FCRA Rules 2026: धार्मिक गतिविधियों के लिए विदेशी फंडिंग पर सख्ती, धर्मांतरण संबंधी कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध

गृह मंत्रालय ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 में बदलाव किए हैं, जिसमें धार्मिक गतिविधियों के लिए विदेशी फंडिंग के नियमों को सख्त किया गया है। धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया। संगठनों के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि हुई।

केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 (Foreign Contribution Regulation Amendment Rules, 2026) लागू करते हुए धार्मिक गतिविधियों के लिए विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा किए गए इस संशोधन का उद्देश्य विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय निगरानी को मजबूत करना बताया गया है।

नए नियमों के तहत धर्मांतरण (Conversion) से संबंधित गतिविधियों के लिए विदेशी अंशदान के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही धार्मिक उद्देश्यों के लिए पंजीकरण प्राप्त करने वाली संस्थाओं के लिए पात्र गतिविधियों की स्पष्ट सूची भी निर्धारित की गई है।

क्या है FCRA संशोधन नियम, 2026?

गृह मंत्रालय द्वारा जारी यह संशोधन Foreign Contribution (Regulation) Rules, 2011 में बदलाव करता है। इसके तहत एक नई अनुसूची (Schedule) जोड़ी गई है, जिसमें धार्मिक उद्देश्यों के अंतर्गत आने वाली स्वीकार्य गतिविधियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

सरकार का कहना है कि इससे विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों की गतिविधियों की बेहतर निगरानी संभव होगी और धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

किन धार्मिक गतिविधियों को मिली अनुमति?

नई व्यवस्था के तहत निम्नलिखित गतिविधियों को धार्मिक उद्देश्यों के लिए मान्य माना गया है:

  • धार्मिक शिक्षा एवं नैतिक शिक्षण
  • सत्संग और प्रवचन
  • ध्यान एवं योग शिविर
  • भक्ति संगीत और आध्यात्मिक कार्यक्रम
  • धार्मिक नाट्य कला और सांस्कृतिक आयोजन
  • आदिवासी एवं स्वदेशी आस्था परंपराओं का संरक्षण
  • धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन गतिविधियों के लिए विदेशी अंशदान का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा सकेगा।

धर्मांतरण गतिविधियों पर पूर्ण रोक

संशोधित नियमों का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विदेशी फंड का उपयोग किसी भी प्रकार के धार्मिक परिवर्तन या धर्मांतरण अभियान के लिए नहीं किया जा सकेगा।

सरकार का मानना है कि यह कदम विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकने और कानून के मूल उद्देश्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

जवाबदेही का दायरा बढ़ाया गया

नए नियमों के तहत केवल संस्था ही नहीं, बल्कि उसके संचालन से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों को भी जवाबदेही के दायरे में लाया गया है।

इनमें शामिल हैं:

  • निदेशक (Director)
  • ट्रस्टी (Trustee)
  • साझेदार (Partner)
  • पदाधिकारी (Office Bearer)
  • हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) का कर्ता
  • संस्था के प्रबंधन और नियंत्रण से जुड़े अन्य जिम्मेदार व्यक्ति

इस बदलाव का उद्देश्य संस्थागत स्तर पर जवाबदेही तय करना और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदारी सुनिश्चित करना है।

पारदर्शिता और निगरानी पर जोर

सरकार का कहना है कि संशोधित नियम विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों में अधिक पारदर्शिता लाएंगे। इससे फंड के उपयोग की निगरानी बेहतर होगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि विदेशी धन का उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्यों के लिए ही हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वित्तीय अनुपालन (Compliance) और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत कर सकता है।

नियमों पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

नए नियमों को लेकर विभिन्न वर्गों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कुछ विशेषज्ञ और नीति विश्लेषक इसे पारदर्शिता बढ़ाने तथा विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। वहीं कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों का कहना है कि अत्यधिक सख्त प्रावधानों से उनके संचालन और परियोजनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है।

Foreign Contribution Regulation Amendment Rules, 2026 के माध्यम से केंद्र सरकार ने धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी विदेशी फंडिंग के नियमन को और मजबूत किया है। धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध, जवाबदेही का विस्तारित दायरा और स्वीकृत धार्मिक गतिविधियों की स्पष्ट परिभाषा इस संशोधन की प्रमुख विशेषताएं हैं। आने वाले समय में इन नियमों का प्रभाव धार्मिक और गैर-लाभकारी संगठनों के कामकाज पर देखने को मिल सकता है।