ईरान और अमेरिका के बड़े फैसलों से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट

 

वैश्विक तेल बाजार में मची उथल-पुथल के बीच ईरान और अमेरिका से आई दो बड़ी खबरों ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम कर दिया है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 10% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत सहित दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद जगी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से सप्लाई में सुधार

पहली अहम खबर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। ईरान ने इसे फिर से कमर्शियल जहाजों के लिए खोल दिया है। हालांकि सुरक्षा कारणों से केवल निर्धारित सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग किया जा सकेगा। इस फैसले से वैश्विक तेल सप्लाई में सुधार की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट रूट्स में से एक माना जाता है।

अमेरिका ने बढ़ाई रूसी तेल खरीद की छूट

दूसरी ओर, अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद पर दी गई छूट को आगे बढ़ा दिया है। नए लाइसेंस के तहत, जो तेल 17 अप्रैल तक जहाजों पर लोड हो चुका है, उसे अब 16 मई तक खरीदा जा सकेगा। पहले यह छूट 11 अप्रैल को समाप्त होनी थी। इस फैसले से बाजार में अतिरिक्त तेल की उपलब्धता बनी रहेगी।

कीमतों में आई बड़ी गिरावट

इन दोनों फैसलों का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड अपने पिछले महीने के 119 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से गिरकर 88.8 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया है। यह गिरावट 10% से अधिक की है, जो वैश्विक बाजार के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों का मुख्य उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की कमी को रोकना और बढ़ती महंगाई पर काबू पाना है। रूस का दावा है कि इस छूट के चलते बाजार में लगभग 10 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल आ सकता है, जो वैश्विक खपत के एक दिन के बराबर है।

फैसले पर उठे सवाल

हालांकि अमेरिका के इस फैसले का विरोध भी हो रहा है। कुछ आलोचकों का कहना है कि प्रतिबंधों के बावजूद इस तरह की छूट से रूस और ईरान जैसी अर्थव्यवस्थाओं को अप्रत्यक्ष समर्थन मिल रहा है, जिससे भू-राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

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