होंने विशेष रूप से 22 लाख उम्मीदवारों को निडर होकर परीक्षा देने की प्रेरणा दी, यह मानते हुए कि उनका प्रदर्शन उनके कठिन परिश्रम का प्रतिबिंब होगा।

समाजसेवी अभिभावकों से अपील

मंत्री ने अभिभावकों और समाजसेवकों को चेतावनी दी कि वे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी प्रकार के मजाक या दबाव से बचें। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार नागरिकों को अपने कर्तव्य का पालन करते हुए बच्चों को समर्थन देना चाहिए, ताकि वे बिना भय के परीक्षा में भाग ले सकें।

पिछले पेपर लीक विवाद और पुनः परीक्षा की तैयारी

पेपर लीक के बाद की कार्रवाई

मूल NEET UG परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर तीव्र बहस छिड़ गई। इस विवाद के जवाब में NTA ने कड़ी निगरानी लागू की, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों को तुरंत हटाने और दावेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की घोषणा की।

NTA की सुरक्षा उपाय

पुनः परीक्षा की तैयारी में NTA ने उन्नत एन्क्रिप्शन, बहु‑स्तरीय पहचान प्रणाली और लाइव मॉनिटरिंग लागू की है, जिससे परीक्षा केंद्रों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोका जा सके। इस तकनीकी उपायों ने छात्रों और अभिभावकों में भरोसा बढ़ाया है, जो अब परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित मानते हैं।