Indus Water Treaty: पाकिस्तान की भारत को नई धमकी, मंत्री बोले- ‘सिंधु जल रोकने वाले हाथ काट देंगे’

पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत को Indus Water Treaty के मुद्दे पर धमकी दी है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा है कि वे उन हाथों को काट देंगे जो इंदुस जल को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह धमकी पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान के एक सप्ताह बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि पाकिस्तान को लगता है कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है तो वह भारत के खिलाफ युद्ध करने से नहीं हिचकिचाएगा।

सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत को लेकर तीखा बयान देते हुए कहा कि जो भी सिंधु नदी के पानी को नियंत्रित करने या रोकने की कोशिश करेगा, “उसके हाथ काट दिए जाएंगे।”

मलिक का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल के दिनों में भारत ने स्पष्ट किया है कि वह सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के अपने फैसले पर कायम है।

रक्षा मंत्री के बयान के बाद फिर बढ़ा तनाव

मुसादिक मलिक का बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की हालिया टिप्पणी के करीब एक सप्ताह बाद आया है। आसिफ ने कहा था कि यदि पाकिस्तान को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा महसूस होता है, तो वह भारत के खिलाफ युद्ध करने से भी पीछे नहीं हटेगा।

लगातार आ रहे इन बयानों ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।

भारत अपने रुख पर कायम

पाकिस्तान की ओर से आई इन टिप्पणियों के बाद भारत ने दोहराया है कि वह सिंधु जल संधि को लेकर अपने फैसले पर कायम है। भारत का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद से जुड़े मुद्दों को देखते हुए उसके निर्णय में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

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हालांकि, भारत सरकार की ओर से पाकिस्तान के ताजा बयान पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्या है सिंधु जल संधि?

सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक जल बंटवारा समझौता है, जिसकी मध्यस्थता विश्व बैंक ने की थी।

इस संधि के तहत पूर्वी नदियों—रावी, ब्यास और सतलुज—का उपयोग मुख्य रूप से भारत को, जबकि पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चिनाब—के अधिकांश जल का उपयोग पाकिस्तान को दिया गया। इस व्यवस्था के तहत पाकिस्तान को सिंधु बेसिन के अधिकांश जल संसाधनों का उपयोग करने का अधिकार मिला।

आगे क्या?

सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक और कूटनीतिक मतभेद आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जल संसाधनों और सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बयानबाजी के बजाय संवाद और कूटनीतिक प्रयास क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अधिक महत्वपूर्ण होंगे।