अब 9वीं कक्षा से ही छात्रों को आपातकाल के बारे में पढ़ाया जाएगा। एनसीईआरटी ने शिक्षा नीति में बदलाव किया है। यह बदलाव नई शिक्षा नीति के तहत किया गया है। अब तक इसे स्कूलों में 11वीं और 12वीं कक्षा में राजनीतिक विज्ञान विषय में पढ़ाया जाता था। इसके अलावा छात्रों को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका भी पढ़ाई जाएगी।
आपातकाल का इतिहास
आपातकाल का इतिहास भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह 1975-77 के दौरान लागू किया गया था। इसके दौरान आम लोगों के मौलिक अधिकारों को खत्म किया गया था।
इसके अलावा प्रेस सेंसरशिप और नेताओं की गिरफ्तारी का पूरा ब्योरा है। यह बदलाव नई शिक्षा नीति के तहत किया गया है।
शिक्षा नीति में बदलाव
एनसीईआरटी ने शिक्षा नीति में बदलाव किया है। इसके तहत अब 9वीं कक्षा से ही छात्रों को आपातकाल के बारे में पढ़ाया जाएगा।
यह बदलाव नई शिक्षा नीति के तहत किया गया है। इसके अलावा छात्रों को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका भी पढ़ाई जाएगी। जानें शिक्षा नीति के बारे में।
आपातकाल का महत्व
आपातकाल का इतिहास भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसके दौरान आम लोगों के मौलिक अधिकारों को खत्म किया गया था।
इसके अलावा प्रेस सेंसरशिप और नेताओं की गिरफ्तारी का पूरा ब्योरा है।
- आपातकाल का इतिहास भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
- इसके दौरान आम लोगों के मौलिक अधिकारों को खत्म किया गया था।
- प्रेस सेंसरशिप और नेताओं की गिरफ्तारी का पूरा ब्योरा है।
अब 9वीं कक्षा से ही छात्रों को आपातकाल के बारे में पढ़ाया जाएगा। यह बदलाव नई शिक्षा नीति के तहत किया गया है।
इसके अलावा छात्रों को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका भी पढ़ाई जाएगी। यह बदलाव शिक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण कदम है।