अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस की बड़ी खोज, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बल

ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अंडमान सागर में 355 मीटर गहरे समुद्र के भीतर प्राकृतिक गैस की महत्वपूर्ण खोज की है। यह सफलता भारत के समुद्र मंथन मिशन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम हो सकती है।

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भारत की सरकारी तेल एवं गैस अन्वेषण कंपनी Oil India Limited (OIL) ने अंडमान सागर में गहरे समुद्र के भीतर प्राकृतिक गैस का महत्वपूर्ण भंडार खोजा है। यह खोज भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

कहां मिली प्राकृतिक गैस?

  • अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर।
  • समुद्र की सतह से करीब 355 मीटर गहरे पानी में स्थित “श्री विजयपुरम-3” नामक अन्वेषण कुएं में।
  • गैस की मौजूदगी 1900 मीटर से अधिक गहराई वाली भू-संरचना में पाई गई।

कैसे हुई पुष्टि?

ऑयल इंडिया द्वारा किए गए प्रारंभिक उत्पादन परीक्षण के दौरान लगातार गैस फ्लेयरिंग देखी गई, जिससे प्राकृतिक गैस की उपस्थिति की पुष्टि हुई। अब कंपनी गैस के नमूनों का परीक्षण कर उसकी गुणवत्ता, संरचना और व्यावसायिक क्षमता का मूल्यांकन कर रही है।

‘समुद्र मंथन मिशन’ के लिए बड़ी उपलब्धि

यह सफलता भारत के महत्वाकांक्षी “समुद्र मंथन मिशन” से जुड़ी मानी जा रही है। इस मिशन का उद्देश्य गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस संसाधनों की खोज को बढ़ावा देना है, ताकि आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम की जा सके।

अंडमान बेसिन क्यों है महत्वपूर्ण?

अंडमान बेसिन को लंबे समय से हाइड्रोकार्बन संभावनाओं वाला क्षेत्र माना जाता रहा है। ऑयल इंडिया द्वारा इस अभियान के तहत खोदे गए तीन अन्वेषण कुओं में से दो में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी मिलने की जानकारी सामने आ चुकी है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र में भविष्य में और भी बड़े भंडार मिल सकते हैं।

भारत को क्या होगा फायदा?

  • प्राकृतिक गैस उत्पादन में वृद्धि।
  • ऊर्जा आयात बिल में कमी।
  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
  • पेट्रोकेमिकल, बिजली और उर्वरक उद्योगों को दीर्घकालिक लाभ।
  • गहरे समुद्र में अन्वेषण तकनीक और विशेषज्ञता को बढ़ावा मिलेगा।

वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी भारत की भूमिका

इस खोज के बाद भारत गहरे समुद्री ऊर्जा अन्वेषण के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। साथ ही Petrobras, TotalEnergies, BP, Shell और ExxonMobil जैसी वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

यह खोज अभी प्रारंभिक चरण में है। गैस भंडार की वास्तविक मात्रा और व्यावसायिक उत्पादन क्षमता का पता विस्तृत परीक्षणों और आगे की ड्रिलिंग के बाद ही चल सकेगा।