:: रवि अवस्थी,तामोट
नेता वही जो लोगों के दिल पर राज करे। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ऐसी ही शख्सियत हैं। जो अपने कर्म व वाणी से लोगों के दिल में बस गए। प्रदेश के मुखिया पद से हटे तो चाहने वालों के आंसू निकल आए।लाड़ली बहनों का करुण विलाप,बच्चों का अपना ‘मामा’ के प्रति अगाध स्नेह किसी से छिपा नहीं है।आमजन की सर्वाधिक भीड़ राजधानी में आज भी किसी राजनेता के निवास पर जमा होती है तो वह ‘मामा के घर’में।
मप्र के सर्वाधिक समय मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने में शिवराज जी यदि सफल रहे तो इसकी एक बड़ी वजह यही कि सार्वजनिक जीवन में उन्होंने मित्र ज्यादा बनाए। एक ऐसा राजनेता जिसका कोई कड़ा विरोध न हो। न अपने दल में,न विपक्ष या व्यवस्था के अन्य हिस्सों में। यह उनके मुख्यमंत्रित्वकाल की बड़ी विशेषता कही जा सकती है। सबका साथ,सबका विकास व सबका विश्वास वाले बीजेपी के मूल मंत्र को उन्होंने दिल से अपनाया।
करीब 17 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज जी ने कई बार अपमान के कड़वे घूंट पिए तो आलोचकों की निंदा व स्वार्थियों का दबाव भी सहा।इस पर क्षणिक नाराजगी भले दिखाई हो लेकिन संबंधित के खिलाफ कभी बदले की भावना से काम नहीं किया। लिहाजा प्रतिद्वंदी व आलोचक भी उनके इस व्यवहार के कायल हुए। कहा गया-व्यक्ति की असल पहचान ,उसे मिली’प्रभुता’के समय ही होती है,लेकिन शिवराज जी पर यह बात लागू नहीं होती। सेवा व अंत्योदय का जो भाव उनके हृदय में पहले था। वही मुख्यमंत्री रहते हुए कायम रहा। मप्र की राजनीति में गरीब बेटियों की शादियां कराने के चलन को उनकी देन कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा।
यह काम उन्होंने तब शुरू किया,जब सामाजिक व आर्थिक कारणों से अनेक लोगों के लिए बेटियां बोझ समझी जाती थीं।
अपने सेवाभाव से वह न केवल इनके मददगार बनें,बल्कि बेटियों को लेकर व्याप्त सामाजिक धारणा को भी उन्होंने बहुत हद तक बदला। सत्ता का साथ व अधिकार मिला तो बेटियों व माता—बहनों के कल्याण को उन्होंने अपना मिशन बना लिया। बालिकाओं की शिक्षा-दीक्षा,उनके बेहतर भविष्य की चिंता,महिला सशक्तिकरण व युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की फिक्र उन्होंने की तो गरीब,बुजुर्गों की हसरतों को भी पूरा करने का जतन किया। धर्म-अध्यात्म,संस्कृति के बेहतर विकास के साथ स्वस्थ व खुशहाल समाज भी उनके चिंतन व कर्म में सदैव रहा। अपने कठोर परिश्रम से उन्होंने मध्य प्रदेश को बीमारू राज्य से समृद्ध राज्य की श्रेणी में ला खड़ा किया।
जरूरतमंदों की मदद व किसी की मुसीबत में कंधे से कंधा मिलाकर उसके साथ कैसे खड़ा रहा जाता है,यह कोई उनसे सीखे।
शिवराज जी ने आपदा में अवसर नहीं तलाशे बल्कि हकीकत में पीड़ितों के आंसू पोंछने व उन्हें ढाढ़स बंधाने का काम किया। उन्होंने लगातार पौधरोपण कर दिखाया कि वह अपने संकल्प के प्रति भी दृढ़ प्रतिज्ञ हैं।
पद से हटाए गए तो उन्हें इस बात का संतोष रहा कि पार्टी ने जो सियासी ताकत उन्हें सदन में सौंपी थी,वहीं वह लौटाने में सफल रहे।
उनके चिंतन व कर्म में स्वामी विवेकानंद का दर्शन है तो बीजेपी के पितृ पुरुष पंडित दीनदयाल उपाध्याय का दिया’अंत्योदय’मंत्र भी। कठोर परिश्रम,धैर्य व विनम्रता उनका गुण हैं।
इसके चलते पद का मद उन्हें कभी छू न सका,बल्कि इन गुणों को उन्होंने अपनी ताकत बनाया। जो 65वर्ष की उम्र में भी उनके लिए वरदान बनी हुई है।
उनकी ताकत और अधिक समृद्ध हो,यश बढ़े। मां नर्मदा का आशीर्वाद व कृपा उन पर सदा रहे। इसी अभिलाषा के साथ शिवराज जी को उनके जन्मदिन की हार्दिक शुभकामना,बधाई।