कोटा। कोटा से एक और आत्महत्या का मामला सामने आया है. इस बार एक 16 साल की छात्रा खुदकुशी की है । रिपोर्ट्स के मुताबिक वह कोटा में मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम NEET की तैयारी कर रही थी। राजस्थान के कोटा को भारत का कोचिंग हब माना जाता है। पिछले 8 महीनों में यहां 25 स्टूडेंट्स आत्महत्या कर चुके हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक मरने वाली छात्रा का नाम रिचा था, जो रांची की रहने वाली थी और ब्लेज होस्टल में रह रही थी। छात्रा के डेड बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल कोटा में लगभग 2 लाख छात्र नीट और जेईई एग्जाम क्लियर करने आते हैं और हर साल कई सुसाइड की घटनाएं सामने आती हैं। इस साल कुल 25 स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की है जो पिछले सालों में सबसे ज्यादा है।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 2022 में 15 छात्रों ने आत्महत्या की थी। वहीं 2019 में 18 छात्रों ने, 2018 में 20, 2017 में 7, 2016 में 17 और 2015 में 18 छात्राओं ने आत्महत्या की थी। कोविड के दौरान यानी 2020 से 2021 के बीच कोई भी सुसाइड नोट नहीं की गई थी।
कोटा में आत्महत्या की बड़ी वजह कोचिंग संस्थानों द्वारा स्टूडेंटस को कैटेगरी में बांट कर अध्ययन कराना है। जो सबसे कमजोर है,वह सबसे पीछे की कैटेगरी में। उसके शिक्षण की व्यवस्था भी उसी गुणानुपात में होती है जबकि फीस सभी से बराबर ली जाती है। ऐसे में कमजोर बच्चे बड़ी धनराशि खर्च कर भी जब सफलता अर्जित नहीं कर पाते तो वे अवसाद में इस तरह का कदम उठाते हैं।
कोटा में आत्महत्याओं की घटनाओं के मद्देनजर, जिला प्रशासन ने पहले एक आदेश जारी किया था जिसमें सभी हॉस्टल के कमरों और पेइंग गेस्ट हाउस में स्प्रिंग-लोडेड पंखे लगाने को जरूरी किया गया था. हालांकि काफी लोगों ने इसे परमानेन्ट समाधान नहीं माना था. इस बीच, राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य के कोचिंग संस्थानों, विशेषकर कोटा में छात्रों के जरिए आत्महत्या को रोकने के लिए सिफारिशें मांगीं हैं.
अदालत ने बच्चों की साइकोलॉजिकल काउंसिलिंग पर ध्यान देने की जरूरत पर भी जोर दिया है. आपको जानकारी के लिए बता दें राजस्थान का कोटा कोचिंग का हब माना जाता है. यहां स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग और मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करते हैं.