CTI का दावा: INDIA ब्लॉक की रैली से दिल्ली के बाजारों में कारोबार प्रभावित, कनॉट प्लेस में सामान्य का 40% रहा व्यापार

INDIA ब्लॉक की रैली के दौरान दिल्ली के करीब 20 बाजारों में कारोबार प्रभावित रहा। कनॉट प्लेस में बिक्री घटी, जबकि चांदनी चौक और सदर बाजार में दोपहर बाद ग्राहक पहुंचे।

दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई INDIA ब्लॉक की महारैली का असर राजधानी के कई प्रमुख बाजारों में देखने को मिला। दिवाली से पहले खरीदारी के अहम रविवार को कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, सुपर बाजार, जनपथ और चावड़ी बाजार समेत करीब 20 बाजारों में कारोबार प्रभावित रहा। कारोबारियों के मुताबिक, कनॉट प्लेस में बिक्री सामान्य स्तर के मुकाबले घटकर करीब 40 प्रतिशत रह गई। वहीं, व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने आसपास के बाजारों में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ने का दावा किया है। <Cite refs={[“turn410925view0″,”turn236399search0”]}/>

कनॉट प्लेस में दुकानों पर रहा असर, ग्राहक नहीं पहुंचे

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, रैली के दौरान कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में ग्राहकों की आवाजाही काफी कम रही। कई दुकानें बंद रहीं और शाम तक भी बाजार में सामान्य दिनों जैसी रौनक नहीं दिखी।

रैली के लिए विपक्षी नेताओं और समर्थकों का मार्च कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल से मिंटो ब्रिज होते हुए रामलीला मैदान की ओर निकला था। इसके चलते कारोबारियों और ग्राहकों के बीच रास्तों, पार्किंग और भीड़ को लेकर अनिश्चितता बनी रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, कनॉट प्लेस के कारोबार में रात तक सामान्य स्तर का करीब 40 प्रतिशत ही काम हो पाया। आसपास के रेस्त्रां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी ग्राहकों की कम आवाजाही का असर दिखा। <Cite refs={[“turn410925view0″,”turn236399search2”]}/>

20 बाजारों में 11 हजार करोड़ रुपये के कारोबार पर असर का दावा

व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने दावा किया कि रैली के कारण रामलीला मैदान के आसपास स्थित करीब 20 बाजारों का कारोबार प्रभावित हुआ। संगठन के मुताबिक, इन बाजारों में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की बिक्री प्रभावित हुई।

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CTI ने यह भी दावा किया कि आसपास के बाजारों में केवल करीब 20 प्रतिशत दुकानें ही खुली थीं। दिल्ली और आसपास के शहरों से आने वाले ग्राहकों की संख्या में भी गिरावट आई। संगठन के अनुमान के अनुसार, आमतौर पर त्योहारी खरीदारी के लिए आने वाले करीब पांच लाख खरीदारों की जगह इस बार लगभग एक लाख लोग ही पहुंचे।

हालांकि, ये आंकड़े व्यापारिक संगठन की ओर से दिए गए अनुमान हैं। वास्तविक नुकसान का आकलन बाजारवार बिक्री और कारोबार के आंकड़े जुटाने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। <Cite refs={[“turn410925view0″,”turn236399search8”]}/>

दिवाली से पहले कारोबारियों को क्यों थी चिंता?

दिल्ली के बाजारों में दिवाली से पहले खरीदारी का समय कारोबारियों के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस दौरान दिल्ली के अलावा एनसीआर और आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक थोक और खुदरा खरीदारी के लिए पहुंचते हैं।

व्यापारियों को आशंका थी कि रैली के कारण ट्रैफिक प्रतिबंध, बैरिकेडिंग, पार्किंग की समस्या और भारी भीड़ से बाजारों तक पहुंचना मुश्किल होगा। CTI ने पहले ही राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने का आग्रह किया था।

संगठन का कहना था कि रैली का विरोध करना उसका उद्देश्य नहीं है, लेकिन त्योहार के समय बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित होने से बचाया जाना चाहिए।

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कारोबारियों ने कनॉट प्लेस में प्रदर्शन और रैलियों पर रोक लगाने की मांग की

नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने कहा कि बार-बार होने वाले विरोध प्रदर्शनों और रैलियों के कारण ग्राहकों में कनॉट प्लेस आने को लेकर आशंका बनी रहती है।

एसोसिएशन ने अदालत से आग्रह किया कि कनॉट प्लेस को रैलियों, विरोध प्रदर्शनों और मार्च के रास्ते से अलग रखा जाए। कारोबारियों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से उनकी आजीविका और व्यापार प्रभावित होता है।

व्यापारियों के मुताबिक, त्योहारों के समय ग्राहकों की आवाजाही कम होने से दुकानदारों और रेस्त्रां संचालकों को नुकसान उठाना पड़ता है।

राहुल गांधी ने BJP पर लगाया दुकानें बंद कराने का आरोप

रैली से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए समर्थकों से दिल्ली के बाजारों में खरीदारी करने और स्थानीय कारोबारियों का समर्थन करने की अपील की थी। हालांकि, रैली के दिन उन्होंने आरोप लगाया कि कनॉट प्लेस में भाजपा ने जबरन दुकानें बंद करवाईं।

राहुल गांधी ने कहा कि रैली में शामिल होने आए लोगों से खरीदारी करने को कहा गया था, लेकिन बाजार पहुंचने पर दुकानें बंद मिलीं। उन्होंने इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया।

दूसरी ओर, व्यापारियों के संगठनों ने बाजारों में ग्राहकों की कमी और कारोबार प्रभावित होने के पीछे रैली के कारण पैदा हुई अनिश्चितता, यातायात व्यवस्था और भीड़ की आशंका को प्रमुख वजह बताया। राहुल गांधी का आरोप राजनीतिक दावा है; उपलब्ध रिपोर्टों में दुकानों को भाजपा द्वारा जबरन बंद कराने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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चांदनी चौक और सदर बाजार में दोपहर बाद लौटी रौनक

रैली का असर सभी बाजारों में एक जैसा नहीं रहा। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, दोपहर बाद चांदनी चौक और सदर बाजार में खरीदार पहुंचने लगे। इससे दुकानदारों को कुछ राहत मिली।

चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय भार्गव ने कहा कि रैली में 10 लाख लोगों के शामिल होने के दावे के मुकाबले भीड़ काफी कम रही। उनके मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था सामान्य रहने से शाम के समय ग्राहक बाजारों में आने लगे।

सदर बाजार में भी दोपहर बाद दिल्ली और एनसीआर के खरीदार पहुंचे और कारोबार का माहौल पहले से बेहतर हुआ। वहीं, सरोजिनी नगर के व्यापारियों ने भी रविवार को उम्मीद से बेहतर कारोबार होने की जानकारी दी।

दिवाली की खरीदारी और व्यापार पर क्या होगा आगे असर?

दिल्ली के व्यापारियों की चिंता केवल एक दिन के कारोबार तक सीमित नहीं है। दिवाली से पहले खरीदारी के लिए दिल्ली के थोक बाजारों में आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में कारोबारी और ग्राहक आते हैं। ऐसे में यातायात और बाजारों तक पहुंच में बाधा का असर खुदरा दुकानदारों और माल की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, चांदनी चौक और सदर बाजार में दोपहर बाद ग्राहकों की वापसी से संकेत मिला कि सभी बाजारों में कारोबार पूरी तरह ठप नहीं रहा। आने वाले दिनों में बाजारों की स्थिति और वास्तविक बिक्री के आंकड़ों से ही यह स्पष्ट होगा कि रैली का दिवाली कारोबार पर कुल कितना असर पड़ा।