ग्रेटर नोएडा।
बैंक में जमा पैसा सुरक्षित है, इसी भरोसे पर लोग अपनी जीवनभर की कमाई जमा करते हैं।
लेकिन ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा से जुड़ी शिकायतों ने खाताधारकों की चिंता बढ़ा दी है।
ऐच्छर गांव की शाखा में एफडी और बचत खातों की रकम में कथित हेरफेर का मामला सामने आया है।
शुरुआती जांच में करीब 35 करोड़ रुपये प्रभावित होने की बात कही गई है।
मामले में अब तक करीब 30 खाताधारक शिकायत कर चुके हैं।
बैंक ने शाखा प्रबंधक समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।
पुलिस और बैंक की एंटी करप्शन टीम जांच में जुटी हैं।
खातों में कम मिली रकम, शिकायतों से खुला मामला
मामले का खुलासा तब हुआ, जब कुछ खाताधारक अपने पैसे निकालने बैंक पहुंचे।
खातों की जांच के दौरान उन्हें जमा रकम में अंतर दिखाई दिया।
इसके बाद शिकायतों का सिलसिला शुरू हुआ।
खाताधारकों ने एफडी और बचत खातों से रकम गायब होने के आरोप लगाए हैं।
कुछ लोगों का दावा है कि उनकी एफडी समय से पहले बंद कर दी गईं।
इसके बाद रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
29 अक्टूबर तक करीब 30 खाताधारक शिकायत कर चुके थे।
पुलिस ने 18 खाताधारकों की एफडी और रकम में कथित हेरफेर से जुड़े मामले में केस दर्ज किया है।
बैंक मैनेजर समेत पांच कर्मचारी सस्पेंड
शिकायतें सामने आने के बाद PNB के क्षेत्रीय कार्यालय ने कार्रवाई की।
शाखा प्रबंधक समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया।
शाखा में नए कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है।
अब जांच में कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
एफडी समय से पहले कैसे बंद हुईं?
खातों से रकम किस प्रक्रिया के तहत ट्रांसफर की गई?
क्या इन लेनदेन के लिए खाताधारकों की अनुमति ली गई थी?
संदिग्ध लेनदेन में किन लोगों की भूमिका रही?
बैंक की एंटी करप्शन टीम रिकॉर्ड खंगाल रही है।
पुलिस भी शिकायतों और बैंक लेनदेन की जांच कर रही है।
मुआवजे की रकम भी जमा, परिवारों की बढ़ी चिंता
कुछ खाताधारकों की जमा पूंजी में जमीन अधिग्रहण के बदले मिली मुआवजा राशि भी शामिल बताई जा रही है।
ऐसे परिवारों के लिए रकम में कथित गड़बड़ी गंभीर चिंता का विषय है।
कई खाताधारकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें संदिग्ध लेनदेन की जानकारी समय पर नहीं मिली।
हालांकि, प्रत्येक खाते में प्रभावित रकम कितनी है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
किसान संगठन का दावा, 150 करोड़ तक की गड़बड़ी
भारतीय किसान यूनियन (कृषक) ने मामले में 130 से 150 करोड़ रुपये तक की कथित हेराफेरी का आरोप लगाया है।
संगठन ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
साथ ही प्रभावित खाताधारकों की रकम वापस दिलाने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।
हालांकि, इतनी बड़ी रकम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शुरुआती जानकारी में करीब 35 करोड़ रुपये प्रभावित होने की बात सामने आई है।
इसलिए 150 करोड़ रुपये के आंकड़े को फिलहाल संगठन का दावा ही माना जाना चाहिए।
अब जांच के नतीजों पर टिकी नजरें
पुलिस और बैंक की जांच जारी है।
जांच में संदिग्ध लेनदेन, एफडी बंद करने की प्रक्रिया और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
खाताधारकों के सामने सबसे बड़ा सवाल अपनी जमा पूंजी की सुरक्षा और वापसी का है।
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