श्रीनगर।
जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है।
यूसमर्ग के कोराग इलाके में मंगलवार रात शुरू हुए अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर को मार गिराया गया।
सुरक्षा अधिकारियों ने उसकी पहचान सुलेमान शाह उर्फ मूसा के रूप में की है।
हालांकि, सेना के चिनार कॉर्प्स ने अपनी आधिकारिक जानकारी में अभी आतंकी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
खुफिया इनपुट पर शुरू हुआ ऑपरेशन
मंगलवार को राष्ट्रीय राइफल्स व अन्य सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन कोराग शुरू किया था।
सुरक्षा बलों को इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की विशेष खुफिया जानकारी मिली थी।
इसके बाद कोराग और यूसमर्ग के आसपास जंगलों में तलाशी अभियान चलाया गया।
तलाशी के दौरान सुरक्षाबलों को दूधपथरी के दुर्गम जंगल में संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी।
जवानों ने संदिग्धों को चुनौती दी।
इसके बाद आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी।
जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी मारा गया।
सेना ने इसे एक आतंकी के मारे जाने की पुष्टि की है।
मारे गए आतंकी की पहचान मूसा के तौर पर

(5 सितंबर 2026 को मारा गया प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी यासिर (बाएं)। तस्वीर में दाईं ओर दिख रहा आतंकी मूसा) ,साभार इंडियन एक्सप्रेस.
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक मारा गया आतंकी सुलेमान शाह उर्फ मूसा था।
वह पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा वरिष्ठ आतंकी बताया गया है।
उसके खिलाफ जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों से जुड़े होने के आरोप थे।
सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थीं।
5 सितंबर को बच निकला था मूसाjammu-kashmir-budgam-musa-terrorist-killed-operation-koragबताया जाता है कि मूसा पीरपंजाल इलाके में लंबे समय से शरण लिए हुए था।
इस दौरान उसने कई वारदातों को भी अंजाम दिया।
इसकी भनक लगने पर सुरक्षा बलों ने उसकी पहले भी घेराबंदी की।
5 सितंबर 2026 को यूसमर्ग के ऊंचाई वाले इलाके में हुए अभियान में उसका करीबी सहयोगी यासिर मारा गया था।
उस मुठभेड़ के बाद मूसा के मौके से निकल जाने की बात सामने आई थी।
इसके बाद सुरक्षाबलों ने उसके संभावित ठिकानों और आवाजाही वाले इलाकों में तलाशी अभियान जारी रखा।
यासिर और मूसा पर कई हमलों में शामिल होने का आरोप
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक मूसा और यासिर लंबे समय से पीर पंजाल के इलाकों में सक्रिय थे।
दोनों पर 2021 से 2024 के बीच सुरक्षाबलों और अन्य लोगों पर हुए कई हमलों में शामिल होने के आरोप थे।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पर पुंछ और राजौरी क्षेत्र में सेना के जवानों पर हुए कई हमलों से जुड़े होने का आरोप था।
इनमें 2021 में नौ सैनिकों की हत्या, 2023 में पांच सैनिकों की हत्या
और दिसंबर 2023 में चार सैनिकों की हत्या से जुड़े मामले शामिल हैं।
पीर पंजाल से कश्मीर घाटी तक पहुंची तलाश
सुरक्षाबलों ने दोनों आतंकियों की तलाश के लिए कई महीनों तक अभियान चलाया।
रिपोर्टों के मुताबिक दबाव बढ़ने के बाद दोनों पीर पंजाल के जंगलों से निकलकर कश्मीर घाटी की ओर चले गए थे।
इसके बाद राजौरी, पुंछ और यूसमर्ग के ऊंचाई वाले जंगलों में तलाशी अभियान तेज किया गया।
अगस्त के अंत में तकनीकी निगरानी के जरिए उनकी गतिविधियों के बारे में इनपुट मिलने के बाद अभियान को और तेज किया गया था।
मूसा के मारे जाने के बाद भी ऑपरेशन जारी
मूसा के मारे जाने के बावजूद इलाके में सुरक्षा बलों का तलाशी अभियान जारी है।
अधिकारियों को आशंका है कि आसपास अन्य आतंकी भी छिपे हो सकते हैं।
सुरक्षाबल जंगलों और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
संभावित भागने के रास्तों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।
सेना की ओर से क्या कहा गया?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,चिनार कॉर्प्स ने बताया कि विशेष खुफिया सूचना के आधार पर
राष्ट्रीय राइफल्स और CRPF ने कोराग, यूसमर्ग में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था।
संदिग्ध गतिविधि मिलने के बाद चुनौती दिए जाने पर आतंकियों ने गोलीबारी की।
इसके बाद हुई मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया। सेना के अनुसार ऑपरेशन जारी था।
नोट: मूसा की पहचान और उसके कथित पुराने हमलों से जुड़ी कई जानकारियां सुरक्षा अधिकारियों/मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। सेना की शुरुआती आधिकारिक सूचना में केवल एक आतंकी के मारे जाने की पुष्टि की गई थी।
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