हाईकोर्ट की फटकार के बाद एक्शन: टीकमगढ़ के नायब तहसीलदार और एसडीएम निलंबित

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद टीकमगढ़ के दो राजस्व अधिकारियों को निलंबित किया गया। आदेश पालन में देरी और गलत आदेश के मामले में प्रमुख सचिव को भी अदालत में पेश होना पड़ा।

ऋषभ जैन,टीकमगढ़।

न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में देरी और गलत राजस्व आदेश पारित किए जाने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए टीकमगढ़ जिले के दो राजस्व अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों का समयबद्ध और अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

प्रमुख सचिव को होना पड़ा कोर्ट में पेश

मामला वर्ष 2022 में दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है, जिसमें वर्ष 2021 के न्यायालयीन आदेश का पालन नहीं होने का आरोप लगाया गया था। सुनवाई के दौरान राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को स्वयं अदालत में उपस्थित होना पड़ा। उन्होंने आदेशों के पालन में हुई देरी पर बिना शर्त माफी मांगी और अतिरिक्त अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

गलत आदेश निरस्त, नया आदेश जारी

                                                                                                                                          (SDM Sanjay Dubey)

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 30 जून 2026 को नायब तहसीलदार द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर 1 जुलाई 2026 को राजस्व मंडल के निर्देशों के अनुरूप नया आदेश जारी किया गया। इसके तहत याचिकाकर्ताओं के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर दिए गए हैं, हालांकि यह प्रविष्टि लंबित रिट अपील के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

दो अधिकारियों पर गिरी गाज

प्रकरण में लापरवाही पाए जाने पर लिधौरा के नायब तहसीलदार शिब्बू सिंह कसोरिया तथा जतारा के प्रभारी एसडीएम एवं डिप्टी कलेक्टर संजय दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिला कलेक्टर को वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित कर मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

अदालत ने कहा कि अधीनस्थ अधिकारियों के कामकाज की जानकारी विभागीय प्रमुखों को भी होना चाहिए। न्यायालय ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिए कि भविष्य में अदालत के आदेशों के अनुपालन में किसी प्रकार की देरी न हो और उनका पूरी निष्ठा के साथ पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके बाद अवमानना याचिका का निराकरण कर दिया गया।